बिहार में ‘अवैध’ पुल निर्माण, गरीबों का घर तोड़ने जा रही है सरकार

बिहार की राजधानी पटना से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर पुनपुन नदी के किनारे नूरमोहिदिनीपुर गांव है. साल 2019 में  अगस्त के महीने में इस गांव के लिए एक पुल निर्माण का नक्शा बिहार सरकार के पुल निर्माण विभाग से पारित हुआ. इस पुल के लिए 50.51 करोड़ रूपए का बजट दिया गया. लेकिन इस पुल को बनाने के लिए सरकार ने जो जगह चुनी है वो पुनपुन नदी का किनारा है और निर्माण के कारण वहां के लोगों के घर गिरने के कगार पर पहुंच चुके हैं.

(बिहार राज्य पुल निर्माण विभाग की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी)

कई लोग अपने घरों को छोड़ कर किराए के मकान में रहने के लिए मजबूर हो गए हैं. अभी तक वहां के निवासियों के रहने के लिए सरकार ने कोई इंतज़ाम नहीं किया है. जब लोगों ने वहां पर चल रहे निर्माण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठायी तो कांट्रैक्टर और प्रोजेक्ट इंजीनियर के द्वारा स्थानीय निवासियों को मार-पीट और पुलिस से गिरफ़्तार कराने की धमकी दी जा रही है.

नूरमोहिदिनीपुर गांव में बनने वाला पुल सबसे अधिक नुकसान वहां के घाट को पहुंचा रहा है. पुल बनाने के लिए घाट की सीढ़ियों को पुल निर्माण विभाग ने तोड़ दिया है. इसकी वजह से घाट की मिट्टी खिसक गयी है और पानी का स्तर बढ़ने की कगार पर है. घाट किनारे किसी भी तरह के निर्माण के लिए सम्बंधित विभाग को जल संसाधन विभाग के इजाज़त लेनी पड़ती है. साथ ही पुनपुन बाढ़ ग्रसित इलाका है और हमेशा बरसात के मौसम में डूब जाता है, ऐसे में उस जगह पर निर्माण के लिए बिहार राज्य आपदा प्रबंधन विभाग से भी इजाज़त लेनी ज़रूरी है. साल 2019 के सितंबर महीने में पुनपुन में भारी बाढ़ आई थी.

Democratic Charkha की टीम ने जब जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग से जानकारी लेनी चाही तो दोनों विभागों ने ये साफ़ कह दिया है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है.

(पुनपुन नदी के किनारे चल रहा पुल निर्माण का कार्य)

परमिला देवी नूरमोहिदिनीपुर गांव की रहने वाली हैं. उनके घर के पास ही पुल के खभों के लिए ड्रिलिंग की गयी है. इस ड्रिलिंग के कारण उनके घर में दरार आ चुकी है और उनका घर अब गिरने की कगार पर है. परमिला देवी बताती हैं,

ज़मीन में ड्रिलिंग की वजह से घर में जगह-जगह दरार आ चुकी है. अब सरकारी बाबू लोग आकर कह रहे हैं घर ख़ाली करो. जब हमलोग कहें कि घर नहीं छोड़ेंगे तो वो हमलोग को जेल भेजवाने की धमकी भी दे रहे हैं. अब घर की हालत ऐसी हो चुकी है कि वो कभी भी गिर सकता है. ये हमारा पुश्तैनी मकान है इसे छोड़कर हम कहीं नहीं जाने वाले हैं.

(ड्रिलिंग के कारण घरों में आई दरार)

बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड ने जिलाधिकारी के नाम 12 जून, 2021 को एक पत्र (संख्या- BRPNNL/PT1/C001/325) लिखते हुए घरों में दरार और क्षतिग्रस्त होने की बात मानी है. साथ ही ये भी कहा है कि जल्द से जल्द इन घरों को ख़ाली करवाया जाए. लेकिन ख़ाली करवाने से पहले लोगों के रहने का इंतज़ाम सरकार द्वारा ना करवाया गया है और ना सोचा गया है. इसके अलावा पुल निर्माण विभाग के द्वारा जब हमारी टीम ने बाकी के विभागों से इजाज़त लेने की बात पूछी तो उन्होंने भी किसी तरह के पत्र को उपलब्ध करवाने से इंकार किया है.

(बिहार पुल निर्माण लिमिटेड द्वारा जिलाधिकारी को लिखा गया पत्र)

पुल निर्माण विभाग ने निर्माण कार्य के लिए लोगों की ज़मीन का अवैध अधिग्रहण भी करना शुरू किया है. पुल निर्माण का काम बिहार सरकार का एक प्रशासनिक कार्य है इसलिए इसकी पूरी प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण अधिनियम द्वारा होनी थी जिसका खुले तौर पर उल्लंघन किया जा रहा है. भारत के सर्वोच्च न्यायालय के स्थायी आदेश के अनुसार कानूनी रूप से कोई निर्माण अगर भूमि अधिग्रहण अधिनियम की उचित प्रकिया द्वारा नहीं किया जाता है या भूमि अधिग्रहण के विपरीत किया जाए तो वो प्रक्रिया कानून के ख़िलाफ़ मानी जायेगी (खूबचंद बनाम राजस्थान राज्य, 1967).

