बिहार में भ्रष्टाचार का नया नाम है पुल निर्माण करवाना

बिहार में नीतीश सरकार द्वारा निर्मित सत्तरघाट पुल उद्घाटन के 29 वेऺ दिन बाद ही गिर चुका है। लेकिन सरकार ने इसको पूरी तरह से नकार दिया है तथा इस खबर को झूठा भी करार दिया है। यह घटना बिहार के गोपालगंज जिले की है जहां आज से 29 दिन पहले 15 जून को माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीशे कुमार जी ने गोपालगंज को पूर्वी चंपारण से जोड़ने के लिए गंडक नदी पर बनाए गए सत्तरघाट पुल का वर्चुअल उद्घाटन किया था।

इस पुल के निर्माण में 263.47 करोड़ रुपए की लागत हुई थी और 8 वर्ष का समय लगा था। पुल के उद्घाटन पर नीतीश कुमार ने सियासी दांव खेलते हुए यह कहा कि हमने बिहार के हर जिले को पुलों और सड़कों के जाल से इस तरह जोड़ा है कि अब किसी भी जिले से पटना महज़ 5 घंटे में पहुंचा जा सकता है।

बताया जा रहा है कि गंडक नदी में आई बाढ़ के कारण छपरा सत्तर घाट पुल को जोड़ने वाली सड़क 30 फीट धंस गई है। 8 साल में निर्मित होने वाला यह पुल बरसात भी ना झेल  सका।

सत्तरघाट मुख्य पुल के पास यह घटना होने की वजह से मुजफ्फरपुर, सिवान, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर और दरभंगा की ओर जाने वाले वाहनों का परिचालन ठप पड़ गया है।

इस घटना के घटित होने के बाद और बिहार में चुनाव का मौसम पर मध्य नजर रखते हुए विपक्षी दलों ने नीतीश सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

बिहार कांग्रेस के प्रमुख, मदन मोहन झा ने भी ट्विटर पर  लिखा, ”पुल का निर्माण 263.47 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था और 16 जून को इसका उद्घाटन किया गया था। ऐसा इल्जाम कृपया चूहों पर ना डालें जाए।”

वहीं आरजेडी नेता एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने ट्वीट करके या कहा की “पुलों का बह जाना बिहार में नीतीश सरकार के रहते हुए आम बात हो चुकी है। क्या उन्होंने वक्त से पहले इस पुल का उद्घाटन सिर्फ तारीफें बटोरने के लिए किया था। हम सरकार से यह गुजारिश करते हैं कि जिस कंपनी नया पुल निर्माण किया उसे तुरंत ब्लॉक लिस्ट किया जाए।”

वहीं दूसरी ओर सरकार ने पुल के टूट जाने की बात को पूरी तरह से नकारते हुए यह कहा है कि पुल को किसी प्रकार की कोई क्षति नहीं पहुंची है केवल अप्रोच सड़क ध्वस्त हुई है। स्थानीय विधायक मिथिलेश तिवारी ने सड़क एवं पुल निर्माण मंत्रालय से  उच्च  स्तरीय जांच कराने की मांग की है। नंदकिशोर यादव ने यह आश्वासन दिया है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाएगी तथा अधिकारियों की एक टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी है।

अब तक की छानबीन से यह बात पता चली है की पुल से सड़क को जोड़ने वाली पुलिया पानी के दबाव का सामना नहीं कर सकी। यहां बता दें कि सत्तर घाट पुल का रास्ता बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसी पथ का चयन रामजानकी पथ में हुआ है। पुल के बन जाने से केसरिया से छपरा, सिवान, गोपलगंज, पटना व कुशीनगर की दूरी कम हो गयी थी।

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