लॉकडाउन में अमीरों की संपत्ति बढ़ी, 1.7 करोड़ महिलाओं की नौकरी ख़त्म: ऑक्सफेम

आर्थिक खाई और बढ़ी: ऑक्सफेम

महामारी और महामारी के बाद हुए लॉकडाउन ने लोगों के बीच आर्थिक असमानता की खाई को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। इसका पता चलता है ऑक्सफेम की रिपोर्ट से।

Lockdown Made India's Billionaires 35% Richer, Lakhs Lost Jobs: Oxfam - लॉकडाउन में अमीरों ने कमाई इतनी दौलत कि 13 करोड़ गरीबों को मिल सकते थे 94 हजार रुपये - Amar Ujala Hindi News Live

दरअसल गरीबी उन्मूलन को लेकर काम करने वाली संस्था ऑक्सफेम ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की। इस रिपोर्ट का नाम था ‘इनिक्वालिटी वायरस’ यानी कि और असमानता का वायरस। इस रिपोर्ट में बताया गया कि लॉकडाउन के दौरान भारत में अरबपतियों की संपत्ति में 35 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ जबकि कई गरीब लोग बेरोजगार हो गए।

अप्रैल महीने में 1.7 करोड़ महिलाओं का रोज़गार ख़त्म हो गया

नौकरी

लॉकडाउन में एक तरफ अरबपति ओर अमीर हुए, वहीं दूसरी तरफ कई करोड़ लोगों के लिए आजीविका का संकट पैदा हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक मार्च महीने के बाद से भारत के 100 अरबपतियों की संपत्ति में करीब 12,97,822 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ।

यदि इतने रुपयों का बंटवारा 13.8 करोड़ गरीब लोगों में किया जाता तो हर व्यक्ति को 94,045 रुपए मिलते हैं। दूसरी ओर इस लॉकडाउन की वजह से अप्रैल महीने में हर घंटे 1.7 लोगों की नौकरी चली गई।


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अंबानी की हर घंटे की आय 90 करोड़ जबकि 24% मज़दूरों की मासिक आय 3000 रुपए

नौकरी

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि रिलायंस इंडस्ट्री के प्रमुख मुकेश अंबानी ने 1 घंटे में जितना कमाया यदि उतना ही पैसा कोई मजबूर कमाना चाहे तो उसे 10,000 साल लग जाएंगे। वही मुकेश अंबानी ने जितना पैसा 1 सेकंड में कमाया उसे पाने में एक मजदूर को 3 साल लग जाएंगे। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि यह महामारी 100 वर्षों का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट है तथा इसकी वजह से 1930 की महामंदी के बाद सबसे बड़ा आर्थिक संकट पैदा हुआ है।

इन लोगों की संपत्ति में हुआ इज़ाफ़ा

नौकरी

रिपोर्ट के अनुसार मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, शिव नादर, साइरस पूनावाला, उदय कोटक, अजीत प्रेम जी, सुनील मित्तल, राधाकृष्ण दमानी, कुमार मंगलम बिरला और लक्ष्मी मित्तल जैसे अरबपतियों की संपत्ति में महामारी व लॉकडाउन के दौरान तेजी से इजाफा हुआ।

इस रिपोर्ट के संबंध में ऑक्सफेम की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ बेहर ने कहा कि, “इस रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि यह अन्यायपूर्ण आर्थिक व्यवस्था से कैसे बड़े आर्थिक संकट के दौरान सबसे धनी लोगों ने बहुत अधिक संपत्ति कमाई वही करोड़ों लोग बेहद मुश्किल से गुजर बसर कर रहे हैं।”

लॉकडाउन में गरीब परिवार और मजदूरों ने जो त्रासदी झेली इसे हर किसी ने अपनी आंखों से  देखा। लेकिन ऑक्सफेम द्वारा जारी किए गए यह आंकड़े बेहद ही चौंकाने वाले हैं। इससे देश की आर्थिक व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है।

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