असुरक्षित तरीके से यात्रा करने को विवश श्रमिक और उनके परिवार

सुर्खियों में नहीं है इन श्रमिक परिवार की सिसकियां

आजीविका के लिए पलायन करने वाले इन श्रमिकों के जीवन में हादसे तो आए दिन होते ही रहते हैं। जिन हादसों में कई लोगों की मृत्यु तक हो जाती है। सच तो यह है कि सुर्खियों में नहीं आने के वजह से इन पर कोई ध्यान ही नहीं देता है। इन पीडि़त परिवार सब को न राहत देने के लिए कोई है और न मरहम लगाने के लिए कोई है। उनके नसीब में तो जैसे अपनों को खोने का दुख और दर्द भरी सिसकियों का ही ढ़ेर है। 

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मुआवजे के लिए तरसते हैं कई परिवार, हर महीने होती रहती छोटी बड़ी दुर्घटनाएं

दरसअल बांसवाड़ा से जाने वाले प्रवासी श्रमिक जन असुरक्षित तरीके से यात्रा करने को मजबूर हैं। आए दिन गांव से शहर जाते वक्त और वापस आते समय छोटे बड़े हादसे होते ही रहते हैं। जिन हादसों में कई लोगों की जान चली जाती है तो कई लोग गम्भीर रूप से घायल हो जाते हैं। वहां के श्रमिक अपनी यात्रा ऐसी निजी बसों, जीपों और ट्रकों के द्वारा करने को लाचार हैं। जो सुरक्षा मापदंडों पर खरी होने लायक बिल्कुल नहीं होती है।

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जानकारी के मुताबिक़ बांसवाड़ा से गुजरात जाने के लिए रोडवेज बसों की संख्या पर्याप्त नहीं है और निजी वाहनों के मुकाबले किराया अधिक होने से पैसा बचाने की चाह में ये श्रमिक असुरक्षित वाहनों में ही यात्रा करते हैं और तो और शहर पहुंचने के बाद भी श्रमिकों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं हैं। इसलिए दुर्घटना घटने पर श्रमिकों व उनके परिवारों को किसी भी प्रकार का मदद नहीं प्राप्त होता है।


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दस्तावेजों की कमी के कारण श्रमिकों को क़ानूनी स्तर पर मुआवजा दिलाना चुनौतीपूर्ण कार्य

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ग़ौरतलब है कि इस मामले पर जिला के आजीविका ब्यूरो के कार्यक्रम प्रबन्धक कमलेश शर्मा ने कहा है कि गुजरात के बड़े शहरों में ब्यूरो की तरफ से श्रमिक सहायता केंद्र एवं लेबर लाइन संचालित किए गए हैं। जिस पर हर महीने 25 से 30 मामले सामने आते हैं और जिनमें 10 प्रतिशत कार्य के दौरान दुर्घटना के ही होते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि श्रमिक एवं उनके परिवार दुर्घटना के अधिकांश केसों में पुलिस एफआईआर भी दर्ज कराने में सक्षम नहीं होते हैं और ऐसे में मृत्यु की स्थिति में पोस्टमार्टम रिपोर्ट निकालना तकलीफदेह एवं काफ़ी खर्चीला हो जाता है। फ़िर दस्तावेजों की कमी के कारण से श्रमिकों को क़ानूनी स्तर पर मुआवजा दिलवाने का कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

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