क्या राकेश टिकैत के आंसुओं ने किसान आंदोलन में दोबारा इंकलाब ला दिया है?

राकेश टिकैत के आंसुओं ने किसान आंदोलन को दोबारा जिंदा किया

केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि क़ानून के खिलाफ करीब 2 महीने से किसानों के साथ भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत दिल्ली के बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों की केवल एक ही मांग है कि सरकार तीनों कृषि क़ानून को रद्द करे। सरकार का कहना है कि इस क़ानून में संशोधन किया जा सकता है लेकिन रद्द नहीं किया जा सकता।

टिकैत

किसान आंदोलन को लेकर कई दफा सरकार और किसानों के बीच बातचीत भी हुई लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकल सका। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस वाले दिन देश की राजधानी दिल्ली में हुए हिंसा के बाद किसान आंदोलन कमजोर भी हुआ लेकिन बीते दिनों राकेश टिकैत के आंसुओं ने किसान आंदोलन में दोबारा जान फुंकी है।

यूपी, हरियाणा और पंजाब में जगह जय जय टिकैत के समर्थन में प्रदर्शन हुए

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बीते दिनों ऐसा लग रहा था कि पुलिस जबरन गाजीपुर बॉर्डर से किसानों को हटा देगी और धीरे-धीरे पूरा इलाका खाली भी हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लौट चुके किसानों ने दोबारा मोर्चा संभाल लिया। इतना ही नहीं देश के कई राज्यों जैसे यूपी, हरियाणा एवं पंजाब में टिकट के समर्थन में कई जगह प्रदर्शन हुए।यह सब एक ऐसी परिस्थिति में हुआ जब योगी सरकार टिकट की गिरफ्तारी के साथ किसान आंदोलन को खत्म करने में लगी थी। पुलिस ने इसके लिए पुख्ता इंतजाम भी कर रखे थे।
शाम ढलने के वक्त गाजीपुर बॉर्डर छावनी में बदल चुका था। आश्चर्य की बात यह है कि शाम ढलने तक राकेश टिकैत गाजीपुर बॉर्डर पर केवल डेढ़ सौ लोगों के साथ रह गए थे। स्थानीय लोगों का आश्वासन देकर बीजेपी विधायक भी धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को रोकने का प्रयास करने लगे।


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राकेश टिकैत की घोषणा ने किसान आंदोलन में दोबारा जान फुंकी

 

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शाम होते ही राकेश टिकैत गरजे और उन्होंने कहा कि बीजेपी गुंडे भेज कर हमें उठाने आएगी? उन्होंने कहा कि हम यहां से नहीं हटेंगे और यहीं अपनी जान दे देंगे। वह कहते हैं जब तक कृषि कानून को रद्द नहीं किया जाता किसान आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने फिर कहा “मेरे गांव के लोग जब तक मुझे पानी नहीं देंगे मैं पानी नहीं पियूंगा”। राकेश टिकैत के द्वारा दिए गए इन तमाम बयानों ने किसानों का मनोबल बढ़ाया।जान देने की बात कहकर राकेश टिकैत ने भावनात्मक रूप से किसानों को अपने साथ दोबारा जोड़ लिया।

राजनीतिक पार्टी भी समर्थन में आए

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किसान आंदोलन को कमजोर पड़ता देख राकेश टिकैत ने अन्य दलों से मदद मांगी थी जिसके बाद कई राजनीतिक पार्टियां उनके समर्थन में आगे आए। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राकेश टिकैत से फोन पर बात की और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया उनसे मिलने गाजीपुर बॉर्डर भी पहुंचे।

राहुल गांधी ने ट्वीट कर अपना समर्थन किसानों को दिया। राष्ट्रीय लोकदल ने खुले तौर पर किसानों का समर्थन करने का ऐलान किया। इन सब घटनाओं के बाद किसान आंदोलन जो बहुत कमजोर पड़ चुकी थी उसमें दोबारा जान फुंकी गई। फिलहाल राकेश टिकैत ने यह ऐलान कर दिया है कि जब तक कृषि क़ानून रद्द नहीं होता किसान आंदोलन जारी रहेगा।

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Aparna Vatsh

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