बिहार का सबसे पुराना पटना कॉलेज 159 वर्ष का हुआ, आइए जानते हैं इसके इतिहास के बारे में

सबसे पुराना पटना कॉलेज का 159वां स्थापना दिवस

पटना कॉलेज का 159वां स्थापना दिवस शनिवार को कॉलेज के सेमिनार हॉल में मनाया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी होंगे। वहीं पूर्व कुलपति प्रोफेसर रास बिहारी सिंह भी इस मौके पर मौजूद होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वर्तमान कुलपति प्रोफेसर गिरीश कुमार चौधरी करेंगे। सभी अतिथि सबसे पहले संयुक्त रुप से कॉलेज का ध्वज फहराएंगे और इसके बाद कार्यक्रम की शुरुआत होगी। जानकारी के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:00 से 12:00 के बीच किया जाएगा। इस खास मौके पर कॉलेज के प्रोफेसर शिव सागर की पुस्तक पटना कॉलेज एक परिचय का उद्घाटन भी किया जाएगा।

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पटना कॉलेज की स्थापना करीब 159 वर्ष पहले हुई थी। इसी से पता लगाया जा सकता है कि इसका इतिहास कितना पुराना रहा होगा। पूरे राज्य का यह पहला कॉलेज था। हालांकि यह पटना यूनिवर्सिटी का कॉलेज है लेकिन इसका इतिहास उससे भी पुराना है। पीयू के 103 वर्ष हुए हैं। एक समय ऐसा भी हुआ करता था जब पटना कॉलेज ईस्ट के ऑक्सफ़ोर्ड के नाम से जाना जाता था।

बिहार विधान परिषद की पहली बैठक पटना कॉलेज में हुई थी

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बता दें बिहार विधान परिषद की पहली बैठक इसी कॉलेज के सेमिनार हॉल में हुई थी। 2012 में विधान परिषद के एक विशेष सत्र ने उस पहली बैठक के 100वीं वर्षगांठ मनाने हेतु कॉलेज के सेमिनार हॉल में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसी बात से पता लगाया जा सकता है कि कॉलेज का इतिहास राजनीतिक रूप से भी जुड़ा हुआ है। पटना कॉलेज को बिहार का स्वर्णिम कॉलेज कहा जाता है।


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वर्तमान में पटना कॉलेज को कुछ सुधार की जरूरत

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एक समय था जब पूरे राज्य में पटना कॉलेज का बोलबाला हुआ करता था। ना सिर्फ राज्य के बच्चे बल्कि दूसरे राज्य के भी विद्यार्थी पटना कॉलेज पढ़ने आते थे। शिक्षा के मामले में इस कॉलेज में बहुत ऊंचा मुकाम हासिल किया था। बिहार को गौरवान्वित एवं आगे बढ़ाने में पटना कॉलेज की भूमिका भी बेहद अहम है। लेकिन वर्तमान की अगर बात की जाए तो इस कॉलेज में कुछ ख़ामियाँ है जिसे सुधारने की जरूरत है ताकि पटना कॉलेज अपना खोया हुआ रुतबा दोबारा हासिल करे।

वर्तमान में पटना कॉलेज में केवल 18 नियमित शिक्षक है। सारे कोर्स को मिलाकर अगर देखा जाए तो यहां करीब 2000 विद्यार्थी पढ़ते हैं। अभी के समय में यहां शिक्षकों के कुल 61 स्वीकृति पद उपलब्ध हैं। पूरी कॉलेज में केवल एक लाइब्रेरियन है और एक भी लैब टेक्नीशियन को नहीं रखा गया है। यह तमाम बुनियादी चीजें ऐसी है जो कॉलेज की ख़ामियों को उजागर कर रही है। इस मामले पर कॉलेज एवं राज्य सभी को साथ आकर इस ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्था को दोबारा गति देने का काम करना चाहिए ताकि फिर से पूरे राज्य समेत देश भर में इस का बोलबाला हो।

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Aparna Vatsh

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