बेरोज़गारी दर में महामारी के बाद बेतहाशा बढ़ोतरी, महिलाएं सबसे ज़्यादा प्रभावित

कोराना महामारी ने देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था को काफ़ी ज़्यादा प्रभावित किया। महामारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए विभिन्न देशों में लॉकडाउन किए गए थे। इस वजह से आर्थिक विकास धीमा पड़ गया। भारत में अर्थव्यवस्था की स्थिति काफ़ी चिंताजनक है क्योंकि इस वजह से बेरोज़गारी दर में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है।

इस संबंध में दिल्ली सरकार की ओर से कमीशन सर्वे जारी किया गया जिसके मुताबिक दिल्ली में बेरोज़गारों की संख्या लॉकडाउन के 6 महीने बाद बढ़ गई। दरअसल, दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर 2020 की तुलना में जनवरी-फरवरी में बेरोज़गारी दर 11.1 फ़ीसदी से बढ़कर 28.5 फ़ीसदी हो गई।

(लॉकडाउन के दौरान की तस्वीर)

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महिला बेरोज़गारी दर के आंकड़े चिंताजनक

इस सर्वेक्षण में सबसे चिंताजनक आंकड़ें महिला बेरोज़गारी दर को लेकर थे। दरअसल इसमें महिलाओं की कोरोनावायरस की बेरोज़गारी दर 25.6 प्रतिशत थी जबकि महामारी के बाद अक्टूबर-नवंबर में बेरोज़गारी दर बढ़कर 54.7% हो गई। जबकि पुरुषों में कोरोना महामारी से पहले की बेरोज़गारी दर 8.7 प्रतिशत थी जो महामारी के बाद 23.2 प्रतिशत हो गई।


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इसमें सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि रिपोर्ट में बताया गया कि 83.1 फ़ीसदी महिलाएं श्रम शक्ति से बाहर थी जो कि पुरुषों के मुकाबले 31.6 प्रतिशत है। काम के लिए अनुपलब्ध और बेरोज़गार महिलाओं में 16.6 प्रतिशत ग्रेजुएट है जबकि 27.6 प्रतिशत महिलाओं ने कक्षा 12 तक की पढ़ाई की है। वही कक्षा 10 तक पढ़ी हुई महिलाओं बेरोजगारों की संख्या 23.8% है।

(बेरोज़गारी दर में अक्टूबर में काफ़ी बढ़ी है)

आयुवार बेरोज़गारी दर के आंकड़ें और चौकाने वाले

यदि बेरोज़गारी दर के लिए आयुवार आंकड़ें में नज़र डालें तो 15 से 25 वर्ष की आयु के सबसे अधिक बेरोज़गार हैं। इसी कड़ी में लॉकडाउन के दौरान बेरोज़गारी दर 25.5% थी जो अब 28.2 प्रतिशत हो चुकी है।

वहीं दूसरी ओर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में 8.8 प्रतिशत से बढ़कर 27.4 प्रतिशत हो चुकी है।


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सर्वेक्षण में शामिल हुए 89% बेरोज़गार उत्तरदाता

इस सर्वेक्षण में 89% तक बेरोज़गार उत्तरदाता शामिल हुए जिनमें से 56% ऐसे लोग शामिल है जो 6 महीने से अधिक समय के लिए बेरोज़गार हैं तथा काम की तलाश में है। उनका कहना है कि शहर में अर्थव्यवस्था को फिर से जीवित करने के लिए नौकरी गारंटी योजना की ज़रूरत है। 30% उत्तरदाताओं ने बताया कि वह नौकरी चाहते हैं लेकिन आर्थिक मंदी की वजह से काम पाने में असमर्थ है। वही इनमें 29.3 प्रतिशत उत्तर दाताओं ने व्यवसाय बंद करने की बात कही।

(प्रदर्शन के दौरान रोज़गार की मांग)

बेरोज़गारी को लेकर यह आंकड़ें काफ़ी चिंताजनक हैं तथा अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए दिल्ली सरकार को उचित कदम उठाना पड़ेगा जिससे दर में हुई वृद्धि को रोका जा सके।

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