बिहार में शिक्षा व्यवस्था ठप पड़ी हुई, ज्यादातर स्कूल वीरान

बिहार में ज्यादातर स्कूल खाली एवं वीरान 

आम लोगों की जिंदगी में शिक्षा का क्या महत्व होता है इससे हम सभी वाकिफ हैं। शिक्षा इंसान को ना सिर्फ जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है बल्कि कई बार रोजी-रोटी का भी काम देती है। 2020 का पूरा साल कोविड-19 के भेंट चढ गया और इसका सबसे बुरा असर पड़ा है भारतीय शिक्षा प्रणाली पर क्योंकि कोविड-19 के दौरान सरकार द्वारा लॉकडाउन लगाए गए जिसके बाद देशभर के सभी शैक्षणिक संस्थानों को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया।

बिहार स्कूल

अब धीरे-धीरे जब जिंदगी पटरी पर लौटने लगी है तो देश भर के कई कॉलेज एवं स्कूल पूर्ण सुरक्षा के साथ खुल रहे हैं। सरकार द्वारा स्कूल दोबारा से खोलने का फैसला तो दे दिया गया लेकिन देशभर के कई इलाकों में स्कूल विरान एवं खाली पड़े हैं। बिहार सरकारी स्कूल का हाल किसी से छुपा नहीं है। सरकार द्वारा पूर्ण प्रबंध करने के बावजूद बिहार के सरकारी स्कूल की हालत में सुधार नहीं आया है।

बिहार में कई विद्यालय ऐसे हैं जहां स्कूल के लिए बड़ा बिल्डिंग बना दिया गया है लेकिन उसमें पढ़ने वाला बच्चा एक भी नहीं है। गांव की गाय एवं बकरियां विद्यालय के भीतर घूमते हुए पाई जाती हैं।


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बिहार का कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल की वैकेंसी सीटें खाली

बिहार स्कूल

बिहार का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय भारतीय सरकार द्वारा चलाया जाता है जिसे लड़कियों की शिक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसका मकसद यही था कि बिहार में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा मिल सके और घर से बाहर निकल कर बेटियां शिक्षा जैसा मौलिक अधिकार ग्रहण कर सके लेकिन अभी इस योजना के अंदर शामिल अधिकतर विद्यालयों का हाल ऐसा है कि 8000 वैकेंसी सीटें खाली पड़ी हैं।

इस योजना का मकसद बहुत नेक था लेकिन स्थानीय सरकार ने जमीनी तौर पर वहां के लोगों को अपनी बेटियों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया या नहीं? यह सवाल बहुत अहम है‌ क्योंकि इतनी भारी संख्या में स्कूल की सीट खाली नहीं पड़ी रहती।

कई विद्यालयों में टॉयलेट की सुविधा नहीं है

बिहार के कई स्कूल ऐसे हैं जहां विद्यालयों में टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं करवाई गई है। इस समस्या के कारण लड़कियों को अक्सर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। एक लड़की ने बातचीत के दौरान बताया कि टॉयलेट ना होने के कारण कई बार हमारे कपड़ों में महीने का दाग लग जाता है और इससे हमें शर्मिंदगी उठानी पड़ती है।

इन्हीं सब बुनियादी दिक्कतों की वजह से कई लड़कियां विद्यालय जाने से कतराती हैं। भारतीय सरकार को आगे आकर इस मसले का हल निकालने की जरूरत है। योजना तो हर सरकार द्वारा बनाई जाती है लेकिन उसे जमीनी तौर पर उतारने के लिए सभी को साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

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Aparna Vatsh

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