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9 वार्ड में अभी तक नहीं बिछायी गयी पाइप, लोगों को नहीं मिल रहा साफ़ पानी

बिहार में नगर निकाय चुनावों पर फ़िलहाल पटना हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. लेकिन वर्तमान पार्षद ने अपने पांच सालों के कार्यकाल में अपने वार्ड के विकास के लिए क्या काम किया है इसका जवाब देने का समय आ गया है. पानी, सड़क, बिजली और वार्ड में साफ़-सफ़ाई को लेकर पिछले पांच सालों में क्या काम किया गया है? पिछले चुनाव के समय अपने वार्ड की जनता से किए गये वादों को क्या निर्वतमान पार्षद पूरा कर पाए हैं?

राजधानी पटना के 75 वार्डों में जनता की नगर सरकार से एक प्रमुख मांग रहती है स्वच्छ और साफ़ पानी. पिछले चुनावी वादे में पार्षदों ने जनता को 24 घंटे पानी की आपूर्ति करने का वादा किया था. लेकिन पार्षद अपने इस वादे को पूरा करने में नाकाम रहे हैं.

शहर में अभी चार अलग-अलग शिफ्ट में 11 घंटे पानी की सप्लाई की जाती है. जिसमें आए दिन मोटर जलने की समस्या के कारण पानी की आपूर्ति में बाधा आती रहती है. पानी आपूर्ति में होने वाली बाधा के कारण महिलाओं को ज़्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है. वार्ड 44 के डॉक्टर्स कॉलोनी निवासी 65 वर्षीय रिंकू देवी बताती हैं

आधा जीवन इसी वार्ड में किराए के मकान में कट गया. सब दिन पानी के लिए एक समान ही दिक्कत है. मेरे पांच बेटा-बहू और उसका बच्चा लोग है. इस हिसाब से हमें पानी की ज़रूरत भी ज़्यादा है. गर्मी के दिन में तो पांच साढ़े पांच तक पानी आता है लेकिन अब थोड़ा ठंढ जैसा मौसम होने पर 6 बजे पानी आता है और 10 बजे बंद हो जाता है. चार घंटे में ही बच्चों को स्कूल जाने के लिए तैयार करना बेटों को काम पर जाने के लिए तैयार होना इन्ही चार घंटो में पूरा करना होता है. इतनी देर में जितना काम निपटता है निपटाते हैं.

रिंकू देवी आगे कहती हैं

“हम औरतों का जीवन तो पानी के समय के हिसाब से चलता है. पानी अगर 11 बजे आ गया तो ठीक नहीं तो फिर जितने देर से आएगा हमारे दिन का काम उतने देर से शुरू होगा. 11 बजे जब पानी आता है तो वापस 1 बजे बंद हो जाता है. जिसके बाद वापस तीन साढ़े-तीन के बीच पानी आता है जो 6 बजे तक रहता है. वापस फिर 7 बजे से रात के 10 बजे तक पानी आता है. बीच में पानी की ज़रूरत को पूरा करने के लिए हम पानी बाल्टियों और डब्बों में जमा करके रखते हैं”

मोटर जलने की समस्या भी पानी के आपूर्ति में एक बड़ी बाधा है. हालांकि यह एक तकनीकी समस्या है जिसका जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए लेकिन रिंकू देवी का कहना है

“कब मोटर जल जाए कोई पता नहीं. तब पानी कभी दिनभर तो कभी दो-दो दिन तक नहीं आता है. गर्मी के दिनों में यह समस्या ज़्यादा होती है. हमारे बच्चों को दूर-दराज से पानी ढोकर लाना पड़ता है. छोटे बच्चों को ज़्यादा परेशानी होती है इसलिए उन्हें रिश्तेदारों के घर भेजना पड़ता है”

अस्वच्छ पानी

पानी की आपूर्ति के अलावा जब हमने पानी की गुणवत्ता की बात की तो उनका कहना है कि

“अब उतना पैसा नहीं है कि आरओ (RO) फ़िल्टर लगायें पर जीवन तो हमारे बच्चों का भी है. अमीर आदमी तो बोरिंग के पानी को फ़िल्टर करके पीता है. मजबूरी है तो हमलोग सप्लाई वाला पानी पीते है. पीने वाला पानी भरते समय नल में सूती कपड़ा बांध देते है, जो थोड़ा बहुत कचड़ा आता है छन जाता है. उसके बाद पानी को साधारण फ़िल्टर में डाल देते हैं. उससे छनने के बाद पानी पीते हैं”    

यह समस्या कंकड़बाग के रिहायाशी इलाकों में से एक की है. वहीं हनुमान नगर से सटे कैलाशपुरी में पानी की समस्या का आलम यह है कि ग्राउंड फ्लोर पर ही अगर आपका मकान थोड़ा ऊंचाई पर है तो पानी की सप्लाई वहां तक नहीं पहुंचेगी. बिना मोटर लगाये पानी की आपूर्ति मकान में संभव नहीं है.

