शिवकुमार के पिता का सवाल, क्या किसी के हक के लिए लड़ना गुनाह है?

मास के अध्यक्ष शिवकुमार के पिता का सवाल

मजदूर अधिकार संगठन (मास) के अध्यक्ष शिव कुमार को पिछले महीने हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। लेकिन सबसे हैरत की बात यह थी कि गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस ने शिव कुमार के परिवार को इस बात की जानकारी नहीं दी कि उन्हें हिरासत में लिया गया है। जब शिव कुमार के परिजनों को इस बात की जानकारी मिली तब वे और उनके वकील शिवकुमार से मिलने पहुंचे। लेकिन पुलिस ने उन्हें शिवकुमार से मिलने तक नहीं दिया गया।

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‘पुलिस ने गिरफ्तारी का कारण तक नहीं बताया‘

मजदूर अधिकार संगठन मजदूरों के अधिकारों के लिए काम करने वाला एक संगठन है। इस संगठन के अध्यक्ष शिव कुमार को 16 जनवरी को पुलिस ने उठा लिया। लेकिन उनकी गिरफ्तारी की जानकारी किसी को नहीं दी। जब शिवकुमार के परिजनों को जैसे-तैसे 30 जनवरी दोपहर 12:00 बजे इस बात की जानकारी मिली की शिव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है वह उनसे मिलने पहुंचे। लेकिन पुलिस ने शिव के परिजनों को तो दूर उनके वकील को भी उनसे मिलने नहीं दिया। पुलिस ने इस बात की जानकारी तक नहीं दी कि शिवकुमार को हिरासत पर उन्होंने कहा रखा है। शिव कुमार के पिता का आरोप है कि पुलिस ने यह तक नहीं बताया कि किस वजह से शिवकुमार को गिरफ्तार किया गया है।

शिवकुमार व नवदीप ने मजदूर-किसान एकजुटता की बात कही थी

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24 वर्षीय नवदीप कौर दलित श्रम अधिकार एक्टिविस्ट और मजदूर अधिकार संगठन (MAS) की सदस्य हैं। उन्होंने शिव कुमार के साथ कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन का समर्थन किया तथा किसान और मजदूर एकता का नारा दिया। जिसके बाद ही 12 जनवरी को उन्हें सिंधु बॉर्डर से उठवा दिया गया। इसी के कुछ दिनों बाद यानी कि 16 जनवरी को मास के अध्यक्ष शिव कुमार को भी पुलिस ने उठा लिया। इस संबंध में नवदीप की बहन राजवीर का कहना है कि जब 12 जनवरी को उन्हें गिरफ्तार किया गया तब देर रात तक उनके परिजनों को इस बात की जानकारी ही नहीं दी गई कि उन्हें कहां पर रखा गया है।

राजवीर का कहना है कि जब अगले दिन वह करनाल जेल में अपनी बहन से मिलने गई तो उन्होंने नवदीप को बेहद ही दयनीय स्थिति में देखा। पुरुष पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बेरहमी से पीटा तथा उनके प्राइवेट पार्ट में भी चोट के निशान दिखाई दिए।

मास ने पुलिसिया दमन की निंदा करते हुए प्रेस रिलीज जारी की

नवदीप और शिवकुमार की गिरफ्तारी के बाद मजदूर अधिकार संगठन (मास) ने प्रेस रिलीज जारी की तथा उन्होंने पुलिस द्वारा की गई बर्बरता की कड़ी निंदा की है। संगठन ने अपने वक्तव्य में कहा कि, “मजदूर-किसान एकता को तोड़ने के लिए प्रशासन द्वारा दमनकारी शक्तियों का प्रयोग किया गया। नेतृत्व कर रहे मजदूर युवा युवती को प्रताड़ित करके जेल में छोड़ दिया गया। नवदीप कौर व शिवकुमार को पुलिस कस्टडी में दर्दनाक और खौफनाक तरीके से पीटा गया।”

‘क्या किसी के हक के लिए लड़ना गुनाह है?’

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शिवकुमार की गिरफ्तारी के संबंध में जनपद के मनदीप पुनिया ने इस मामले में उनके पिता से बात की। शिव कुमार के पिता राजबीर जी एक दिहाड़ी मजदूर हैं वे बताते हैं कि घर की खराब आर्थिक स्थिति की वजह से शिव को काम करना पड़ता है। लेकिन वे सिर्फ काम ही नहीं करते बल्कि मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष भी कर रहे हैं। शिव कुमार के पिता ये सवाल करते हैं कि क्या किसी के हक के लिए लड़ना गुनाह है?

नवदीप कौर शिवकुमार समस्त भारतीय समाज के सामने एक मिसाल कायम करते हैं। वह उन मजदूरों के अधिकारों के लिए उनकी आवाज बनते हैं जिनकी आवाज को दबा दिया जाता है। लेकिन उनके हक के लिए बात करने पर प्रशासन, पुलिस और फैक्टरी के मालिकों द्वारा उन्हें निशाना बनाया जाता है, उनको गिरफ्तार किया जाता है तथा उनके साथ बर्बरता की जाती है।

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