बिहार: मुर्दे के दाह संस्कार के लिए शव लेकर बैंक पहुंचे ग्रामीण

बिहार में शव के साथ बैंक में दाखिल हुए ग्रामीण

बिहार के पटना में एक चौका देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मुर्दा अपने ही दाह संस्कार के लिए पैसे लेने बैंक पहुंच गया। दरअसल खबर यह थी कि गांव के कुछ लोग एक शव को अपने साथ लेकर बैंक पहुंच गए जिसके बाद बैंक में हड़कंप मच गया। लोगों ने मृतक के बैंक खाते में जमा पैसों को निकालने की मांग की। इन सब से परेशान होकर बैंक प्रबंधक को आखिरकार पैसे देने पड़े।

बिहार में 'मुर्दा' पहुंचा अपने बैंक खाते से जमा पैसा लेने, कर्मचारियों के बीच मची अफरा-तफरी

नहीं था कोई परिजन पड़ोसी देते थे खाना

महेश यादव ने शादी नहीं की थी जिस वजह से उनका कोई परिजन नहीं था। यादव की पड़ोसी शकुंतला देवी ने बताया कि महेश के पास कोई जमीन नहीं थी ना ही उन्हें सरकार से कोई मदद मिलती थी। वे आगे बताती है कि, “जबकि महेश कई महीनों से बीमार थे फिर भी उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। हम ही उन्हें खाना और बाकी चीजें देते थे।“


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यह था पूरा मामला जानिए

गजब...जब अर्थी के साथ ही पैसे निकलवाने बैंक पहुंचा 'मुर्दा', उड़े अधिकारियों के होश - when the corpse reached the bank to withdraw money | Bihar News

दरअसल मृतक यानी कि महेश यादव की मृत्यु मंगलवार को हो गई थी। वह 55 साल के थे तथा एक लंबी बीमारी के बाद उनका देहांत हो गया था। बताया जा रहा है कि महेश यादव एक किसान थे।

उनके घर में उनका कोई भी परिजन नहीं था। पड़ोसियों को उनकी मृत्यु के बारे में भी कई घंटों बाद पता चला। उन्होंने महेश के घर में अंतिम संस्कार के लिए पैसों की तलाश की लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। उनके हाथ महेश की पासबुक लगी जिसमें पता चला कि महेश के पास 1,17,298.28 रुपये थे।

बैंक मैनेजर ने दिए पैसे

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गांव वाले शव को लेकर कई घंटों तक बैंक में बैठे रहे तथा उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें पैसे नहीं मिले तब तक वह नहीं जाएंगे। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र कुमार ने एएफ़पी को बताया कि, “दोपहर को गांव वालों ने पासबुक ली और यादव का शव लेकर बैंक पहुंच गए। गांव वालों ने तब तक जाने से मना कर दिया जब तक उन्हें पैसे नहीं मिलते। साथ ही गांव वालों ने कहा कि यदि बैंक मैनेजर उन्हें पैसे नहीं देते तो वह महेश का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इससे बैंक पर दबाव आ गया और स्थानीय पुलिस के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार पैसे दे दिए गए।“

बता दे, शुरुआत में बैंक प्रबंधन ने नोमनी ना होने की वजह से पैसे देने से मना कर दिया था जिसके बाद गुस्साए लोगों ने शव को बैंक के अंदर ही रख दिया। जिससे मजबूर होकर शाखा प्रबंधक संजीव कुमार को अपने जेब से 10,000 रुपये देने पड़े। इन सब घटनाक्रम के बाद ही ग्रामीण शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे।

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