सर्वव्यापी महामारी के दौरान कोई भी बच्चा ऑनलाइन शिक्षा से वंचित नहीं – केंद्रीय मंत्री का बयान

महामारी के दौरान अनेक छात्र ऑनलाइन शिक्षा से वंचित

कोविड-19 रोकथाम के लिए जब संपूर्ण देश भर में लॉकडाउन लागू किया गया तब उसके तुरंत बाद ही राज्यों की सरकारों ने स्कूली शिक्षा को ऑनलाइन करने का प्रावधान शुरू कर दिया था। जिसमें एनजीओ, फ़ाउंडेशन और निजी क्षेत्र की तकनीकी शिक्षा कंपनियों को भी भागीदार बनाया गया था एवं जिसके बाद शिक्षा प्रदान करने के लिए संवाद के सभी उपलब्ध माध्यमों का इस्तेमाल शुरू किया गया। जिसमें मुख्यत टीवी, डीटीएच चैनल, रेडियो प्रसारण, व्हाट्सऐप और एसएमस ग्रुप और प्रिंट मीडिया का सहारा लिया गया।

ऑनलाइन शिक्षा

कोई भी बच्चा ऑनलाइन शिक्षा से वंचित नहीं 

सोमवार को निचले सदन में प्रश्नकाल में एक पूरक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने लोकसभा में कहा कि महामारी के दौरान कोई बच्चा ऑनलाइन शिक्षा से वंचित नहीं रहा है कारण सरकार द्वारा इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं एवं ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने में भारत ने अनेक देशों को पीछे छोड़ दिया है।मंत्री ने साथ ही कहा कि वंचित वर्ग के बच्चों तक मोहल्ला स्कूलों के जरिये पहुंचा गया है और अभी 34 शैक्षणिक चैनल हैं जिनमें से 22 उच्च शिक्षा एवं 12 स्कूली शिक्षा के स्तर पर हैं।उन्होंने कहा कि शिक्षा हर जगह पहुंची है।

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केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बजट में डिजिटल शिक्षा के लिए परिव्यय पर कहा कि विकसित बजट होने के कारण कोई निश्चित राशि नहीं दी गई।मगर सरकार की ओर से डिजिटल शिक्षा पर खर्च के रूप में 600 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। उन्होंने कहा कि वे आश्वस्त कर सकते हैं कि मोदी-सरकार की इस पहल के लिए धन की कोई कमी नहीं होने वाली है।


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रिपोर्ट्स के अनुसार 24% भारतीय घरों में इंटरनेट की सुविधा

हालांकि वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक़ ज्यादातर ग्रामीण बच्चों के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण से वे डिजिटल क्लासेस करने में सक्षम नहीं थे एवं लोकल सर्कल नाम की एक गैर सरकारी संस्था की एक सर्वे जिसमें 203 ज़िलों के 23 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया था। उसमें से 43% लोगों ने बताया कि बच्चों की ऑनलाइन क्लासेस के लिए उनके पास कम्प्यूटर, टैबलेट, प्रिंटर, राउटर जैसी चीज़ें उपलब्ध नहीं है। साथ ही ग्लोबल अध्ययन से पता चला है कि केवल 24% भारतीयों के पास स्मार्टफोन है।वहीं राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार केवल 24% भारतीय घरों में इंटरनेट की सुविधा है और जिसमें शहरी घरों में इसका प्रतिशत 42 और ग्रामीण घरों में केवल 15% ही इंटरनेट सेवाओं की पहुँच है।

ऑनलाइन शिक्षा

ग़ौरतलब है कि इंटरनेट की उपयोगिता भी राज्य दर राज्य अलग होती है जैसे दिल्ली, केरल, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में  40% से ज्यादा घरों में इंटरनेट का इस्तेमाल होता है एवं वहीं बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में यह अनुपात 20% से कम है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ डिजिटल स्कूलिंग (ऑनलाइन कक्षाएं) विफल

जानकारी के मुताबिक़ COVID-19 महामारी के कारण स्कूल छोड़ने का खतरा करीबन 10 मिलियन लड़कियों को भुगतना पड़ा है। जिसका कारण मुख्यत विवाह का जोखिम,जल्दी शादी, गर्भावस्था, गरीबी और महामारी के दौरान हुई हिंसा को माना गया है। वहीं मुंबई में एक रिपोर्ट के अनुसार 60,000 बच्चों के पास अभी भी ऑनलाइन शिक्षा के लिए साठिक माध्यम नहीं है। साथ ही 5 राज्यों में 80% से अधिक अभिभावकों ने कहा है कि लॉकडाउन के दौरान डिजिटल स्कूलिंग(ऑनलाइन कक्षाएं)विफल हुई है।

ऑनलाइन शिक्षा

सच कहा जाए तो शिक्षा तक पहुँचने में छात्रों के ऊपर महामारी का बहुत वास्तविक प्रभाव पड़ा है। लेकिन इस प्रभाव की अवहेलना करते हुए बजट 2021 ने पहले से ही कम शिक्षा वाले बजट को और घटा दिया है। मगर इसका परिणाम क्या होगा ?कम धनराशि वाले बजट का अधिक प्रभाव विशेष रूप से उन समुदाय के लोगों पर पड़ेगा जो शिक्षा प्राप्त करने में दैनिक चुनौतियों का सामना करते हैं।

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