किसान आंदोलन में शामिल हुए 50 से अधिक पहलवान

किसान आंदोलन पर पहलवान ने कहा सरकार को क़ानून वापस लेना चाहिए

किसान आंदोलन को लगभग डेढ़ महीने हो चुके हैं और हर बीते दिन के साथ यह आंदोलन बढ़ता ही जा रहा है। अन्नदाता कड़ाके की ठंड में दिल्ली से सटे कई बॉर्डर पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।इस आंदोलन के दौरान किसान वर्ग की कई झलकियां भी देखने को मिली। समाज का कोई हिस्सा किसानों के समर्थन में आगे आया एवं इस आंदोलन में शामिल हुआ।

किसान आंदोलन पहलवान

अन्नदाता की मांग है कि जब तक तीनों कृषि क़ानून को सरकार रद्द नहीं करती है उनका आंदोलन जारी रहेगा तो वहीं दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि वह इस क़ानून में संशोधन अवश्य कर सकती है लेकिन इसे वापस नहीं ले सकती क्योंकि इस क़ानून को किसान के हित के लिए ही बनाया गया है।

इस आंदोलन के दौरान सरकार एवं किसान संगठन के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई लेकिन अभी तक इसका कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी अहम सुनवाई होनी है। फिलहाल रविवार को गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का समर्थन करने के लिए 50 से अधिक पहलवान सामने आए और आंदोलन का हिस्सा बने।

पहलवानों ने कहा सरकार को कृषि क़ानून वापस लेना होगा

किसान आंदोलन पहलवान

देश के अलग-अलग हिस्सों से गाजीपुर बॉर्डर पर रविवार को 50 से अधिक पहलवान इकट्ठा हुए। यह सभी किसानों के समर्थन में किसान आंदोलन में सम्मिलित होने आए थे और इन सभी ने एक सुर में कहा कि सरकार को कृषि क़ानून वापस लेना होगा। यह सभी पहलवान कुश्ती का मैट भी लेकर आए थे।

इन सभी ने किसानों का हौसला बढ़ाने के लिए मैदान पर कुश्ती के कई मैच भी खेले। एक मीडिया चैनल से खास बातचीत के दौरान उत्तर प्रदेश कि एक पहलवान मीनाक्षी ने कहा कि वह लोग यहां किसानों का समर्थन करने आए हैं जो 1 महीने से भी अधिक वक्त से यहां प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कोच द्वारा उन्हें यहां आने का आमंत्रण मिला है। किसान आंदोलन का हिस्सा बनकर मीनाक्षी ने अपनी खुशी जाहिर की।


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देश के कई राज्यों से पहलवान किसान आंदोलन में शामिल

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आपको बता दें कि इस आंदोलन को हर बीतते दिन के साथ समाज के कई वर्गों का समर्थन प्राप्त हो रहा है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अब देश के कई राज्यों से पहलवान इस आंदोलन में शामिल होने आए। भारतीय किसान यूनियन के नेता ने कहा की पहलवान अधिकतर उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं राजस्थान से आए हैं।

इनमें से कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कुश्ती के मुकाबले में हिस्सा लिया है और देश एवं राज्य का नाम रोशन किया है।हरियाणा से आए एक पहलवान सूरज ने कहा कि उनके परिवार के सदस्य भी किसान हैं और वह नहीं चाहते कि उन्हें किसी दिक्कतों का सामना करना पड़े। सरकार को तुरंत ही कृषि क़ानून को वापस लेने की आवश्यकता है। आपको बता दें कि आज किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई भी होनी है।इसी के साथ सरकार एवं किसान संगठन के बीच अगली बातचीत की तारीख 15 जनवरी को तय की गई है। 

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Aparna Vatsh

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