महिला सुरक्षा के नाम पर इंटरनेट सर्च एक्टिविटी को ट्रैक करना क्या निजता के अधिकार का हनन नहीं?

महिला सुरक्षा के नाम पर इंटरनेट सर्च एक्टिविटी को ट्रैक करना क्या निजता के अधिकार का हनन नहीं?

उत्तर प्रदेश सरकार ने मिशन शक्ति के तहत महिलाओं से जुड़े अपराधों को रोकने के लिए तथा महिला की सुरक्षा का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है कि यूपी पुलिस अब लोगों की सर्च डाटा पर निगरानी रखेगी। जिससे वह लोगों द्वारा एडल्ट कंटेंट देखने पर उनके खिलाफ कार्यवाही करेगी। इसके लिए पुलिस ने विमेन पावर लाइन 1090 जारी की है।

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जो ऐसे कंटेंट सर्च करने वाले व्यक्ति को पहले नोटिफिकेशन के जरिए आगाह करेगा और बाद में उस व्यक्ति को रोकने के लिए पुलिस की टीम वहां पहुंच जाएगी। इतना ही नहीं यदि उस इलाके में किसी भी महिला या लड़की के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ की घटना को अंजाम दिया जाता है तो सबसे पहले उसी व्यक्ति को निशाने में लिया जाएगा जिसके फोन में एडल्ट कंटेंट सर्च किया गया है। लेकिन इसमें एक लूपहोल्स है वह यह है कि पुलिस के पास लोगों की हर तरह की सर्च एक्टिविटी दर्ज होगी। यानी कि उन्हें इस बात की जानकारी होगी कि किस समय व्यक्ति क्या सर्च कर रहा है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि फोन एक्टिविटी के बहाने उनके पास आपकी हर तरह की जानकारी दर्ज हो जाएगी। 

सरकार द्वारा लोगों के सर्च एक्टिविटी में निगरानी सरासर लोगों की प्राइवेसी पर दखलंदाजी है, जो पूरी तरह से लोगों की निजता पर हमला है। इसके लिए तो खुद सुप्रीम कोर्ट ने भी व्हाट्सएप द्वारा लाई गई नई प्राइवेसी पॉलिसी पर फटकार लगाई थी क्योंकि यह लोगों के नीजी डाटा पर दखल दे रहा था।

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कोर्ट ने व्हाट्सएप से यह भी कहा कि यह उनका अधिकार है कि वह लोगों के प्राइवेसी की रक्षा करें, भले ही कंपनी कितनी भी महंगी क्यों ना हो लेकिन लोगों की प्राइवेसी उससे ज्यादा कीमती है। लेकिन अब प्राइवेसी में दखलंदाजी अब प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। इसके इस्तेमाल से सरकार अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को भी दबाने के लिए कर सकती है। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ तथा आम लोगों की तरफ से इसे आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।


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वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिया जा रहा यह फैसला काफी विरोधाभासी भी है क्योंकि भारत पोर्न देखने वालों में विश्व में चौथे पायदान में आता है। साल 2017 में पोर्नहब द्वारा एक स्टडी की गई जिसमें पाया गया कि पोर्न देखने के मामले में भारत विश्व में चौथे पायदान पर है तथा विश्व में भारतीय महिलाएं पहले नंबर पर आती है। उत्तर प्रदेश के तमाम हिस्सों में भी धड़ल्ले से एडल्ट कंटेंट देखा जाता है।

खुद उन्नाव ही उत्तर प्रदेश में अडल्ट कंटेंट देखने वाले टॉप 10 शहरों में शुमार हो चुका है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि किसी आपराधिक घटना के घटने पर कितने लोगों को शक के दायरे में लिया जाएगा? ऐसे में उक्त अपराधी तक पहुंचना बेहद ही मुश्किल प्रतीत होता है।

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