बिहार में मोहब्बत पर पहरा, मर्ज़ी से शादी करने पर लड़के के घर वाले गिरफ़्तार

क्यों दो वयस्क व्यक्तिओं के मर्ज़ी से शादी करने में आ रही हैं रुकावटें

जब दो वयस्‍क अपनी मर्ज़ी से शादी करना चाहते हैं, तो क्यों कोई तीसरा व्यक्ति इसमें दखल देने की कोशिश करता है। जब शीर्ष अदालत यह स्पष्ट कहती है कि किसी भी बालिग महिला और पुरुष की विवाह में माता-पिता, परिवार या समाज कोई भी दखल नहीं दे सकता है तो क्यों प्रेम विवाह करने पर सवालों और मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।

जानकारी के मुताबिक़ ऐसी कई घटनाएं आए दिन सामने आती ही रहती हैं, जिनमें नवविवाहित जोड़ों को अपने ही परिवार वालों से डरते छुपते भागना पड़ता है वो भी इस डर से की कहीं, उनके घर वाले उन्हें ख़तम न कर डालें। मगर क्या है। ऐसे दम्पति का जुर्म, क्या किया है उन्होंने क्यों डरते भागते फिरना पड़ता है उनको?क्या प्रेम विवाह इतना अपराधजनक है?


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बिहार के सुपौल से भी ऐसी ही एक घटना सामने आई है, जहां एक लड़की अपनी इच्छानुसार एक लड़के से प्रेम विवाह करती है। मगर हैरानी की बात है जब उनके विवाह के बाद लड़के के परिवार को गिरफ़्तार कर लिया गया है और लड़के पर लड़की के अपहरण का आरोप लगाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

सुपौल के रहने वाले मो. इकबाल और शहनाज़ परवीन एक दूसरे को पसंद करते थे। लड़की के घर वाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे तो दोनों ने पटना आकर बिना घर वालों की मर्ज़ी से शादी कर ली। उसके बाद पुलिसिया दमन का मामला शुरू हुआ। लड़के के घर वालों का आरोप है कि पुलिस ने पिछले 4 दिनों से उन्हें जबरन थाने में रखा हुआ है। बकौल सुपौल एसपी

लड़के के ख़िलाफ़ एफ़.आई.आर दर्ज की गयी है और पुलिस नियमानुसार ही काम कर रही है। अगर लड़का-लड़की बालिग़ हैं तो लड़की कोर्ट में बयान दे दे, केस उसी समय ख़त्म हो जाएगा।

 

मगर सवाल ये उठता है कि अगर दो व्यक्ति जो संपूर्ण तरीक़े से वयस्क एवं परिपक्व हैं और वे अपनी पसंद से शादी करना चाहते हैं तो इसमें ग़लत क्या है? अगर दो वयस्क शादी करना चाहें तो हमारे पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि जिसका उपयोग कर हम कहें की कौन-सी शादी अच्छी है और कौन सी बुरी और ना ही किसी वयस्क व्यक्ति के विवाह में दखल देने का कोई अधिकार हमें प्राप्त है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन के अधिकार

हम आपको बता दें कि 18 साल की उम्र पूरी की हुई हर लड़की और 21 साल का उम्र पुरा कर लिए हर लड़के को अपनी मर्ज़ी से शादी करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। जहां देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट कहती है कि शादी करने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन के अधिकार के तहत आता है तो कैसे कोई इस अधिकार को छीन सकता है। क्यों वहीं माता पिता जो अपने बच्चों की ख़ुशी के लिए अपना सर्वस्व कुर्बान करते हैं,वो प्रेम विवाह करने पर अपनी ही संतान के खिलाफ हो जाते हैं। सच कहा जाए तो विवाह जैसा अहम् फैसला किसी भी इंसान की मर्जी से ही होनी चाहिए और हर लड़की-लड़के को अपनी मर्जी से शादी का अधिकार प्राप्त है।

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