केंद्र सरकार मतलबी दोस्त की तरह, राम मंदिर भी इसी का नतीजा!

राम मंदिर के अलावा इस तक पहुंचाने के लिए भी जिस रास्ते का निर्माण कराया गया उसे बहुत बारीकी से सजाया गया है. जिसमें हजारों लाइट्स, प्रोजेक्टर लाइट्स, पेंटिंग्स, कलाकृतियां, मूर्तियां, पेड़-पौधे इत्यादि लगाए गए हैं.

सभी के पास एक ऐसा दोस्त जरूर होता है जो सिर्फ मतलब के समय सामने आता है. काम निकलने के बाद वह दोस्त अंतर्ध्यान हो जाता है. अगर आपके पास ऐसा दोस्त नहीं भी है तो चिंता की बात नहीं है, हमारी सरकार हमारे लिए ऐसे मतलबी दोस्त का रोल अदा करती है. यह बात कोई नहीं नहीं है और ना ही किसी से छपी है कि जब सरकार को अपने लिए वोट की जरूरत होती है तब वह जनता के सामने बड़े दावे करती है, जनता के लिए कई महान प्रोजेक्ट्स और करोड़ों रुपए की सौगात लेकर आती है. जनता खुश होकर धर्म, जाति, रोजगार, शिक्षा, कानून, अपराध नियंत्रण के नाम पर वोट दे देती है. लेकिन इस वोट बैंक को बटोरने के लिए सरकार ने जो वादे चुनावी मौसम में किए थे, वह कुदरती मौसम में एक के बाद एक अपनी परते छोड़ने लगते हैं.

मौजूदा समय में राम मंदिर की चर्चा करते हैं. राम मंदिर को मोदी सरकार ने अपने चुनावी मेनिफेस्टो में शामिल किया था. सरकार ने इस चुनावी वादे को पूरा भी किया. इसी साल जनवरी में भव्य राम मंदिर का निर्माण उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ. इसके प्राण प्रतिष्ठा समारोह में खुद देश के मुखिया शामिल होने पहुंचे थे. हालांकि उनके इस समारोह में शामिल होने को लेकर भी कई पंडित, धर्मगुरु और विपक्ष तक ने सवाल उठाए थे. मगर मुखिया की लाठी में इतना दम है कि वह अपने मनचाहे काम को कर सकता है. प्राण प्रतिष्ठा पूरी हुई, राम मंदिर बनकर तैयार हुआ और इसकी भव्यता की चर्चा हर तरफ होने लगी. राम मंदिर के अलावा इस तक पहुंचाने के लिए भी जिस रास्ते का निर्माण कराया गया उसे बहुत बारीकी से सजाया गया है. जिसमें हजारों लाइट्स, प्रोजेक्टर लाइट्स, पेंटिंग्स, कलाकृतियां, मूर्तियां, पेड़-पौधे इत्यादि लगाए गए हैं. अयोध्या नगरी पहुंचने पर लोगों को वास्तव में रामनगरी का एहसास हो इसके लिए योगी सरकार ने खूब काम किया.

लेकिन चुनावी मौसम खत्म हो चुका है, केंद्र में फिर वहीं सरकार बनी है और अब राम मंदिर के ढोल का शोर कम हो रहा है. मगर समय-समय पर इसके काम की भी परते खुल रही हैं. राम मंदिर के पथ में लगी हजारों लाइट्स में से कई चोरी हो गई है, जिनकी कीमत 50 लाख रुपए बताई जा रही है. अयोध्या के राम पथ और भक्ति पथ से लाखों की चोरी ने राम भक्तों के साथ अंध भक्तों की भी नींद उड़ा दी है. 3800 बैंबू और 96 गोबो प्रोजेक्टर लाइट को कड़ी सुरक्षा के बीच सफाई से उड़ा लिया गया है.
भक्ति पथ 800 मीटर लंबा है जहां 12 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. और 13 किलोमीटर में फैला राम पथ 25 हाई रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरा से लैस है, जिससे हाथों की लकीर भी पढ़ी जा सकती है. काश इससे सरकार की नियत भी पढ़ी जा सकती.

खैर इनके अलावा यहां ट्रैफिक, सिविल और PAC के करीब 1000 जवान 50-50 मीटर की दूरी पर तैनात रहते हैं. इस चोरी पर कमिश्नर ने बंदरों के सर पर ठीकरा फोड़ दिया है. उनका कहना है कि इतनी टाइट सिक्योरिटी के बीच चोरी नहीं हो सकती.

अयोध्या में 71 करोड़ 86 लाख रुपए के लागत से लगे इन लाइट्स पर स्थानीय पार्षदों ने भी सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि जो लाइट लगाई गई हैं वह कभी जलती है तो कभी नहीं वही. कई पोल टूट कर गिर चुके हैं. यह इल्जाम सपा-भाजपा पार्षदों ने लगाया था. मगर उस वक्त कहा गया कि यह अयोध्या को बदनाम करने की साजिश है.

मगर इसके पहले जून में बारिश के दौरान अयोध्या मंदिर की छत से पानी टपकने की घटना हुई थी. इसके बाद पहली बारिश में रामपथ की सड़के धंस गई थी. हड़बड़ी में तैयार हुई इस सड़क को भी क्या बंदरों ने तोड़ दिया होगा या शायद यह योगी मॉडल होगा. इस साल भी मोदी सरकार ने अपने संकल्प पत्र में अयोध्या राम मंदिर को शामिल करते हुए उसके विकास को शामिल किया है. जिसका इस्तेमाल सरकार चुनाव आने पर ही मतलबी दोस्त की तरह इस्तेमाल करेगी.