कैलाशपुरी रोड नंबर 6 के रहने वाले सुधीर कुमार कहते हैं

“सप्लाई के पानी में बहुत समस्या होती थी. एक तो पानी समय पर नहीं आता था ऊपर से उसमें प्रेशर की समस्या. मोटर से खींचकर एक टंकी भरने में 40 से 45 मिनट समय लग जाता था. उस पर भी कहीं पाइप फटा होने के कारण गंदा पानी आ जाता तो वो भी किसी काम का नहीं. तब तंग आकर हमने चार साल पहले खुद का बोरिंग करा लिया”   

सप्लाई के पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में कमी के कारण पिछले 5-6 सालों में निजी बोरिंग कराने की संख्या भी बढ़ी है. लोग अब सप्लाई के पानी के भरोसे समय और सेहत नहीं गवाना चाहते हैं.

हालांकि अभी भी जिन मकानों में निजी बोरिंग नहीं कराया गया है वहां के लोग सप्लाई के पानी पर ही निर्भर हैं. शहर में 39 ऐसे वार्ड हैं, जहां गंदे और बदबूदार पानी की सप्लाई से लोग परेशान हैं. शहवासियों की परेशानी का यह सिलसिला पिछले कई सालों से चला आ रहा है. हालात यह हैं कि नगर निगम के सप्लाई वाले पानी को यदि बिना उबाले या फ़िल्टर के पी लें तो बीमार पड़ना निश्चित है.

बच्चों के डॉक्टर डॉ. सदर आलम बताते हैं

“दूषित पानी पीने से बच्चे क्या बड़ों को भी बचना चाहिए. दूषित पानी पीने से बच्चों को पेट दर्द, उल्टी, डायरिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं. वयस्कों को भी उल्टी और टाइफाइड जैसी बीमारियां हो सकती हैं. साथ ही गंदा पानी पीने से डिहाइड्रेशन की भी समस्या हो सकती है. इसलिए हमेशा साफ़ और उबला पानी पीना चाहिए”

अस्वच्छ पानी पीने की वजह से हुआ ऑपरेशन

पटना नगर निगम के पार्षदों द्वारा साल 2017 में चुनावी मैदान में किया गया वादा तो धरातल पर फ़ेल हो गया है. शहर के इन वार्डों में रहने वाली जनता आज भी इन्हीं गंदे पानी के सहारे अपना समय काटने को मजबूर हैं.

नगर निगम के लगभग 30 वार्ड ऐसे है जहां अभी तक 25 से 30 साल पुराने पाइप द्वारा पानी पहुंचाया जा रहा है जिसके कारण लोगों के घरों तक गंदा पानी पहुंच रहा है. वहीं इन वार्ड के पार्षदों का कहना है कि

पाइप बिछाने के लिए फंड नहीं मिला है जिसके कारण समस्या हो रही है. वहीं लगभग 19 वार्ड ऐसे हैं जहां पाइप बिछाने का काम अभी अधूरा पड़ा हुआ है.

फंड के कारण रुका है पाइप बिछाने का काम

टूटे पाइपलाइन द्वारा सप्लाई का पानी पहुंचने का एक कारण बुडको और पथ निर्माण विभाग में राशि के लेन-देन को लेकर सहमती नहीं बनना भी है. दरअसल पथ निर्माण विभाग ने वाटर पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क खोदने का एनओसी बुडको को नहीं दिया है. पथ निर्माण विभाग सड़क की खुदाई से पहले 1.66 करोड़ रुपए की राशि बुडको से आरडीसी मांग रहा है. बुडको के पास देने के लिए राशि नहीं है और इसी चक्कर में शहर के 9 वार्ड (4, 9, 21, 22, 23, 25, 27, 28 और 37) में पाइपलाइन बिछाने का काम अभी अधूरा पड़ा है. दरअसल शहर के 9 वार्डों में नई पाइपलाइन बिछाने का काम बुडको को दिया गया था. लेकिन डेढ़ सालों से नई पाइप बिछाने का काम अटका हुआ है.

वहीं बुडको द्वारा शहर के पांच जगह अदालतगंज, अंटा नगर, एसके नगर, शेख़पुरा और एसके पुरी में वाटर टंकियों का निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया है. साथ ही पांच पंप हाउस और पांच ट्यूबवेल का निर्माण भी किया गया है. पाइपलाइन बिछाने के बाद इनसे पानी की सप्लाई शुरू किया जा सकता है.   

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