इतिहास में पहली बार रेप सरवाइवर को जेल, क्या यही है बिहार में सुशासन की सरकार?

बलात्कार एक ऐसा जघन्य अपराध है जो ना सिर्फ किसी को शारीरिक पीड़ा पहुंचाता है बल्कि उसके मानसिक स्थिति पर भी आघात करता है। बलात्कार केवल सरवाइवर के साथ नहीं होता, वह समाज के मुंह पर तमाचा है। वह यह दिखाता है कि हमारा समाज वास्तविक में कितना खोखला है इसके अंदर कितनी बुराइयां छुपी हुई है। ज़मीनी स्तर पर यह मनुष्य को अंदर से झिंझोड़ कर रख देता है और यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या हम वाकई इंसान कहलाने लायक हैं क्या हम समाज में रहने और जीने लायक हैं?

और यह सवाल अररिया में गैंगरेप के मामले के बाद हमारे सामने दोबारा आ खड़े हुए हैं, जहां ना केवल अभियुक्त ने पीड़िता के साथ बलात्कार किया बल्कि समाज ने  भी। यह घटना 6 जुलाई को एक 22 साल की महिला के साथ हुई जिसकी प्राथमिकी अररिया महिला थाना में सरवाइवर द्वारा 7 जुलाई को दर्ज कराई गई।

प्राथमिकी की एक कॉपी डेमोक्रेटिक चरखा के पास मौजूद है उसके तहत महिला थाने में कांड संख्या 59 /2020 भारतीय दंड संहिता की धारा 376 दी के तहत इस प्राथमिकी में यह है कि मोटरसाइकिल सिखाने के बहाने उनको एक परिचित लड़के ने बुलाया जहां से वह व्यक्ति रेप सरवाइवर को एक सुनसान जगह पर ले करके गया वहां पर पहले से 4 लोग मौजूद थे और फिर उन चारों ने उसके साथ बलात्कार किया महिला ने उस व्यक्ति को जो उसे वहां लेकर की गया था मदद की गुहार लगाई परंतु वह भाग खड़ा हुआ।

आशीष रंजन जो जन जागरण शक्ति संगठन से जुड़े हुए हैं उन्होंने यह बताया कि पीड़िता उनके संगठन की एक कार्यकर्ता के यहां काम किया करती थी इस प्रकार वह उनके जान पहचान में थी तो घटना के बाद उसने जन जागरण शक्ति संगठन के कार्यकर्ता कल्याणी को फोन किया और फिर जन जागरण शक्ति संगठन के कार्यकर्ता उन्हें घर लेकर के गए।

जन जागरण शक्ति संगठन ने अपने प्रेस रिलीज में यह भी बताया कि जब पीड़िता अपने घर में थी तो उन्हें वहां असहज महसूस कराया गया और वह अपना घर छोड़कर जन जागरण शक्ति संगठन के सदस्यों के साथ ही रहने को मजबूर हो गए, द स्क्रॉल तथा संगठन द्वारा दी गई जानकारी से यह बात पता चली है कि पीड़िता के परिवार वालों ने इस घटना के लिए उन्हें ही ज़िम्मेदार ठहराया साथ ही साथ यह भी प्रयास किया कि वह  उनमें से एक से विवाह कर ले।

संगठन के कार्यकर्ता कल्याणी के साथ रहते हुए पीड़िता का 7 और 8 जुलाई को मेडिकल जांच हुआ जिसके बाद 10 जुलाई को बयान दर्ज कराने के लिए पीड़िता को जुडिशल मजिस्ट्रेट कोर्ट में ले जाया गया।

