पैदल अपने देस लौटे श्रमिक अब फिर काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर

महामारी से संबंधित प्रतिबंधों में ढील होने के बाद से केरल, महाराष्ट्र और बाकी अलग-अलग राज्यों में श्रमिक को लेने के लिए मांग बढ़नी शुरू हो गई है। जिस कारण से पूर्व और पूर्वोत्तर राज्यों के सैकड़ों श्रमिकों ने अपने राज्य में वापस लौटना शुरू कर दिया है।


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ग़ौरतलब है कि इन मार्गों पर अभी भी नियमित रेल सेवाओं का संचालन शुरू होना बाकी है। जिस कारण से ये कर्मचारी अपनी आजीविका के साधन तक पहुंचने के लिए लगातर पांच दिनों तक चलने वाली बस यात्राएं करने को मजबूर हैं।

अपने आजीविका के साधन तक पहुंचने के लिए, ये श्रमिक कर रहें लगातर यात्राएं

इस विषय पर बिहार में कटिहार के मोहम्मद अंसार ने बताया कि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में केरल के लिए एक बस ली थी। उन्होंने आगे बताया कि मात्र कुछ ही ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है अब हम और इंतजार नहीं कर सकते। मोहम्मद अंसार चाय की दुकान में काम करते हैं। बिहार में नौकरी नहीं मिल पाने के कारण अब वो दूसरे राज्य जाने के लिए मजबूर हैं। मोहम्मद अंसार कटिहार से मुर्शिदाबाद के रास्ते केरल बस से जा रहे हैं।

ऐसी ही परिस्थिति मुर्शिदाबाद के 22 साल के राजमिस्त्री मामून मंडल की भी है। उन्होनें कहा कि उनके गांव में कोई नौकरी नहीं है और केरल में उनके ठेकेदार उन्हें लौटने के लिए कह रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर वे नहीं जाते वापस तो काम शुरू नहीं होता और फिर उनकी जगह किसी और को ले लिया जाता। इसलिए लंबा और कठिन यात्रा होने के बावजूद भी उन्हें बस में जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

श्रमिकों को प्राप्त करने के लिए दोनों तरफ एजेंट हैं नियुक्त

वहीं इस मामले पर बस ऑपरेटरों ने बताया कि कोच्चि और उपनगरीय क्षेत्रों से पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के प्रवासियों के लिए हर रोज़ कम से कम एक दर्जन बसें तो चलती हैं। यात्रा के लिए प्रवासियों को प्राप्त करने के लिए दोनों तरफ एजेंट हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि बसों का संचालन केरल से असम में नागांव तक और पश्चिम बंगाल में हावड़ा और सिलीगुड़ी से किया जा रहा है।

वहीं केरल से उत्तर पूर्व की दैनिक सेवाओं का संचालन करने वाले नजथ टूर एंड ट्रैवल्स के अरशद एन ने इस मामले पर बताया कि वह केरल और असम के बीच चार से पांच दिनों की निरंतर यात्रा करता है। उन्होंने कहा कि हम केरल के लिए प्रति व्यक्ति 4,000 रुपये और 5,500 रुपये के बीच शुल्क लेते हैं। और यह स्थिति तब तक बनी रहेंगी जब तक सामान्य ट्रेन सेवाएं शुरू नहीं होती है।

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