मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना: उम्मीद या छात्राओं के साथ धोखा?

प्रीति कुमारी बिहार के जयप्रकाश नारायण यूनिवर्सिटी (छपरा) से इतिहास विषय में स्नातक की पढ़ाई साल 2019 में पूरी की। प्रीति अपने बैच में चौथे रैंक पर थीं। एम.ए.(पोस्ट ग्रेजुएशन) की पढ़ाई के लिए प्रीति दिल्ली यूनिवर्सिटी में जाने वाली थीं। उन्होंने दाख़िले का एग्जाम भी पास कर लिया था लेकिन पैसे की कमी के कारण वो आगे पढ़ाई नहीं कर पायी। प्रीति ने डेमोक्रेटिक चरखा से बात करने के दौरान बताया कि

मुझे इतिहास में काफ़ी दिलचस्पी है. मैं पीएचडी करना चाहती थी. मेरे पिता एक बीड़ी कारख़ाने में मज़दूर हैं. उन्होंने काफ़ी मेहनत से, भूखे रह कर मुझे पढ़ाया. मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाख़िले का सपना तब ही देखा था जब बिहार सरकार ने ये कहा था कि ग्रेजुएशन के बाद 25 हज़ार रूपए मिलेंगे. मैंने सोचा इन पैसों से दाख़िला ले लूंगी और बाकी के ख़र्चे के लिए वहीं पर कोई पार्ट-टाइम नौकरी कर लूंगी. लेकिन दो साल बीत गए ना ही कन्या उत्थान योजना के पैसे आयें और एग्जाम पास के बावजूद मेरा दाख़िला दिल्ली यूनिवर्सिटी में नहीं हो सका.

शिक्षा सभी समस्याओं को दूर करने का अहम जरिया माना जाता है। समाज में जब लोगों को आगे बढाए जाने की पहल की जाती है तो उनको शिक्षा दी जाती है। समाज में हर तरह के लोग हैं और प्रतिभाओं की भी कमी नहीं है। समाज क बालिकाओं के लिए प्रदेश के सीएम ने मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना को शुरू किया। जिसका उद्देश्य प्रदेश सरकार सभी बालिकाओं को साक्षर और सशक्त बनाने के लिए उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना है ताकि वह बेहतर से बेहतर कर सके। लेकिन इस योजना में भी कई स्तर पर चूक की खबरें सामने आ रही हैं।


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मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत प्रदेश सरकार द्वारा सभी बालिकाओं को साक्षर और सशक्त बनाने के लिए उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान किया जा रहा है। ये आर्थिक सहायता उन्हें उनके जन्म से लेकर ग्रेजुएशन पूरी करने तक समय समय पर दी जाएगी। उम्मीद थी कि इस योजना की मदद से बालिकाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी करेगी और साथ ही साथ राज्य के विकास में भी कारगर साबित होगी।

(चुनाव के दौरान नीतीश कुमार ने कन्या उत्थान की राशि बढ़ाने का वादा किया था)

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना की शुरुआत साल 2018 में की गयी थी। योजना की शुरुआत में 12वीं पास छात्रा को ₹10 हज़ार और स्नातक (ग्रेजुएशन) के बाद ₹25 हज़ार रूपए देने का प्रावधान था। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वादा किया कि दुबारा सरकार बनने के बाद वो सभी के इस राशि को दोगुना कर देंगे।

1 अप्रैल 2021 को इस योजना में संशोधन किया गया और उसके बाद 12वीं पास छात्राओं को ₹25 हज़ार और स्नातक (ग्रेजुएशन) के बाद ₹50 हज़ार देना का नियम बनाया गया। लेकिन मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना में राशि तो बढ़ा दी गयी है लेकिन साल 2019 से लेकर जुलाई 2021 तक 237890 (दो लाख सैतीस हज़ार आठ सौ नब्बे) आवेदन अभी तक लंबित हैं। साल 2019 में कुछ छात्राओं को इस योजना का लाभ मिला और उनके बैंक खाते में राशि भी पहुंची, लेकिन अधिकांश छात्राएं ऐसी हैं जिन्हें अभी तक राशि नहीं मिली है।

बिहार में कुल 17 राजकीय विश्वविद्यालय हैं। 2019 के एक आंकड़ें केअनुसार बिहार में 1,37,284 छात्राओं को स्नातक की डिग्री दी गई है।

जानकारी के अनुसार जनवरी 2022 तक सूबे में इस योजना के का लाभ 1.50 लाख बालिकाओं ने लिया है। जबकि 2021 में 1.40 लाख बालिकाओं को इस योजना का लाभ दिया गया था। जिनमें से लगभग कुल 84,344 कन्या.ओं को धन राशि दे दी है।

Patna Women’s College (PWC) की छात्रा सपना कहती हैं, मैंने मास कम्यूनिकेशन किया था। इसके लिए कन्या उत्थान योजना के लिए आवेदन किया था। लेकिन जानकारी मिली कि वोकेशनल की छात्रा को राशि नहीं मिली है। यह भी बताया गया कि पीयू में जाकर फॉर्म रिजेक्ट कर दिया जा रहा है। जब वहां पर जानकारी ली गई तो बताया गया कि शिक्षा विभाग से ही राशि नहीं आई है। जबकि ऐसा कही नहीं है। ग्रेजुएशन में पहला डिविजन लाने वाली स्टूडेंट को 25 हजार की राशि दी जाएगी। इसके बाद कोविड का दौर आया। हम सबने लोन लेकर स्टडी की थी, सोचा था कि इस राशि के मिलने के बाद हायर स्टडी करेंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। पीयू व शिक्षा विभाग एक-दूसरे पर थोप रहे हैं।