संगठन के प्रेस रिलीज के अनुसार पीड़िता को जन जागरण संगठन के कार्यकर्ता 10 जुलाई को दोपहर में 1:00 बजे कोट लेकर पहुंचे थे जहां फिर पीड़िता को अगले 4 घंटे तक इंतजार करवाया गया उसके बाद फिर जब उनका बयान लिया गया तो न्यायिक दंडाधिकारी ने बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा हस्ताक्षर की बात पर पीड़िता ने उनसे अनुमति चाहि एक बार कल्याणी और तन्मय निवेदिता जो जन जागरण शक्ति संगठन के कार्यकर्ता हैं उनके सामने यह बयान पढ़ दिया जाए और उनके सामने ही हस्ताक्षर किया जाए जिसको जुडिशल मैजिस्ट्रेट ने अस्वीकार कर दिया इस बीच कल्याणी वहां मौजूद अफसरों में हालात खराब  होते चले गए तकरीबन शाम 5:00 बजे कल्याणी और तन्कोमय निवेदिता को हिरासत में ले लिया गया और 11 जुलाई को जेल भेज दिया गया।

स्थानीय अखबार दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के अनुसार न्यायालय में पेश कर राजीव रंजन सिन्हा ने पीड़िता के अतिरिक्त दो अन्य महिलाओं के विरुद्ध महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है 10 प्राथमिक में या बताया गया है कि पीड़िता ने जो बयान दिया फिर उसी पर आपत्ति जताई।

रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि बयान की कॉपी छीनने का प्रयास किया गया और अभद्रता से आक्रोशित दंडाधिकारी ने तीनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया।

संगठन के कार्यकर्ता कया कहना है कि पीड़िता उस उस समय आक्रोशित हो गई थी और उन्होंने अपने दिए बयान पर हस्ताक्षर करने से भी इनकार कर दिया था और इसका कारण मानसिक तनाव था जोकि ना केवल इस बात का था कि उनके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ परंतु उनको वहीं घटना बार बार सबके सामने चार दिनों तक दोह रानी परी और उनके परिवार वालों ने भी उनकी कोई सहायता नहीं करी ना उनको किसी तरह के मनोरोग चिकित्सा से इलाज मिल सका इन सब के अतिरेक उनकी पहचान की गोपनीयता भंग कर दी गई।

10 जुलाई की पूरी घटना के हो जाने के बाद कुछ स्थानीय अखबारों ने ना केवल पीड़िता के निजता के उल्लंघन आ की जो कि भारतीय दंड संहिता 228A अधिनियम के तहत एक अपराध है परंतु उन्हें चरित्रहीन भी करार दिया।

(जन जागरण शक्ति संगठन की कार्यकर्ता तन्मय)

हालांकि माननीय उच्चतम न्यायालय हैदराबाद पीड़िता की निजता का उल्लंघन करने के मामले पर दायर एक याचिका की सुनवाई करते हुए नाराजगी व्यक्त की थी और प्रेस काउंसिल आफ इंडिया को ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया था मगर अब लगता है कि केवल चेतावनी उसे अब कुछ नहीं होने वाला प्रेस का रवैया जो है वह वहीं पर है उसे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला ऐसे में इन पर अपराधिक मामले दर्ज किए जाने चाहिए तथा माननीय अदालत से पांच तक सुनवाई की मांग भी की जानी चाहिए क्योंकि बिना सर उदाहरण स्थापित किए ऐसी चीजें ऐसी खबरें मीडिया में आती रहेंगी और पीड़ितओं का शोषण आप उत्पीड़न काम नहीं हो सकता।

बयान दर्ज कराते वक्त जो कुछ भी घटना घटित हुई उस को मध्य नजर रखते हुए बीबीसी हिंदी नेअजीजा फारुकी से बात की जो कि एक मानवाधिकार कार्यकर्ता है उन्होंने यह बताया कि 80 के दशक में बलात्कार कानून में एक बड़ा बदलाव किया गया था इसके बाद बर्डन आफ प्रूफ महिला से पुरुष को चला गया था बाद में साल 2013 में क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट में महिला केंद्रित कानून बनाया गया।

