सरकार: ट्रांसजेंडर समुदाय के मुद्दों को संबोधित करने के लिए अंब्रेला योजना 

ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए सरकार द्वारा राष्ट्रीय परिषद का गठन

रतन लाल कटारिया ने कहा कि सरकार ने महामारी के दौरान NCBCFDC के माध्यम से ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रत्येक सदस्य के लिए 1,500 रुपये की वन टाइम सहायता प्रदान की है और 5,711 लोगों को डायरेक्ट ट्रांसफ़र से लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के माध्यम से राशन किट वितरित किए गए थे और आठ राज्यों में चिकित्सा शिविर भी लगाए गए थे। जिसमें 1,005 लोग शामिल हुए थे।

ट्रांसजेंडर समुदाय

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने गुरुवार को संसद को सूचित किया कि सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कल्याण, कौशल उन्नयन, आश्रय, और आर्थिक सहायता और आजीविका के मुद्दों के समाधान के लिए एक अंब्रेला योजना पर काम कर रही है।

ट्रांसजेंडर (अधिकारों का संरक्षण) के लिए अधिनियम वर्ष 2019 में लागू

सरकार की समुदाय के लिए आजीविका के अवसर पैदा करने के लिए विशेष धनराशि आवंटित करने की योजना पर और वर्तमान में सार्वजनिक सेवाओं में काम कर रहे ट्रांसजेंडर की संख्या के आंकड़ों के बारे में अनुमुला रेवंत रेड्डी(तेलंगाना के मलकजगिरी से लोकसभा सदस्य) द्वारा उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए मंत्री रतन लाल कटारिया ने कहा कि सरकार ने समुदाय के कल्याण के लिए ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 लागू किया था।


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ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण के लिए मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय पोर्टल 

ट्रांसजेंडर समुदाय

कटारिया ने आगे कहा कि अधिनियम पहचान प्रमाण पत्र प्रदान करने के मामलें से संबंधित है और इसके लिए एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया का पालन भी करता है। इसके अलावा गैर-भेदभाव, रोजगार में समान अवसर, शिक्षा पर योजनाएं, सामाजिक सुरक्षा और समुदाय के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवा का प्रावधान भी इसमें शामिल है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष ही नवंबर में मंत्रालय द्वारा एक राष्ट्रीय पोर्टल शुरू किया गया है। जो ट्रांसजेंडर समुदाय को संबंधित जिला मजिस्ट्रेट से पहचान प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने मदद करता है, इतना ही नहीं पोर्टल पर अब तक 259 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

कटारिया ने कहा कि सरकार ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए एक राष्ट्रीय परिषद का गठन किया है और समुदाय की चिंताओं को दूर करने के लिए समुदाय के प्रतिनिधियों के लिए एक मंच है। परिषद सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री के नेतृत्व में है और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, गृह मंत्रालय, आवास और शहरी मामलों, शिक्षा, ग्रामीण विकास, श्रम और रोजगार, कानूनी मामलों, नीतीयोग आदि इसमें भागीदार हैं।

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