(जोहरा शमीम)

क्या है कन्या उत्थान योजना की प्रक्रिया

इसके लिए सभी बालिकाओं को आधिकारिक वेबसाइट ऑनलाइन माध्यम से ही आवेदन करना होगा। महाविद्यालय के माध्यम से किये गए आवेदन स्वीकृत नहीं जाएंगे और न ही किसी प्रकार का कोई दस्तावेज़ या डॉक्यूमेंट ही कराना है। आवेदन के समय आवेदनकर्ता के अविवाहित होने पर ही इस योजना का लाभ दिया जाएगा। योजना के तहत सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होता है। जानकारी के अनुसार इस योजना के अंतर्गत उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्शाहन राशि की तोर पर 50 हजार देने का प्रावधान है।

सरकार की इस अहम योजना का लाभ एक तरफ तो कुछ बालिकाओं को मिल रहा है लेकिन दूसरी तरफ ऐसी भी बालिकाएं हैं जिनका आवेदन किया जा चुका है लेकिन अभी तक उनको इस योजना के तहत कोई लाभ नहीं मिला है। Magadh Mahila College (MMC) में पढने वाली छात्रा सरिता की माने तो उसने इस योजना के लिए आवेदन किया था लेकिन अभी तक कोई लाभ नहीं मिला।

हमारे साथ ऐसा व्यवहार क्यों

इसी संस्थान की मीडिया स्टडीज की स्टूडेंट जोहरा शमीम कहती हैं, मैंने मार्च 2021 में आवेदन किया था। सितंबर में जानकारी ली गई तो हमें फॉर्म को रिजेक्ट करने की जानकारी दी गई। बताया गया कि वोकेशनल कोर्स को ऐसी सुविधा नहीं है। एक और छात्रा प्रगति कहती हैं, मैंने 2020 में ही फॉर्म भरा था। इसी साल दशहरे के पहले बताया गया कि फॉर्म कैंसिल कर दिया गया है। कारण वोकेशनल कोर्स बताया गया जबकि हमारे सीनियर बैच को राशि मिली थी।

(प्रगति का भी आवेदन रिजेक्ट हो चुका है)

साल 2018-19 में मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत ₹300 करोड़ की राशि राजकीय बजट में रखी गयी थी। हालांकि इस साल इसके बजट में कटौती की गयी है और इसका बजट ₹200 करोड़ ही रखा गया है। इस योजना के तहत बच्ची के जन्म पर ₹2 हज़ार, एक साल का होने पर ₹1 हज़ार, बच्ची का टीकाकरण कराने पर ₹2 हज़ार, सैनेटरी नैपकिन के लिए ₹300, 12वीं पास करने के लिए ₹25 हज़ार और स्नातक के बाद ₹50 हज़ार देने का प्रावधान है।

इससे पहले पिछले साल दिसंबर माह में सरकार द्वारा यह जानकारी दी गई थी कि मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत 2021-22 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने वाली अविवाहित छात्राओं को प्रोत्साहन राशि के तौर पर 25 हजार रुपये सरकार देगी। यह राशि सीधा छात्राओं के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाएगी। वहीं 9वीं और 10वीं के सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के बीच छात्रवृति बांटी जाएगी। इसके लिए 30 करोड़ रुपये जारी की गयी है। छात्रवृति वैसे छात्र-छात्राओं को दी जाएगी इनकी वार्षिक पारिवारिक आय डेढ़ लाख से भी कम है। बिहार में ऐसे छात्रों की संख्या एक लाख 66 हजार 445 है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए यह राशि जारी की गयी है। इस राशि का भुगतान समय पर नहीं हुआ था।

मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना (स्नातक) में अभी तक 215560 छात्राओं ने आवेदन किया है जिसके लिए बिहार सरकार को  5,389,000,000 की राशि छात्राओं के बैंक खाते में भेजनी है। लेकिन अभी तक केवल 1,274,375,000 ही भेजे गए हैं. यानी बिहार सरकार ने पिछले 2 सालों में कन्या उत्थान योजना के तहत अपने टारगेट का लगभग 22% राशि ही छात्राओं को भेजी है।

कन्या उत्थान योजना की राशि के आवंटन में देरी की वजह जानने के लिए डेमोक्रेटिक चरखा ने Director of Higher Education से भी बात की. विभाग के अनुसार

जो राशि मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत ₹200 करोड़ की राशि आवंटित हुई है, इसमें से ₹30 करोड़ की राशि भेजी जा चुकी है। देरी से ही सही सभी के पास राशि पहुंच जायेगी अभी विभाग ₹36 करोड़ और आवंटित करने की तैयारी कर रहा है विभाग की कोशिश रहेगी कि जल्द से जल्द सबके पास राशि पहुंच जाए

मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना की राशि नहीं मिलने की वजह से कई लड़कियों की पढ़ाई हमेशा के लिए रुक गयी है। लेकिन सवाल ये है कि तय समय पर राशि नहीं मिलने के कारण क्या मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना की राशि का मकसद पूरा हो रहा है? जब पढ़ाई के समय ये राशि नहीं मिल रही है तो ऐसे समय में मुख्यमंत्री की इस योजना से किसका उत्थान होगा?

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