JNU में पहली बार टीचर-स्टाफ को नहीं मिली तनख्वाह 

JNU में पहली बार टीचर-स्टाफ को नहीं मिली तनख्वाह 

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी 1 मार्च को दोबारा शुरू किया गया। लेकिन यूनिवर्सिटी के खुलने के साथ ही जेएनयू के शिक्षकों ने कुलपति एम. जगदीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिक्षकों का आरोप है कि उन्हें वक्त पर तनख्वाह नहीं दी गई और इसके साथ ही कुलपति नियमों को ताक पर रखकर विश्वविद्यालय के फंड का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

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JNU के स्टाफ-टीचर्स का आरोप नहीं मिला फरवरी माह का वेतन

सोमवार 1 मार्च से जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी जेएनयू को दोबारा खोला गया। लेकिन यूनिवर्सिटी के खुलते ही शिक्षक संघ द्वारा कुलपति को हटाने की मांग की गई। संघ का आरोप है कि जेएनयू के 52 सालों के इतिहास में पहली बार उन्हें वक्त पर तनख्वाह नहीं दी गई।

इस संबंध में जेएनयू के क्षेत्रीय विकास अध्ययन केंद्र के संकाय सदस्य विक्रमादित्य चौधरी ने कहा- सभी शिक्षकों तथा कर्मचारियों को फरवरी महीने की तनख्वाह नहीं दी गई। ऐसे में 11 शिक्षक कर्मचारी मासिक वेतन आने पर ही अपने खर्च की योजना बनाते हैं वह कैसे सब कुछ मैनेज करेंगे।

उन्होंने कहा कि , ‘शिक्षकों छात्रों के पास सेमिनार अटेंड करने के पैसे नहीं है वही एग्जामिनर को भी बुलाने तक के पैसे यूनिवर्सिटी के पास नहीं है। उन्होंने मांग की कि कुलपति को हटाया जाए तथा किसी अन्य नियमित कुलपति को नियुक्त किया जाए जिससे व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।’


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JNU के कुलपति पर फण्ड के दुरुपयोग का आरोप

जेएनयू शिक्षक संघ के सचिव मौसमी बसु का कहना है कि कुलपति लगातार वित्तीय अनियमितताएं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और छात्रों को कांफ्रेंस और सेमिनार में जाने के पैसे नहीं है वहीं कुलपति ने ऑनलाइन मूर्ति अनावरण कार्यक्रम किया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे।

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इस कार्यक्रम में 9 लाख रुपये खर्च किया गया वहीं एक अन्य कार्यक्रम जिसमें राष्ट्रपति शामिल हुए थे उसमें एक से डेढ़ लाख रुपए खर्च कर दिए गए। मौसमी बसु ने कहा कि, “हम कुलपति से पूछना चाहते हैं कि 1 सप्ताह में ऐसा क्या हुआ जिसमें ऑनलाइन कार्यक्रम में इतना ज्यादा खर्चा कर दिया गया।“

एक अन्य प्रोफेसर लोबियाल ने कुलपति पर आरोप लगाया कि, “उन्होंने सिक्यूरिटी सर्विलांस और स्टैच्यू पर विश्वविद्यालय का पैसा खर्च कर रहें है। कोर्ट में केस लड़ने के लिए लाखों लिए रुपए उड़ा दिए। उन्होंने बताया कि परीक्षा में विश्वविद्यालय के 10 से 12 करोड़ रुपए खर्च के जा रहे हैं जबकि साढ़े 3 करोड रुपए में जेएनयू यह परीक्षाएं करवाता है।“

आपको बता दे यह पहली बार नहीं है जब कुलपति को हटाए जाने की मांग की जा रही है। इससे पहले भी कई बार उन्हें हटाने के लिए छात्र और शिक्षकों ने मोर्चा खोला था। बता दें 5 जनवरी 2020 को जेएनयू में हुई हिंसा के बाद ही छात्रों ने यह मांग की थी कि कुलपति को हटाया जाए।

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