ग्रामीणों ने पुल निर्माण विभाग को मार्च के महीने में भी एक पत्र लिखकर अपनी शिकायत और आने वाली परेशानियों से अवगत कराया था. लेकिन पुल निर्माण विभाग ने इसपर कोई ध्यान नहीं दिया.


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जब इस पुल निर्माण के प्रोजेक्ट इंजिनियर शैलेश कुमार से हमलोगों ने इस अधिग्रहण की जानकारी ली तो उन्होंने किसी भी तरह का बयान कैमरा पर देने से साफ़ इंकार किया. लेकिन शैलेश कुमार ने ग्रामीणों को धमकाते हुए कहा कि ये ज़मीन उनकी है ही नहीं. ग्रामीणों ने बताया कि:-

शैलेश कुमार (प्रोजेक्ट इंजिनियर) आकर हमलोग को कहते हैं कि ये ज़मीन आपकी है ही नहीं. ये सरकारी ज़मीन है. आपने 30-40 सालों से ज़मीन की रसीद ही नहीं कटाई है.

प्रोजेक्ट इंजिनियर के इस बात की पुष्टि करने के लिए डेमोक्रेटिक चरखा ने इस मामले के विशेषज्ञ वकील सुरेश भारती से पूरे मामले को समझना चाहा. सुरेश भारती ने बताया कि-

पटना हाईकोर्ट ने हाल में ही एक ऐसा फ़ैसला दिया है. मीठापुर बस अड्डे के पास भी पुल निर्माण का काम चल रहा है और वहां पर सरकार ज़मीन के ऊपर अतिक्रमण करके लोग ज़माने से रह रहे थे. पटना हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में ये साफ़ तौर से कहा है कि अगर कोई काफ़ी सालों से एक जगह पर रह रहा हो तो उसका अधिकार उस जगह पर होता है. सरकार उन्हें अचानक आकर ख़ाली करने के लिए नहीं कह सकती है. सरकार अगर उस ज़मीन को अधिग्रहण करना चाहती है तो उसके लिए लोगों को उचित मुआवज़ा देना होगा.

सुरेश भारती आगे बताते हैं,

मीठापुर के मामले में तो लोग सरकारी ज़मीन पर बसे हुए थे और नूरमोहिदिनीपुर में तो वो ज़मीन सरकारी है भी नहीं. वो लोगों की ही ज़मीन है जिसपर सरकार अवैध तरीके से कब्ज़ा कर रही है.

(डेमोक्रेटिक चरखा से बात करते सुजीत कुमार)

सुजीत कुमार का घर ड्रिलिंग के दायरे में आता है और इस वजह से उनके घर में कई दरार आ चुकी है. सुजीत कुमार बताते हैं

शीट पायलिंग की वजह से मेरा मकान पूरा दरक चुका है. अब जब घर गिरने के कगार पर है तो ठेकेदार घर ख़ाली करने के लिए कह रहे हैं. साथ ही ये धमकी दे रहे हैं कि अगर दो दिनों में हम घर नहीं ख़ाली किये तो हमको जेल भेज देंगे. जब हम इसका विरोध किये और बोले कि हम इतने कम समय में कहां जायेंगे तो वो कहने लगें कि ज़्यादा बहस करोगे तो जेल भेज देंगे. अब ठेकेदार का कहता है कि मेरा घर ही अवैध है और सरकारी ज़मीन पर बना हुआ है. जबकि मेरे पास घर का पूरा कागज़ मौजूद है.

वकील सुरेश भारती इस मामले को समझाते हैं,

मान लीजिये प्रोजेक्ट इंजिनियर की बात सही है और ग्रामीणों ने 30-40 साल से सरकार को टैक्स नहीं भरा है तब भी नियम के अनुसार सरकार ज़मीन ज़ब्त नहीं कर सकती है. लोग बैकडेट से भी 40 साल का टैक्स दे सकते हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि सरकार लोगों की ज़मीन हथिया ले. अगर सरकार को ज़मीन ज़ब्त ही करना था तो उसकी भी प्रक्रिया है. सरकार को पहले लोगों के नाम का नोटिस निकालना होगा, माइक से घोषणा करानी होगी तब जाकर वो कुछ ‘अवैध’ निर्माण (अगर वो है तो) उसे तोड़ सकती है.

(अपने घरों की दरारों को दिखाते ग्रामीण)

जब ग्रामीणों ने मदद के लिए पुनपुन इलाके के विधायक गोपाल रविदास से बात करनी चाही तो विधायक ने बात ही नहीं की. लोगों ने विधायक के नाम एक पत्र भी लिखा है. रूबी देवी के दो छोटे बच्चे हैं. उनके पति अब इस दुनिया नहीं हैं. संपत्ति के नाम पर रूबी देवी के पास सिर्फ़ अब यह घर ही बचा है. पुल निर्माण के कारण अब उनके घर की स्थिति काफ़ी ख़राब हो चुकी है. दरार पड़ने की वजह से उनके घर की छत कभी भी गिर सकती है. अभी तक ये मुद्दा किसी भी अखबार या पोर्टल ने तवज्जो नहीं दी है. इस रिपोर्ट को बनाने के दौरान स्थानीय लोगों के विरोध के कारण पुल निर्माण का काम रोक दिया गया है. लेकिन जल्द ही निर्माण कार्य फिर से शुरू होगा.

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