गुजरात में क्या राज्य सरकार ने दस दिनों में 9132 क्लास रूम तैयार किए या फिर नहीं?

दस दिनों में 9132 क्लास रूम तैयार किए या फिर नहीं?

हम आपको बता दें कि इस बार राज्य विधान सभा में चल रहे बजट सत्र में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल रहे हैं। जिनमें राज्य सरकार एक ही सवाल के अलग-अलग जवाब दे रही है। दरअसल इस सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर से गुजरात राज्य में कक्षाओं की संख्या के आंकड़ों में मिल रहे अंतर को लेकर सरकार की आलोचना की है।

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कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को आरोप लगाते हुए कहा कि कक्षाओं की संख्या सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में समय के साथ गिर रही है। मगर सरकार एक जीवंत गुजरात की छवि को खराब करने से बचाने के लिए इस जानकारी को छिपाने की कोशिश कर रही है।

गुजरात में कक्षाओं की संख्या के आंकड़ों के अंतर ने खड़ा किया बड़ा सवाल

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ग़ौरतलब है कि 5 मार्च को शिक्षा मंत्री भूपेन्द्र सिंह चुडासमा ने सदन को बताया था कि गुजरात में प्राथमिक स्कूल में 18537 कक्षाओं की कमी पाई गई है। हालांकि उसके ठीक दस दिन बाद 15 मार्च को शिक्षा मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य के निजी स्कूलों में आवश्यक संख्या से 9405 कक्षाएं कम हैं। कक्षाओं की संख्या के आंकड़ों में 9132 के इस अंतर ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकार ने बहुत ही उछल-कूद करके इमारत को दस दिन में तैयार कर दिए हैं या असल में यह सब कुछ गुजरात की छवि को बचाने की कोशिश चल रही है।


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गुजरात को सर्व शिक्षा अभियान के तहत 1,180,62 करोड़ रुपये कम प्राप्त

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जानकारी के अनुसार सरकार ने साल 2015 में अपने प्राथमिक स्कूलों में 8,388 कक्षाओं की कमी को स्वीकार किया था। जो 2008 में दोगुना होकर 16,008 पाया गया था। उस समय भी सरकार ने इस कमी को स्वीकार किया था। हालांकि इस वर्ष कुछ और ही नज़ारे देखने को मिल रहें हैं। वहीं सोमवार को राज्य ने सदन को यह भी सूचित किया कि गुजरात को सर्व शिक्षा अभियान के तहत  केन्द्र से  मांगे गए 1,180,62 करोड़ रुपये कम प्राप्त हुए हैं।

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