औरंगाबाद में छात्रवृत्ति घोटाला, 41 अभियुक्तों की होने की खबर

औरंगाबाद छात्रवृत्ति घोटाला

औरंगाबाद में छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए कल्याण विभाग से मिलने वाली राशि को फर्जी तरीके से निकासी कर लिया गया है। जिसमें तत्कालीन कल्याण पदाधिकारी समेत 41 अभियुक्तों की मिलीभगत होने की खबर मिली है। दरसअल छात्रवृति घोटाला को लेकर औरंगाबाद जिला हमेशा ही सुर्ख़ियों में रहता है। मगर इस बार अत्यधिक राशि के गबन का मामला प्रकाश में आया है।

छात्रवृत्ति घोटाला

जानकारी के मुताबिक़ औरंगाबाद ज़िले में 11 करोड़ 17 लाख 96 हज़ार राशि का छात्रवृत्ति घोटाला उजागर किया गया है। बता दें कि यह राशि ज़िले के 38 सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को दिया जाने वाला था मगर तत्कालीन ज़िला कल्याण पदाधिकारी व प्रधानाध्यापकों ने मिलीभगत करके इतनी सारी राशि हड़प कर ली है। 

ज़िला कल्याण पदाधिकारी ने मनमाने ढंग से किया सरकारी राशि का आवंटन

ग़ौरतलब है कि मामले में आर्थिक अपराध ईकाई ने इसी शुक्रवार को जालसाज़ी,धोखाधड़ी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान आरंभ किया है। खबरों के मुताबिक़ औरंगाबाद के तत्कालीन ज़िला कल्याण पदाधिकारी शांति भूषण आर्य ने नियमों को ताक पर रख कर सरकारी राशि का आवंटन मनमाने से ढंग किया है। कारण उनके द्वारा न तो विद्यालय शिक्षा समिति से उपयोगिता प्रमाण पत्र लिया गया और न ही खर्च का प्रमाण पत्र और स्कूल के प्रधानाध्यापक से मिलकर वास्तविक छात्र को राशि नहीं देकर आपस में बंदर-बाँट करने का आरोप लगाया गया है।


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छात्रवृत्ति घोटाला में 11 करोड़ से ज्यादा का घोटाला 

छात्रवृत्ति घोटाला

हालांकि पूरे जांच के बाद घोटाले की रकम और भी अधिक हो सकती है। दरसअल इस घोटाले को साल 2012 से 2016  के मध्य अंजाम दिया गया है और प्रथम चरण की जांच में मात्र आठ बैंक खातों की जांच की गई। जिसमें पता चला कि प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में 11 करोड़ से ज्यादा का घोटाला किया गया है। अभी भी जिला कल्याण पदाधिकारी कार्यालय के शेष 12 खातों के विवरण की खोज जारी है,जो अबतक नहीं मिल सका है। इस मामले को लेकर आर्थिक इकाई ने तत्कालीन ज़िला कल्याण पदाधिकारी शांति भूषण आर्य, छात्रवृत्ति सहायक विजय कुमार, तत्कालीन नाजिर जनक नंदन ,कार्यालय मे पदस्थापित अन्य अधिकारी कर्मचारी एवं 38 स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को शामिल बताया है। उनके द्वारा जांच में सामने आया है कि जिला कल्याण पदाधिकारी एवं उनके कार्यालय कर्मचारियों के साथ ही संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने साजिश करते हुए सरकारी रुपए का गबन किया है।

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