हिन्दू महासभा ने संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को निरस्त और हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग की

हिन्दू महासभा ने की गणतंत्र दिवस को काला दिवस के तौर पर मनाने की मांग

आज हमारे देश का 72वां गणतंत्र दिवस है। आज राजपथ पर भारत की आन-बान और शान का प्रदर्शन कर देश गणतंत्र दिवस का जश्न मना रहा है। मंगलवार सुबह राजपथ पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा तिरंगा फहराया गया है।

मगर जहां एक ओर समस्त देश गणतंत्र दिवस की खुशियां मना रहा है तो वहीं ऐसी खबरें भी आ रही हैं। वहां गणतंत्र दिवस को काले दिन के रूप में मनाने का मुद्दा भी उठाया जा रहा है।


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संविधान और धर्मनिरपेक्षता पर उठे सवाल

ग़ौरतलब है कि 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर यानी 25 जनवरी को मेरठ मे हिन्दू महासभा द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जहां इस संगठन ने गणतंत्र दिवस को काला दिवस के तौर पर मनाने और भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को निरस्त करने की मांग को सामने रखा है। इतना ही नहीं भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की भी मांग की गई है।

दरसअल अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने राष्ट्रपति को 25 जनवरी को एक पत्र लिखा है। जिस पत्र में अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से वर्तमान संविधान को निरस्त करने और गणतंत्र दिवस को काला दिवस घोषित करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्र को धर्म सापेक्ष रुप देकर हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग को सामने रखा है।


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धर्म निरपेक्ष स्वरूप को निरस्त करने की मांग

हम आपको बता दें कि अखिल भारत हिन्दू महासभा भारत का एक राजनीतिक दल है एवं यह एक भारतीय हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन है। इसी के साथ बता दें कि 25 जनवरी को राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र में अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने कहा है कि इतिहास के भूत और वर्तमान व राष्ट्र के भविष्य का यह निर्णय यानी भारतीय संविधान के धर्म निरपेक्ष स्वरूप को निरस्त करना इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा ऐसा आदरणीय जी से आशा है। जिसे देख अब यह समझना शायद ही मुश्किल नहीं है कि हमारा राष्ट्र किस दिशा में अग्रसर कर रहा है।

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