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बिहार में बढ़ी बेरोज़गारी दर, CMIE ने बताया ग्रामीण इलाकों की बेरोज़गारी

सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इंकॉनमी (CMIE) द्वारा हर महीने देश और राज्यों में व्याप्त बेरोज़गारी दर को दर्शाया जाता है. हाल ही में जारी रिपोर्ट ने एक बार फिर बिहार के लिए चिंता बढ़ा दी है. इस रिपोर्ट के अनुसार बिहार में बेरोज़गारी देश की बेरोज़गारी से दोगुना है. साथ ही बिहार के पड़ोसी राज्यों में केवल झारखंड 16.5 फ़ीसद को छोड़कर अन्य दो राज्यों से ज़्यादा बेरोज़गारी दर है. उत्तर प्रदेश में 4.2प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 4.8प्रतिशत बेरोज़गारी दर है.

सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इंकॉनमी (CMIE) के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश व्यास पिछले छह साल से बेरोज़गारी के आंकड़े सामने ला रहें हैं. उनके कारण अब इन आंकड़ों पर बात होने लगी है.

बेरोज़गारी दर बढ़ने का कारण सत्ता का लालच है, ये कहना है बीपीएससी और बिहार एसआई की तैयारी कर रहे छात्र ऋषिकेश कुमार का. ऋषिकेश कहते हैं

मेरा एयरफोर्स और नेवी में जाने का मन था लेकिन उम्र सीमा ख़त्म हो जाने के कारण अब वहां मेरा चयन नहीं हो सकता है. अब एसआई की बहाली अप्रैल-मई महीने में आने वाली थी. लेकिन सरकार जानबूझ कर इसे अभी तक नहीं निकाला गया है. सरकार नौकरी बहाली को अपने राजनीतिक हित के लिए इस्तेमाल करती है. अभी सरकार बनाने से पहले तेजस्वी यादव ने 10 लाख नौकरी का वादा उसी एजेंडे के तहत किया था.” 

हालांकि आंकड़ों की मानें तो बिहार में अक्टूबर के मुकाबले जून के महीने में बेरोज़गारी ज़्यादा था. जुलाई में बेरोज़गारी 18.8 फ़ीसदी था. लेकिन अगले दो महीनों में इसमें गिरावट दर्ज की गयी. अगस्त में 12.8 फ़ीसद और  सितम्बर में 11.4 फ़ीसदी रहे बेरोज़गारी में 3.1 प्रतिशत की वृद्धि की गयी और यह 14.5 फ़ीसद हो गया.

वहीं अप्रैल में जहां 21.2 प्रतिशत बेरोज़गारी थी तो वही मई में यह घटकर 13.3प्रतिशत पर आ गयी थी.

ऋषिकेश कुमार आगे बताते हैं

“ग्रेजुएशन पास किए चार साल हो चुके हैं. कोरोना के कारण मेरे जैसे कितने ही छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है. कोरोंना के कारण हमारे दो साल बर्बाद हो गए. जब वैकेंसी आया तो फॉर्म भरने का उम्र ही ख़त्म हो गया था. और सरकार ने छात्रों को उम्र सीमा में भी कोई राहत नहीं दिया गया.”

सेंटर फॉर मॉनिट्रिंग इंडियन इकॉनमी की तरफ़ से जारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2021 के महीने में बेरोज़गारी का आंकड़ा 16% पार कर गया था लेकिन जनवरी में 13.3% और फरवरी में 13.9% के आंकड़े ने थोड़ी राहत दी थी. 31मार्च को समाप्त हुए वित्त वर्ष में सबसे ज़्यादा डराने वाले आंकड़ें दिसंबर 2021 के ही थे. जिसका कारण मुख्य रूप से कोरोना के कारण रोज़गार में आई गिरावट को दिया जा सकता था.

सितंबर के मुकाबले बढ़ते आंकड़े

वहीं देश में बेरोज़गारी अक्टूबर के महीने में बढ़कर 7.8% पर पहुंच गया है. इसके अलावा, श्रम भागीदारी दर (एलपीआर) में मामूली गिरावट से भी बेरोज़गारी में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.जबकि सितंबर में बेरोज़गारी चार साल में सबसे कम 6.43% दर्ज किया गया था.

