बिहार सरकार ने स्कूलों में पढ़ाई ड्रॉपआउट की दर में बढ़ोतरी पर किया चिंता व्यक्त 

डेटाबेस तैयार करने के लिए नई योजना

बिहार सरकार एवं राज्य शिक्षा विभाग ने चिंतित होकर स्कूल ड्रॉपआउट की दर पर टैब रखने में मदद होने के लिए डेटाबेस तैयार करने की योजना बनाई है। राज्य में सभी छात्रों पर उच्च माध्यमिक कक्षाओं तक पहुंचने के लिए एक डेटाबेस तैयार किया जाना है।

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हम आपको बता दें कि 2018-2019 के जो आंकड़े  विभाग के पास उपलब्ध हैं। उसके हिसाब से कक्षा I में 24,03,526 बच्चों का नामांकन किया गया था। इस संख्या को कक्षा X में 15,37,628 एवं कक्षा XII में 6,31,379 तक गिराया गया था। वहीं दूसरी ओर छात्राओं का ड्रॉपआउट रेट काफी अधिक पाया गया था। जिसके हिसाब से कक्षा I में नामांकित 11,52,680 लड़कियों में से मात्र 2,99,672 कक्षा XII में पहुंचीं थी।

ड्रॉपआउट को देखा गया दो चरणों में

ड्रॉपआउट

ग़ौरतलब है कि नेशनल स्टेटिस्टिकल ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार में ड्रॉपआउट वर्ष 2017- 2018 प्रतिशत 30.5% पाया गया था। इसके साथ ही शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने  बताया कि अधिकतम ड्रॉपआउट को दो चरणों में देखा गया है। पहला चरण, जब बच्चे प्राथमिक यानी कक्षा I से V से मिडिल स्कूल यानी कक्षा आठवीं तक गए एवं जब मध्य से हाई स्कूल यानी कक्षा IX से XII तक गए थे।

हालंकि उच्च स्तर को छोड़ने की दर के मुख्य कारणों में से एक को स्कूल भवनों के परिवर्तन को माना जा रहा है। कारण कई बार कक्षा V के बाद छात्रों को दूसरी इमारतों में शिफ्ट होना पड़ता है। और इसी  बदलाव की अवधि के दौरान ही बड़े पैमाने पर ड्रॉपआउट देखें जा सकते हैं। वहीं इस मामले पर प्रमुख सचिव ने बताया कि समस्त प्राथमिक, मध्य एवं उच्च विद्यालयों को एक दूसरे के साथ जोड़ा जाने वाला है। बिहार शिक्षा विभाग अब स्कूली बच्चों के मध्य ड्रॉप-आउट दर को कम करने के लिए स्नातक स्तर तक हर बच्चे को ट्रैक करने के लिए तैयार हो रही है।


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शिक्षा विभाग ने कहा ड्रॉपआउट चिंताजनक विषय 

ड्रॉपआउट

जानकारी के मुताबिक़ वर्तमान में बिहार में कक्षा 1 से कक्षा 12 तक के करीबन 78,000 स्कूलों में 2.5 करोड़ छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा 5, कक्षा 8, कक्षा 10 एवं कक्षा 12 को चार बिंदुओं के रूप में पहचाना गया है। जिस बिंदुओं पर छात्र स्कूल से बाहर जाते हैं।राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार साल 2018-19 में कक्षा 1 में 24,03,526 छात्रों को दाखिला दिया गया था। जो संख्या कक्षा 10 में  घटकर 15,37,628 हो गई एवं कक्षा 12 वीं  में यह संख्या 6,31,379 छात्रों के नीचे आ गई थी। 

शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा कि विभाग जल्द ही प्रत्येक बच्चे पर नज़र रखने के लिए एक निविदा के लिए अनुरोध करने वाला है। उन्होंने कहा कि जब उनके पास प्रबंधन नवाचार प्रणाली तैयार हो जायगी तब वे  प्रत्येक बच्चे को ट्रैक कर सकते हैं। इसी के साथ महत्त्वपूर्ण है कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 75 वें दौर के अनुसार बिहार में महिला साक्षरता प्रतिशत 60.5% देखी गई है।एवं राज्य में 79.7 प्रतिशत पुरुष साक्षरता दर और 70.9 प्रतिशत समग्र साक्षरता दर दर्ज़ की गई है। 

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