नए कानून के मुताबिक पुरानी सेक्सुअलिटी हिस्ट्री डिस्कस नहीं करने रेप सरवाइवर की प्राइवेसी को अहम माना गया तो 164 का बयान दर्ज कराते वक्त अगर रेप सरवाइवर किसी पर्सन ऑफ कॉन्फिडेंस विशिष्ट व्यक्ति साथ में ले जाना चाहती है तो इसकी अनुमति भी दी गई साथ ही साथ उसे बयान की कॉपी भी मिलने का प्रावधान किया गया इसमें अगर संभव है तो महिला जज के सामने  बयान दर्ज किया जाना चाहिए।

खदीजा ने यह भी बताया कि यह केवल कानून है बिहार में वास्तविकता कुछ और है बिहार में उसी के चलती है जिसके पास पैसा है दुष्कर्म हो जाता है उसके बाद आप शिकायत करें तो गंदे गंदे सवाल पूछे जाते हैं बार-बार पूछते हैं क्या हुआ था क्यों गई थी वहां क्या पहना था ऐसा लगता है कि इस करके पीड़िता नहीं बहुत बड़ी गलती कर दी थी।

वहीं जिले के कुछ पदाधिकारी वा न्यायिक ऑफिसर को मानो सांप सूंघ गया हो वाह इस पूरे मामले पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से अपने आप को बचा रहे हैं। फिलहाल तो पीड़िता और संगठन के दोनों व्यक्ति जिनका नाम कल्याणी और तन्मय समस्तीपुर के जेल में है।

आशीष रंजन ने दोनों सामाजिक कार्यकर्ताओं पर लगे इन आरोपों को खारिज करते हुए उनकी तुरंत रिहाई की मांग उठाई है साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा है कि कोरोना  के समय में किसी ऐसे व्यक्ति को जो कि निर्दोष तो है ही उसके साथ साथ पीड़ित भी है उसका जेल में रखना सही नहीं है इसके अलावा उन्होंने इसे मानव अधिकार का हनन भी बताया।

जिले के एसपी सावलाराम से यह पूछा कि जब पीड़िता जेल में है तो फिर आगे की जांच कैसे होगी इस पर उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी इस संबंध में कानूनी प्रक्रिया को अपनाते हुए जांच करेंगे। बिहार की नामी महिला अधिकार कार्यकर्ता निवेदिता ने जब बिहार राज्य महिला आयोग को पात्र लिखते हुए संज्ञान लेने को प्रेरित किया तब जाकर आयोग ने इसे संज्ञान में लिया।

बिहार राज्य महिला आयोग ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए यह कहा है कि पीड़िता को ही गिरफ्तार कर लेना ध्यान करने वाली बात है मामले को संज्ञान में लेते हुए अररिया प्रशासन को नोटिस देकर घटना की पूरी जानकारी लेने की कोशिश की जा रही है प्रशासन का जवाब आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आपको यह भी बताते चले कि इस मामले में अब तक एक ही आरोपित साहिल की गिरफ्तारी हो सकी है एसपीडीएस सावलाराम ने कहा है कि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस कार्यवाही कर रही है। साथ में आपको यह भी जानकारी देना चाहते हैं कि बिहार में एनसीआरबी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के रिपोर्ट के अनुसार सन 2018 में बिहार में 651 दुष्कर्म की घटनाएं हुई।

समाज बनाना दिखाना हम मनुष्यों के हाथ में है यह हम पर पूरी तरह निर्भर करता है कि हम क्या समाज भविष्य में अपने बच्चों के लिए अपने उधर पदाधिकारियों के लिए छोड़कर जाना चाहते हैं तो ऐसे में हमें यह प्रण लेने की जरूरत है कि इस तरह की घटना दोबारा कभी ना घटे तथा लोगों का प्रसारण बंद किया जाए और उन्हें जरूरत की चीजें मुहैया कराई जाए सरकार से भी अनुरोध है कि वह इस ओर ध्यान दें और लोगों की सहायता के लिए पीड़ितों की सहायता के लिए सामने आए देश में और राज्य में बढ़ते क्राइम को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। अभी देश में तथा राज्य में शांति स्थापित हो सकती है और आपको यह बता दें कि शांति कोई गंतव्य नहीं है अपितु एक मार्ग है जिस पर हम सबको साथ चलना होगा।

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