मामा और माही एक अधूरी ख्वाहिश की पूरी कहानी

जब मैं बचपन में नानी घर आती थी, तब हमेशा ही धोने के घर को देखने की जिद्द किया करती थी. लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि मैं कभी ऐसे सिचुएशन में माही के घर को देखूंगी.

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सौम्या सिन्हा
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माही एक अधूरी ख्वाहिश की पूरी कहानी

मामा और माही एक अधूरी ख्वाहिश

बचपन से आज तक हम सभी गली क्रिकेट खेलते और उसे देखते हुए बड़े हुए हैं. गली क्रिकेट के साथ टीवी पर होने वाले क्रिकेट से कोई अछूता नहीं रहा है. क्रिकेट साम्राज्य को हमारे देश में सबसे ज्यादा प्यार मिलता है. क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों को फिल्म स्टार से भी ज्यादा बड़ा हीरो माना जाता है. मेरे पापा तो अक्सर कहा करते हैं कि असल मायने में यह खिलाड़ी ही हीरो है, बाकी सब तो एक्टिंग है. हालांकि यह सब के मानने के ऊपर है, किसी को क्रिकेट बेतहाशा पसंद आता है, तो कोई बस मनोरंजन के लिए क्रिकेट देखना पसंद करता है. वहीं कई ऐसे भी हैं जिन्हें क्रिकेट पसंद नहीं, लेकिन खिलाड़ियों को देखना पसंद करते हैं. 

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क्रिकेट और मनोरंजन की जिंदगी एक दूसरे से काफी जुड़ी हुई है, क्रिकेट से जुड़े कई लोग फिल्म इंडस्ट्री में अच्छी खासी पहचान रखते हैं. मनोरंजन की यह दुनिया आम लोगों से काफी दूर है, लेकिन क्रिकेटरों से आम लोग काफी जुड़ाव महसूस करते हैं. हालांकि अब क्रिकेटरों की दुनिया भी आम जिंदगी से अलग जिंदगी हो रही है. खिलाड़ियों का रहन-सहन, उठना-बैठना, आस-पड़ोस सब धीरे-धीरे बदल रहा है. मुझे खुद भी क्रिकेट देखना बहुत पसंद है, लेकिन इस क्रिकेट की दुनिया से मेरा उतना ताल्लुक नहीं है. हालांकि मैं मौजूदा समय के सभी क्रिकेटरों को जानती हूं और उनके खेल को देखते हुए भी आई हूं. इसमें सबसे बड़ा नाम हमारे समय में जर्सी नंबर 07 का है. थाला और माही के नाम से मशहूर, क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के फैन हमारे देश में करोड़ों लोग हैं. साउथ में तो माही की पूजा भी की जाती है. झारखंड में जन्में और पले- बढे माही आईपीएल में खेलते भी चेन्नई सुपर किंग्स टीम से हैं. देश के हर घर में एक जबरा धोनी फैन रहता है.

बड़े होते ही अपनी जिद्द छोड़ दी

चूंकि माही मेरे नानी घर रांची का है, इसलिए मुझे भी उसके तरफ थोड़ा झुकाव है. जब मैं बचपन में नानी घर आती थी, तब हमेशा ही धोने के घर को देखने की जिद्द किया करती थी. मुझे लगता था कि उसके घर के बाहर बड़े सिक्योरिटी गार्ड, पुलिस के जवान, बड़ा सुरक्षा घेरा और पता नहीं क्या-क्या लगा होगा. इसलिए मैं मामा से हमेशा जिद्द करती थी कि मुझे माही का घर दिखाए. लेकिन बचपन में यह सपना कभी पूरा नहीं हो पाया, बड़े होते-होते मैंने भी अपनी जिद्द छोड़ दी. अब मैंने मान लिया था कि धोनी के घर को देखना मेरे लिए चांद पर जाने जैसा है.

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खैर एक दिन मैं घर बैठे पढ़ाई कर रही थी, तभी रूम में मां ने आकर कहा कि तुम्हें अपना सामान पैक करना होगा, तुम मेरे साथ नानी घर चल रही हो. सामान पैक करने के दौरान मुझे धीरे-धीरे अंदाजा हो रहा था कि हम कोई छुट्टी नहीं बल्कि किसी सीरियस मामले के लिए रांची जा रहे हैं.

रास्ते में मुझे पता लगा कि मामा को कैंसर है और उनका ऑपरेशन होने वाला है. मेरे पहुंचने के अगले दिन ही उनका 3 घंटे के ऑपरेशन हुआ. ऑपरेशन के अगले दिन पता लगा कि उन्हें अगले दो महीने के लिए बातचीत नहीं करनी है.

तीन दिन बाद मैं मामा को डिस्चार्ज करा कर घर ला रही थी. रास्ते में कुछ सब्जी खरीदने के लिए मैं गाड़ी से उतरी और मामा को अंदर ही बैठाए रखा. हालांकि सब्जी खरीदने के दौरान मेरी नजर मामा पर लगातार टिकी हुई थी. मैं देख रही थी कि वह कागज और पेन लेकर कुछ लिख रहे हैं,  मैं जल्दी-जल्दी सब्जी खरीदकर गाड़ी तक पहुंची ताकि कागज देख सकूं. मैंने गाड़ी में सब्जी रखकर मामा की ओर देखा, मामा थोड़ा सा मुस्कुराए और इशारे में चलने बोला.

मैं उस इलाके से नई थी इसलिए मामा मुझे मुझे डायरेक्शन बताने लगे, इस दौरान दो-तीन बार उन्होंने गाड़ी को स्लो करने कहा और रुक कर खिड़की से बाहर देखने लगे. मैंने उनसे पूछा- क्या  हुआ मामा, आप ठीक है ना? मामा शांत रहे, मैंने उनके कागज में झांकने की कोशिश की तो उसे भी उन्होंने छिपा लिया. चार बार गाड़ी धीमी कराने के बाद आखिर पांचवें जगह पर हम एक लाल रंग के बड़े गेट के बाहर खड़े थे. उस बड़े गेट को मैंने थोड़ा निहारा, लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आया. मैंने आगे पीछे देखा तो भी मुझे कुछ समझ नहीं आया, फिर मैंने मामा की ओर मुड़कर पूछा, तब उन्होंने अपने कागज पर लिखा अक्षर पढ़वाया. उन्होंने कागज पर लिखा था- देख लो तुम्हारे जर्सी नंबर 07 का आशियाना.

इतना पढ़ने के बाद मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. मैं मुड़कर वापस माही के आशियाने को निहारने लगी. इस दौरान मैं यह भी सोच रही थी कि इतने बड़े ऑपरेशन से गुजरने के बाद भी मामा ने मेरे उस छोटे और बहुत पुराने जिद्द को याद रखा था.