यूपी में स्कूल बंद होने से फेल हुई शिक्षा व्यवस्था

यूपी शिक्षा व्यवस्था में लड़कियों के साथ भेदभाव

देश में कोरोना महामारी के कारण शैक्षणिक संस्थान बंद होने से सरकार लगातार शैक्षणिक निरंतरता हासिल करने के लिए ऑनलाइन शिक्षा को प्रोत्साहित कर रही है। लेकिन हाल ही के सर्वे में ऑनलाइन शिक्षा के नाकामियों को दर्शाने वाली कई कठोर सच्चाई सामने आई है। सरकार द्वारा किए गए सर्वेक्षण के नतीजे बताते है कि उत्तरप्रदेश में स्कूल बंद होने से बच्चों की पहुंच पढ़ाई में बहुत कम हो गई है और इसमें में लड़कियों के साथ बहुत भेदभाव हो रहा है।

यूपी में शिक्षा व्यवस्था 

यूपी में ऑनलाइन माध्यम की शिक्षा व्यवस्था कम

पूरे देश में उत्तरप्रदेश की स्थिति ऑनलाइन माध्यम की पहुंच में बहुत कम है। यहां बहुत सारे लोगो के पास  मोबाइल, कम्प्यूटर और इंटरनेट के सुविधा उपलब्ध नहीं है और अगर है भी तो लोग लड़कियों से ज्यादा लड़कों को इसमें महत्व देते है। यह नतीजे कुछ महीनों पहले केंद्र और बजट और नीति अध्ययन केंद्र द्वारा 5 राज्यों (यूपी सहित) में एक सर्वेक्षण के दौरान किया गया था। यह ऑनलाइन शिक्षा की कठोर सच्चाई सामने लेकर आई है। सर्वेक्षण के नतीजे यह भी दर्शाते है कि राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे ऑनलाइन शिक्षा के प्रयासों के बावजूद अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

दीक्षा ऐप से भी पढ़ाई की कोशिश हुई नाकाम, 2% से भी कम सफलता

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उत्तरप्रदेश में नवंबर मध्य में राज्य सरकार ने स्कूल बंद होने के बाद बच्चों में पढ़ाई की रुचि को जगाए रखने के लिए कई कदम उठाए थे। इनमें उत्तरप्रदेश के शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के शिक्षकों को हर महीने कम से कम दस छात्रों के फोन में NCERT का दीक्षा ऐप डाउलोड सुनिश्चित करना था। लेकिन इसके ठीक एक महीने बाद के आंकड़े बताते है कि राज्य के 75 में से 65 जिलों में 2% से भी कम बच्चों के मोबाइल में यह ऐप डाउनलोड किया जा सका।


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यूपी में शिक्षा व्यवस्था 

यूपी में हाल ही में हुए सर्वेक्षण में यह भी पता चला है कि कैसे प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षा स्कूल के लिए एक खराब विकल्प है क्योंकि यहां तक कि घर पर प्रौद्योगिकी की उपस्थिति ने शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित नहीं की है जो कि अगर महिला थी तो और भी कम हो गई थी। लड़के लड़की की पढ़ाई के स्तर में बराबरी की बात करे तो यह किसी से छुपा नहीं, पुरुष तकनीकी उपकरणों को नियंत्रित करते हैं तो उन तक लड़कियों की पहुंच कम हो जाती है । पिछले कुछ महीनों में यह साबित भी हुए है की डिजिटल माध्यम से शिक्षा जारी रखना लड़कियों लिए और अधिक कठिन हो गया है।

शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत

स्कूलों के बंद होने के बाद शिक्षा की स्तर में को गिरावट आई है फिलहाल ऑनलाइन शिक्षा से उसे पूरा करना यूपी में नामुमकिन है। इसका सिर्फ एक उपाय है वह फिर से स्कूलों को सुरक्षा का ध्यान रखते हुए खोलना है। इसके साथ बजट में वृद्धि और छात्रों, विशेषकर लड़कियों के लिए अच्छे ट्यूशन और काउंसलिंग सहायता उपलब्ध करवाना हैं। सरकार का कर्तव्य है कि वह छात्रों  को #RightToEducation के प्रावधानों की गारंटी दे।

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Shreya Sinni

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