अगर इन आंकड़ों की तुलना पिछले साल के आंकड़ों से करें,तब भी बेरोज़गारी में बढ़ोतरी देखने को मिली है. अक्टूबर 2021 में बेरोज़गारी दर 7.7% रहा था. वहीं अक्टूबर 2020 में बेरोज़गारी दर 7% दर्ज किया गया था. ये आंकड़े दिखाते हैं कि साल दर साल बेरोज़गारी दर में बढ़ोतरी हो रहा है.

ग्रामीण इलाकों में बढ़ी बेरोज़गारी

ग्रामीण इलाकों में रोज़गार घटना भी बेरोज़गारी दर को बढ़ाने का कारक बना है. ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोज़गारी दर शहरों से ज़्यादा है. ग्रामीण इलाके में अक्टूबर महीने बेरोज़गारी दर बढ़कर 8.4% हो गया है और शहरी क्षेत्रों में 7.21% रहा. जबकि सितंबर में ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोज़गारी दर  5.84% रहा था.

आंकड़ों के मुताबिक,कृषि क्षेत्र में काम करने वालों की संख्या नवंबर, 2021 में 16.4करोड़ थी. इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट आती गई और इस साल सितंबर में यह संख्या घटकर 13.4 करोड़ रह गई. हालांकि,अक्टूबर में कृषि क्षेत्र में रोज़गार की संख्या बढ़कर 13.96 करोड़ पहुंच गई. इसके बावजूद पिछले चार साल में अक्टूबर में खेती से जुड़े कामगारों की संख्या सबसे कम है.

नालंदा जिला के नारी गांव के रहने वाला मनीष कुमार 24 साल का है. मनीष दसवीं से आगे पढ़ाई नहीं कर सका है. इसलिए गांव में रहकर ही दूसरों के खेतों में खेती किसानी का काम करता है. लेकिन इस साल समय पर बरसात नहीं होने के कारण गांव में बहुत से किसानों ने अपने खेत खाली छोड़ दिए थें . जिसके कारण मनीष जैसे मज़दूर जो दूसरों के खेतो में काम करके रोज़गार पाते हैं उन्हें काम नहीं मिल पाया.

मनीष डेमोक्रेटिक चरखा से बात करते हुए बताते हैं

“हम गांव में रहकर ही काम करना चाहते हैं. मेरे उम्र के कितने साथी बाहर जाकर कमा रहे हैं. लेकिन मेरे जैसे कुछ लड़के जो गांव में ही खेतों में काम करके कमाना चाहते हैं उन्हें नुकसान हो रहा है. हमे गांव में काम नहीं मिल पा रहा है. अब सोचता हूं अगले साल गांव से बाहर कमाने चला जाऊं.”

डेमोक्रेटिक चरखा से इस मुद्दे पर बात करते हुए पालीगंज के विधायक संदीप सौरव ने बताया की

 “केंद्र सरकार कि आर्थिक नीति ऐसी है जो केवल अंबानी और अडानी को अमीर बना रहा है. आम आदमी तो 5 हजार की नौकरी के लिए परेशान है. केंद्र के द्वारा सरकारी नौकरी में सीमित अवसर दिए जा रहे हैं. लेकिन मुझे बिहार सरकार पर भरोसा है वह युवाओं को रोजगार देंगे और बेरोजगारी कम करने का प्रयास करेंगे.”  

किस राज्य में कितनी बेरोज़गारी दर

अगर राज्यों की बात की जाए तो मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा रोज़गार देने वाला राज्य है. यहां बेरोज़गारी मात्र 0.8% दर्ज किया गया है. वही उसके छत्तीसगढ़ आता है जहां बेरोज़गारी मात्र 0.9% है. उसके बाद उड़ीसा और गुजरात का स्थान आता है जो क्रमशः 1.1% और 1.7% रहा है.

वहीं पूरे देश में सबसे ज़्यादा बेरोज़गारी हरियाणा 31.8% और राजस्थान जहां 30.7% रहा. जम्मू-कश्मीर की बेरोज़गारी 22.4%, झारखंड और बिहार का बेरोज़गारी दर क्रमशः 16.5% और 14.5% रहा है.

 

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