अमेरिकी ब्रोकरेज बोफा सिक्योरिटीज ने बताया भारतीय अर्थव्यवस्था कमजोर 

बोफा सिक्योरिटीज ने बताया भारतीय अर्थव्यवस्था कमजोर 

शुक्रवार को अमेरिकी ब्रोकरेज बोफा सिक्योरिटीज द्वारा ट्रैक किए गए गतिविधि ने इस बात का इशारा किया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कमजोर बनी हुई है। पॉजिटिव तरीके से ब्रोकरेज ने बताया है कि ऋण की मांग कम हो रही है एवं थोक मूल्य मुद्रास्फीति के लिए समायोजित वास्तविक उधार दर नीचे हो रही है।

बोफा सिक्योरिटीज

यह महत्वपूर्ण है कि महामारी झटके के कारण से एक मजबूत रिकवरी के बारे में हाल ही में कई रिपोर्ट्स में चर्चा की गई थी। सरकार को जीडीपी में उलटफेर होने के कारण से उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2021 में 7.7 प्रतिशत का अनुबंध हो सकता है।

अमेरिकी ब्रोकरेज बोफा सिक्योरिटीज ने कहा ऋण वृद्धि 12 प्रतिशत पर आ जाने वाली

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इसी के साथ ब्रोकरेज ने एक नोट में बताया है कि बुरी खबर है कि हमारे बोफा इंडिया एक्टिविटी इंडिकेटर में हो रही गिरावट हमारे दृष्टिकोण को साफ़ करती है कि अर्थव्यवस्था अभी भी बेहद कमजोर बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक नवंबर के महीने में सूचक 0.6 प्रतिशत नीचे गिर गया था। साथ ही क्रेडिट ग्रोथ के मोर्चे पर कहा गया है कि बैंकिंग प्रणाली की प्रगति में वृद्धि कम हुई है। माना जा रहा है कि वित्त वर्ष 2022 के लिए ऋण वृद्धि 12 प्रतिशत पर आ जाने वाली है। इस विषय पर महत्त्वपूर्ण है कि पिछले कुछ सालों से ऋण वृद्धि में गिरावट आ रही है और समग्र आर्थिक विकास में गिरावट यानी 2016 के अंत से यह नीचे की ओर सर्पिल पर रहा है कारण उधारकर्ता की विस्तार धीमी हो गई है।


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 दो चरणों में ब्याज दरों पर कटौती

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ब्रोकरेज ने बताया है कि मार्च 2019 के बाद से नाम मात्र एमसीएलआर यानी फंडिंग आधारित उधार दर की सीमांत लागत 1.45 प्रतिशत कम देखी गई है एवं वहीं वास्तविक एमसीएलआर यानी की डब्ल्यूपीआई के लिए समायोजित आरबीआई सहजता 1.50 प्रतिशत कम पाई गई है। ग़ौरतलब है कि आरबीआई ने महामारी से उभरने के बाद दो चरणों में ब्याज दरों में कटौती की है। मगर उच्च उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति के वजह से पिछले तीन लगातार नीति समीक्षाओं के लिए दरों को रोक रखा गया है।

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