लॉकडाउन के दौरान साइबर अपराध में हुई बढ़ोतरी, हर महीने 4000 मामले दर्ज

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि लॉकडाउन के दौरान साइबर क्राइम के मामले बढ़ें जिसमें लोगों को नकली नौकरी देना, केवाईसी सत्यापन, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल के साथ लोगों को निशाना बनाना आदि शामिल हैं। इन अपराधों में सोशल मीडिया की हिस्सेदारी 24 फ़ीसदी रही। वहीं बड़ी संख्या में डॉक्टर भी साइबर ठगों का शिकार हुए।

हर महीने लगभग 4000 साइबर अपराध दर्ज

पुलिस ने इस संबंध में आंकड़े जारी किए जिसके मुताबिक पिछले साल मई और अगस्त के बीच ज़्यादातर साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए। हर महीने करीब 4000 मामले दर्ज हुए। दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने इस मामले में बताया कि उनका पुलिस बल इन अपराधों को सुलझाने के लिए समर्पित है। वह कहते हैं कि दिल्ली के प्रत्येक जिले में विशिष्ट साइबर सेल है। साइबर अपराध कोविड के दौरान चरम पर थी। हालांकि कुछ महीनों बाद इसमें गिरावट आई है।


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फर्जी वेबसाइटों से 1.49 लाख से अधिक लोगों के साथ हुई धोखाधड़ी

पुलिस ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान साइबर अपराधियों ने कई तरह के नए तरीके अपनाए जिसमें उन्होंने कोरोना के रोगियों के लिए डॉक्टर और नर्सों को नौकरी देने के नाम पर फर्जी सरकारी वेबसाइटें बनाई। इन नकली वेबसाइट पर सैनिटाइज़र, पीपीई किट और भोजन बेचने वाले लोग शामिल थे। कुछ हैकर्स ने तो केवाईसी प्लेटफार्म के साथ बैंक खातों तक भी अपनी पहुंच बना ली। पुलिस ने बताया कि इन फर्जी वेबसाइटों के उपयोग से करीब 1.49 लाख लोगों के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।

1,280 पुलिस अधिकारियों को दी गई विशेष ट्रेनिंग

साइबर अपराधों के मामलों में हुई बढ़ोतरी की वजह से पुलिस को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। जिस वजह से उच्च अधिकारियों ने एक नई रणनीति बनाकर  जिला साइबर सेल और थानों में तैनात साइबर सेल के कर्मियों को विशेष ट्रेनिंग देने का फैसला किया। पुलिस ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान वीडियो कॉल पर साइबर क्राइम मामलों की जांच के लिए पूरे शहर में 1280 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।

उन्होंने बताया कि, “हम ऐसे अपराधों को रोकने के लिए 44 बैंकों, ई वॉलेट कंपनी और ऑनलाइन व्यापारियों के साथ काम कर रहे हैं।”

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