अपनी आपबीती, मेरे घर टीवी नहीं था, दूसरे के घर भैया बैड टच करते थे....

अब स्कूलों में गुड टच और बैड टच सिखाते है, इस बात से थोड़ी तस्सली तो मिली है. लेकिन बच्चों को लेकर डर हमेशा बना रहता है. मेरे साथ हुए बैड टच को मैं आजतक नहीं भूल पाई हूं.

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भैया बैड टच करते थे

भैया बैड टच करते थे

मुझे कभी नहीं लगा था कि मेरे घर टीवी नहीं होगा तो इसे मैं खतरे में पड़ जाऊंगी. मैं छोटी ही थी पर थोड़ा बहुत-गलत सही समझती थी. घर पर हम काफी भाई-बहन थे जो एक दूसरे के साथ खेलते रहते थे, लेकिन कभी टीवी देखने का दिल होता था तो पड़ोसी घर चले जाते थे. पड़ोसी घर में हम सब साथ बैठकर रामायण, महाभारत, चंद्रमुखी जैसे सीरियल देखा करते थे. उनका घर छोटा था, इसलिए सब एक ही रूम में जमीन, बिस्तर, खिड़की, कुर्सी जहां जगह मिली बैठ जाया करते थे. हमारे घरवाले भी निश्चिंत थे कि बच्चा बगल में ही गया है. मैं अपने दो बहन, दो भाई के साथ पड़ोसी के घर जाती थी. सभी भाई-बहन मुझसे छोटे थे, मैं बड़ी तो थी मगर बहुत चुलबुली थी. मेरा चुलबुलापन मेरे मोहल्ले में काफी मशहूर था. चुलबुली होने के साथ मेरे अंदर एक असहजता थी, जो मुझे अब खटकती है. 

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जिस समय मैं पड़ोसियों के घर टीवी देखने जाया करती थी उस समय मेरी उम्र 12- 13 साल रही होगी. मुझे उम्र अच्छे से याद नहीं, लेकिन जो उनके घर हुआ वह मुझे आज तक याद है. बगल के घर में दो बड़े भैया, एक हम उम्र लड़का, एक छोटी बहन जैसी लड़की और बहुत लोग रहते थे. यह सभी लोग मेरे घरवालों के बहुत करीब थे, खासकर दोनों बड़े भैया. उन दोनों भैया पर सब आंख बंद कर विश्वास करते थे. लेकिन मुझे पड़ोसी के घर में भरे लोगों के बीच में भी बैड टच किया जाता था. ऐसा मेरे साथ सिर्फ एक दिन नहीं हुआ, बल्कि मैं इससे महीनों तक जूझती रही.

भैया ने टीवी देखते हुए मेरे कंधे पर हाथ रखा

मैं बगल के घर में बिस्तर पर बैठकर टीवी देखा करती थी, हालांकि कुछ लोग जमीन पर भी बैठते थे. गर्मी के दौरान सब ने छोटे और ढीले-ढाले कपड़े पहने थे, मैंने भी स्कर्ट पहन रखी थी, लेकिन वह मेरे घुटने के नीचे थी (यह बताना जरुरी है नहीं तो समाज कहेगा मेरे छोटे पैरों ने लड़के को बहकाया होगा). टीवी देखने के दौरान मेरे कंधे पर छोटे भैया ने हाथ रख दिया, मैंने उतना नहीं सोचा क्योंकि मैं उनके घर से बहुत-घुल मिल गई थी. थोड़ी देर बाद वह अपना हाथ मेरे पीठ पर सहलाने लगे. मैं थोड़ी असहज हो गई और उनकी तरफ देखने लगी, वह मुस्कुराए और बोले टीवी देखो. अगले दिन फिर से उन्होंने ऐसा किया और इसबार अपने हाथ को मेरे कपड़े में डालने लगे, मैंने उन्हें झटका और दूर बैठ गई. वह थोड़ी देर बाद मेरे पास आकर बैठ गए और मेरे हाथों से अपने आप को टच कराने लगे. इससे मैं बहुत डर गई, मेरा शरीर गर्म हो चुका था, मैं डरकर बहाने से घर चली गई. अगले दिन मैं टीवी देखने नहीं जाना चाहती थी, इसलिए मैं घर में ही ड्राइंग करने लगी. वह छोटे भैया घर तक आ गए और मुझे अपने घर ले गए. मैं इसबार अपने भाई-बहनों के साथ नीचे बैठकर टीवी देखने लगी. ऐसा मैं रोज करने लगी, मैं रोज जाती, जमीन पर बैठकर ही टीवी देखती और चली जाती. लेकिन अब उन्होंने आते-जाते हुए मुझे छूना शुरु कर दिया, कभी वह मेरी छाती पर हाथ रखते, तो कभी कमर पर हाथ रखते. मैं इस सबसे परेशान हो गई थी, मगर घर पर बोलने से बहुत डरती थी. इसलिए मैंने उनके घर जाना बंद कर दिया.

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एक दिन मेरे घर पर उन्होंने मुझसे कहा कि अब टीवी देखने नहीं आती, बहुत बड़ी हो गई हो? किसी को बताया तो नहीं? मैं उनके सवालों से बहुत डर गई और घरवालों से जिद्द कर घर में टीवी लगवाया.

उस समय मुझे उनके नियत का कुछ अंदाजा नहीं था. घर वालों ने भी कभी गुड टच और बैड टच नहीं बताया और हमारे स्कूल में तो उस समय यह सिखाया ही नहीं जाता था. मैं मां के करीब तो थी, लेकिन बताने में बहुत असहज थी. आज मेरी शादी हो चुकी है, लेकिन आज तक मैंने उस जिद्द के पीछे की बात किसी से नहीं कही. उस बैड टच वाले भैया की भी शादी हो गई है, लेकिन उनकी आंखों में कहीं भी शर्मिंदगी और पछतावा नहीं है.

हालांकि अब इस बात से थोड़ी तस्सली तो मिलती है कि स्कूलों में गुड टच और बैड टच सिखाते है, लेकिन बच्चों को लेकर डर हमेशा बना रहता है.

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