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CTET: सालों से धरना दे रहे हैं शिक्षक, ना हुई बहाली और ना हुई पूरी कोई मांग

नवंबर से पहले मई महीने में भी शिक्षक अभ्यर्थी नियोजन की मांग को लेकर 22 दिनों तक गर्दनीबाग में CTET अभ्यर्थी धरने पर बैठे थे. जिसके बाद शिक्षा विभाग ने 26 मई को जुलाई के अंत तक विज्ञापन जारी करने से संबंधित शेड्यूल जारी किया था. जिसके बाद अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन समाप्त किया था.

राजधानी पटना लगातार शिक्षक अभ्यर्थियों (CTET Candidates) के प्रदर्शन का गवाह बना हुआ है. सातवें चरण की नियुक्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की मांग को लेकर शिक्षक अभ्यर्थी एक बार फिर 24 दिन से गर्दनीबाग में प्रदर्शन कर रहे हैं. शिक्षक अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार अगर जल्द आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ नही करेगी तो शिक्षक अभ्यर्थी राजभवन मार्च करेंगे.

साल 2014 से CTET, BTET और STET पास शिक्षक अभ्यर्थी एक लंबे समय से बहाली के लिए आंदोलन कर रहे हैं. लेकिन सरकार लगातार इनकी मांगों को नजरअंदाज़ किए हुए हैं. साल 2020 के विधानसभा चुनाव के समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षकों के खाली पद को भरने का वादा किया था. लेकिन ‘चुनावी वादे’ अकसर वादे ही बनकर रह जाते हैं. ऐसा ही शिक्षक पात्रता परीक्षा पास किए हुए अभ्यर्थियों के साथ हुआ. सरकार बनाने के एक साल बाद भी जब शिक्षकों के रिक्त पदों को नहीं भरा गया.

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने भी दिया था आश्वासन

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने मई महीने में चल रहे धरना प्रदर्शन के बाद एक पत्र जारी किया था जिसमें जुलाई महीने के अंतिम सप्ताह में आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ किए जाने का आश्वासन दिया गया था. साथ ही यह भी कहा गया था कि छठे चरण की नियोजन प्रक्रिया में जिन नियोजन इकाईयों में एक बार भी काउंसिलिंग नहीं हुआ है वहां भी जल्द शेड्यूल जारी कर प्रक्रिया शुरू की जायेगी.

वहीं अपर मुख्य सचिव ने शिक्षक अभ्यर्थियों से अपील किया था कि

शिक्षक अभ्यर्थी धरना समाप्त करें और सातवें चरण की बहाली प्रक्रिया का इंतजार करें.

हालांकि जुलाई बीतने के बाद भी जब विज्ञप्ति जारी नहीं किया गया तब 1 अगस्त को एकबार फिर शिक्षक अभ्यर्थी सड़कों पर उतर गए. 22 अगस्त को डाकबंगला चौराहे को अभ्यर्थियों ने चार घंटे के लिए जाम कर दिया था और वहां जमकर प्रदर्शन भी किया था. बाद में शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर के बहुत जल्द विज्ञप्ति जारी करने के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ था.

हालांकि महीनों बीतने के बाद भी जब विज्ञप्ति जारी नहीं किया गया तो शिक्षक अभ्यर्थियों के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं रहा.

CTET अभ्यर्थियों पर क्या बीत रही रही?

बिहार प्रारंभिक युवा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दीपांकर गौरव तथा नितेश पांडेय ने बताया कि

“शिक्षा विभाग ने इसी साल 26 मई को जुलाई के अंत तक विज्ञापन जारी करने से संबंधित शेड्यूल जारी किया था, लेकिन अब तक विज्ञप्ति जारी नहीं हो सकी है. सरकार जान बूझकर टाल मटोल कर रही है. ऐसी परिस्थिति में आन्दोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं है.”

दीपांकर आगे कहते हैं

“अगर सरकार का रवैया यही रहा तो लाखों की संख्या में बेरोज़गार शिक्षक राजभवन मार्च करेंगे. मंगलवार को कैबिनेट का बैठक होने वाला है. उसमें क्या फैसला लिया जाता है उसपर बहुत कुछ निर्भर करता है.”

औरंगाबाद के अनिल कुमार सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहते हैं

“इस सरकार से ज़्यादा भरोसेमंद तो चाय और फुचका बेचने वाला आदमी है जिसके यहां यदि आप आज 20 रूपए जमा कर दें तो अगले दिन भी उसे याद रहता है. लेकिन सरकार के मंत्री और अधिकारी जो बात प्रेस कांफ्रेंस करके बताते हैं उस बात से भी अगले दिन ही पलट जाते हैं. नियोजन प्रक्रिया जुलाई के अंतिम सप्ताह में शुरू करने की बात कही गयी थी लेकिन जुलाई बीते महीनों हो गए लेकिन सरकार को कोई होश नहीं है.”

