दिल्ली सर्वेक्षण: 10% बच्चे स्कूलों से बाहर, 80% के घरों में नहीं कोई कंप्यूटर

दिल्ली में 10% बच्चे स्कूलों से बाहर, 80% के घरों में नहीं कोई कंप्यूटर

बता दें जुलाई 2018 में पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाके में तीन नाबालिक की भुखमरी से मौत हो गई। जिस परिवार में इन बच्चों की मौत हुई उनके पास राशन कार्ड तक नहीं था। उक्त घटना बाद दिल्ली सरकार द्वारा एक सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया गया। जिसके तहत नवंबर महीने के 2018 से नवंबर 2019 के बीच एक सर्वेक्षण कराया गया। जो कि नवंबर 2020 में पूरी हुई।

दिल्ली सर्वेक्षण

यह सर्वेक्षण सबसे बड़ी जनसंख्या यानी कि 1.02 करोड़ लोगों को कवर करता है। सर्वेक्षण में शहरों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, धर्म, जाति, आय, बीमारी टीका करण की स्थिति, परिवहन के तरीके आदि जैसे विषयों को शामिल किया गया। इस सर्वेक्षण के आंकड़े चौंकाने वाले थे।

इस सर्वेक्षण से निकले निष्कर्ष निम्नलिखित है:

दिल्ली सर्वेक्षण

  • राज्य में करीब 2 मिलियन बच्चे अभी भी स्कूलों से बाहर हैं। जिनमें से करीब 64,813 आर्थिक तंगी की वजह से स्कूल नहीं जाते।
  • 0-6 साल के बीच के करीब छह मिलियन बच्चे आंगनबाड़ी की पहुंच से बाहर है। वही दिल्ली के गर्भवती महिलाओं में आधे से कम महिलाओं का आंगनवाड़ी द्वारा कवर किया जाता है।
  • 65 फ़ीसदी से ज्यादा लोग आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन यानी की बसों का उपयोग करते हैं। जबकि 6 फ़ीसदी लोग दिल्ली मेट्रो पर निर्भर है।
  • शहर के 42.59%  लोग महीने में 10,000 से कम रुपए खर्च करते हैं। वही 80 फ़ीसदी के पास कंप्यूटर नहीं है जबकि 29 फ़ीसदी घरों में नल के पानी की पहुंच नहीं है। हालांकि लगभग सभी घरों में शौचालाय है।
  • राज्य की तीन चौथाई आबादी सरकारी सुविधाओं पर निर्भर है जिनमें से 2.60 फ़ीसदी पुरानी बीमारियों से पीड़ित है इन बीमारियों में अधिकतर मधुमेह से पीड़ित है
  • 0-5 वर्ष के लगभग एक चौथाई बच्चों का तो कोई टीका करण ही नहीं हुआ।

दिल्ली सरकार के दावे और सर्वेक्षण के आंकड़ों में भिन्नता

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दिल्ली सरकार के द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं जिनमें स्वास्थ्य सुविधाएँ और बच्चों की स्कूली शिक्षा को लेकर भी आए दिन सरकार दावे करती नजर आती है। लेकिन इस सर्वेक्षण में निकले आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। दरअसल 6,000 से ज्यादा फील्ड कर्मचारियों के द्वारा केंद्रीय डेटाबेस से जुड़े मोबाइल ऐप के उपयोग के जरिए एक सर्वेक्षण किया गया। जिसमें यह निकल कर आया कि 6 से 17 वर्ष कुल 9.76 फ़ीसदी के बीच के 2,21,694 बच्चे स्कूली शिक्षा से बाहर है। जिनमें से 1,31584 बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं जबकि 90110 बच्चे कभी स्कूल ही नहीं गए। इस सर्वेक्षण के मुताबिक 6-17 साल के बच्चे बच्चों के स्कूल ना जाने के पीछे का महत्वपूर्ण कारण वित्तीय आर्थिक तंगी था। जबकि 13.50 फ़ीसदी से ज्यादा घरेलू कामों की में लगे हुए थे।


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राज्य के 72.87% लोगों की सरकारी अस्पतालों तक पहुंच

दिल्ली सर्वेक्षण

सर्वेक्षण में निकले शिक्षा के आंकड़े जहां बेहद निराशाजनक है। वही सर्वेक्षण में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जारी आंकड़े उनके मुकाबले बेहतर है। क्योंकि सर्वेक्षण में यह पाया गया कि शहर की आबादी के 72.87 फ़ीसदी लोगों की सरकारी अस्पताल और वितरण केंद्रों तक पहुँच है। जबकि शेष लोग निजी अस्पतालों पर निर्भर है। कुल आबादी के 2.60 फ़ीसदी कुछ लोग बीमारियों से पीड़ित है। जिनमे से 36 .33 फ़ीसदी मधुमेह से पीड़ित है। 21.75 फ़ीसदी लोग हृदय रोग जैसे कि उच्च रक्तचाप संबंधी विकारों से पीड़ित है। वहीं 9.7 फ़ीसदी लोग श्वसन से संबंधित रोग से पीड़ित हैं।

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