छठे चरण की बैठक में सरकार और किसानों नेताओं के बीच बनी दो मामलों पर सहमति, अगली बैठक चार जनवरी को

छठे चरण की बैठक में सरकार और किसानों नेताओं के बीच बनी दो मामलों पर सहमति

बता दें कि केंद्र सरकार और कृषि क़ानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों के बीच इसी बुधवार  30 दिसंबर को छठे चरण की वार्तालाप हुई है। किसानों के साथ विज्ञान भवन में हुई इस बैठक के बाद सरकार की तरफ से उस बैठक में उपस्थित केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि बातचीत बहुत ही अच्छे माहौल में हुई है। इतना ही नहीं चार मामलों में से दो मामलों में सरकार और किसानों के मध्य में सहमति भी बनी है।

छठे चरण की बैठक

छठे चरण की बैठक पहले से बेहतर,सरकार ने इस बार दिखाया काफ़ी लचीलापन

ग़ौरतलब है कि बिजली क़ानून एवं पराली जलाने के मामले में जुर्माने के विषयों पर केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच सहमति बनी है। मगर तीनों कृषि क़ानूनों की वापसी एवं एमएसपी की क़ानूनी गारंटी के मामलों पर  दोनों पक्षों के मध्य अभी भी गतिरोध जारी ही है। इसी बीच किसान नेता रजिंदर सिंह दीपसिंहवाला ने बताया कि जो अन्य मांगें है वरीयता सूची में पहली एवं दूसरी मांग है। जिसमें कृषि क़ानूनों को रद्द करना एवं एमएसपी को लीगल राइट बनाने का विषय है उस पर सरकार एवं किसान नेताओं के मध्य अगली बैठक चार जनवरी को होने वाली है। दीपसिंहवाला ने कहा कि उनकी 30 दिसंबर की  बैठक एक अच्छे माहौल में ही हुई है। उन्होंने बताया कि सरकार से उन लोगों की चार प्रमुख मांगे थीं और जिनमें से दो मांगे सरकार ने मान लिया है।

जिसमें पहले तो इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2020 जिसे अब सरकार वापस लेने जा रही है। इस बिल के साथ लाखों किसानों को जो मुफ़्त बिजली ट्यूबवेल के लिए मिलती थी। शायद वो छिन सकती थी मगर अब वो मुफ़्त ही रहेगी। वहीं दूसरी पराली प्रदूषण के नाम पर किसानों पर  करोड़ रुपये जुर्माने का जो प्रावधान सरकार द्वारा लाया गया था। उसे भी अब वापस लिया जाने वाला है।


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आन्दोलन कोई अराजकता नहीं बल्कि यह लोगों का गुस्सा

इसी बीच महत्त्वपूर्ण है कि किसान नेता रजिंदर सिंह दीपसिंहवाला ने कह दिया कि वे लोग जो लंगर का खाना लेकर गए थे। उसी लंगर के खाने में से सरकार ने भी खाना खाया एवं लंगर का खाना खाकर आज उन्होंने नमक का कुछ हक़ अदा किया है एवं दो मांगें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि चार तारीख़ को स्पष्ट तौर पर कृषि क़ानूनों को निरस्त करने की बात होगी और उस दिन फ़िर लंगर का खाना खिलाया जाने वाला है। जिसके बाद उनसे फिर हम कहेंगे कि इस देश का और गुरू घर के लंगर के नमक का पूरा हक़ अब अदा कर दीजिए।

हालांकि किसान नेता ने यह बताया कि आंदोलन अभी भी शांतिपूर्ण तरीक़े से जारी रहने वाला है एवं शुरू से ही किसान स्पष्ट कह रहें हैं कि वे लोग कृषि क़ानून को वापस लेने के मुद्दे पर वही रहेंगे। उन्होंने कहा सरकार इन कृषि क़ाननों पर नहीं सुन रही जिस कारण से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा था और यह कोई अराजकता नहीं बल्कि लोगों का गुस्सा है। इतना ही नहीं नए वर्ष पर देश के समस्त लोगों से उन्होंने अपील की  कि दिल्ली के हर मोर्चे पर जहां आंदोलन जारी है। वहां से लोग आएं कारण किसान अपने घर नहीं जाने वाले हैं ।

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