अनिल कुमार सरकार के रवैए पर अपना गुस्सा ज़ाहिर करते हुए कहते हैं

“सरकार ने जनता का नस पकड़ लिया है. पहले रोजगार के लिए भटकाओं फिर चुनाव के समय नियुक्ति पत्र बांट दों और वोट ले लो. हमारे साथ भी यही किया जा रहा है. 2019 से पात्रता परीक्षा पास करके बैठे हैं लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है. नियोजन प्रक्रिया भी शुरू नहीं किया गया है. दस लाख नौकरी देने का वादा किया गया है. क्या ये वादे चुनावी साल में पूरे किए जाएंगे ताकि वोट बना रहे?”

अनिल आगे कहते हैं

“जनता भी मुर्ख है अपने साथ हुए धोखे और अत्याचार को बहुत जल्दी भूल जाती है. तभी तो थोड़े से लालच में पिछला सब कुछ भूलकर वोट दे देती है. लेकिन इसबार हमने तय किया है अगर चुनाव के नज़दीक जाकर नौकरी दिया भी गया तो इसका लाभ वोट बैंक में नहीं मिलेगा.” 

बिहार में शिक्षक-छात्र अनुपात है गंभीर

शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 35:1 होना चाहिए.

यू-डायस के साल 2019-20 के रिपोर्ट के अनुसार बिहार में प्राथमिक स्कूलों में 60 छात्रों पर केवल एक शिक्षक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 26 छात्रों पर एक शिक्षक मौजूद हैं. वहीं माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 70 छात्रों पर केवल एक शिक्षक मौजूद हैं.

शिक्षक छात्र अनुपात में अंतर पर पटना के रहने शिक्षक पात्रता परीक्षा पास अभिषेक कुमार कहते हैं

“मध्य विद्यालयों को हाई स्कूल में उत्क्रमित तो कर दिया गया. जो स्कूल पहले ही दो या एक शिक्षक के भरोसे चल रहा था. वहां अब हाई स्कूल के बच्चों का भी नामांकन प्रारंभ हो गया. लेकिन वहां शिक्षकों की नियुक्ति की ही नहीं गयी. अब वहां से पास होने वाले बच्चों का भविष्य क्या होगा. क्या सरकार फर्जी डिग्री बांटने की शुरुआत ख़ुद नहीं कर रही? इसमें छात्र और शिक्षक का नहीं बल्कि सरकार का दोष है.”

समग्र शिक्षा योजना के ‘प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड(PAB) 2020-21 के अनुसार, “प्रधान शिक्षक स्तर पर बड़ी संख्या में रिक्तियां चिंता की बात है. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य को उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्कूलों के लिए प्रधान शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्राथमिकता देनी चाहिए.

केंद्र सरकार द्वारा स्कूली शिक्षा के विभिन्न स्तरों के लिए निर्धारित मानदंडों के अनुसार सही छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों को सहायता देने के लिए 2018-19  में ‘समग्र शिक्षा’ योजना शुरू किया गया था.

लोकसभा में दिए गए एक प्रश्न के जवाब के अनुसार, राज्य और समग्र शिक्षा योजना के तहत 2020-21 में बिहार में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की 5.92 लाख रिक्तियां स्वीकृत की गयी. जिसमे से 2.23 लाख पद अभी भी खाली थें.

सरकार ने उसी साल उच्च माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों की 43,000 रिक्तियों को भी मंज़ूरी दिया था, लेकिन उसमे से केवल 11,000 से कुछ ज़्यादा पदों को ही भरा गया. 32 हजार पद अभी भी खाली हैं. साथ ही राज्य के कई ज़िलों में प्रधानाध्यापकों के कई पद अभी भी खाली हैं.

डेमोक्रेटिक चरखा की टीम लगातार बिहार के सरकारी स्कूलों के बदहाली और सरकारी तंत्र की विफ़लता को दिखाते आई है. हमारा प्रयास रहता है कि हमारी रिपोर्ट के कारण संबंधित स्कूल पर सरकारी अधिकारी ध्यान दें. शिक्षक नियुक्ति को लेकर भी हम लगातार रिपोर्ट बना रहे हैं. ताकि बिहार में शिक्षक छात्र अनुपात में सुधार हो और सरकारी स्कूलों में बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके.

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