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बीएन कॉलेज छात्रावास की फीस अचानक बढ़ाई गयी, कॉलेज के पास नहीं है कोई फंड

“हमारा हॉस्टल ऐसा है कि यहां सेकेंड फ्लोर पर बाढ़ आ जाता है. आपने अभी तक ग्राउंड फ्लोर और दियर में बाढ़ सुने होंगे पर यहां तो दूसरे तल्ले पर बाढ़ आ जाता है”

ये कहना है बीएन कॉलेज छात्रावास में रहने शुभाशीष शुक्ला का. शुभाशीष मैथ्स आनर्स तीसरे वर्ष के छात्र हैं.

शुभाशीष आगे कहते हैं कि

“हॉस्टल की हालत इतनी ख़राब है कि कॉलेज प्रशासन को चाहिए कि वो बच्चों को 200 सौ रुपया दे और कहे कि यहां रहों. लेकिन इतनी खराब हालत में भी हम यहां रहते हैं तो समझिये की हमारी भी मजबूरी है. यहां मेस का भी सुविधा नहीं है. बाहर होटल में खाते है. महीने का 4 से 5 हज़ार रुपया तो उसमे चला जाता है. अभी डेंगू बढ़ा हुआ है. यहां चारो तरफ़ गंदगी और पानी है. हमलोग अपना जीवन खतरा में डालकर यहां रहते हैं” 

इसी विश्विद्यालय के अन्य छात्रावास में इतने ही पैसे में यहाँ से बेहतर सुविधाएं दी जा रही है. लेकिन हमारे कॉलेज के प्राचार्य साजिश के तहत हम गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित करना चाहते हैं.

पटना विश्वविद्यालय  के बीएन कॉलेज में हॉस्टल फीस बढ़ाए बढ़ाए जाने का छात्रावास के छात्रों ने करा विरोध किया है. कॉलेज प्रशासन की ओर से वार्षिक छात्रावास शुल्क में एकाएक बढ़ोतरी कर 2760 से सीधे 13,500 रुपए कर दिया गया है. इस वजह से छात्रों में आक्रोश है. छात्रों के हंगामें के बाद कॉलेज प्रशासन ने छात्रावास का शुल्क घटाने का आश्वासन तो दिया, मगर अभी तक फैसला वापस नहीं लिया है. वहीं छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के विरोध में  साइंस ब्लॉक और मुख्य परीक्षा हॉल में काफी देर तक हंगामा किया. कक्षाओं को भी बाधित कर दिया.

कुछ दिन पहले बीएन कॉलेज के प्राचार्य के सामने हॉस्टल छात्रों की ओर से छात्रावास में आधारभूत सुविधाए मुहैया कराने की मांग की गई थी. इसके बाद कॉलेज की ओर से प्राचार्य, शिक्षकों और छात्रावास अधीक्षक के साथ बैठक करके हॉस्टल में सुविधा बढ़ाए जाने को लेकर फीस में इजाफा करने का फैसला लिया गया. छात्रों ने हॉस्टल में माली, स्वीपर, वार्ड सर्वेंट और स्वच्छ पानी की मांग की थी. इन्हीं सुविधाओं को बढ़ाने के लिए शुल्क वृद्धि का फैसला किया गया.

लेकिन छात्र फीस में हुई इस वृद्धि से नाराज हो गये. उनका कहना है कि सुविधा बढ़ाने के नाम पर इतनी फीस वृद्धि करना कहीं से भी उचित नही है. चुकी इस कॉलेज में गांव के गरीब बच्चे पढने आते हैं. किसान के गरीब बच्चे इतनी फीस कहां से देंगे?

राजनीतिक शास्त्र तीसरे वर्ष के छात्र धनंजय का कहना है कि

“हम गांव से यहां पढ़ने आये हैं. हमारे पिताजी किसान हैं और उनके पास इतने पैसे नहीं है कि हमे महंगे हॉस्टल या रूम में रखें. इसलिए इस जर्जर हॉस्टल में रहते हैं. यहां न सफ़ाई है, न सुविधा है और न ही सुरक्षा है. फिर भी हम इसका पैसा देते हैं. हमने प्रशासन से पानी, शौचालय, कैंटीन, लाइब्रेरी, खेल-कूद जैसी सुविधाए देने का आग्रह किया. लेकिन थोड़ी सी मानवीय सुविधा मांगने पर हमारे ऊपर इतना बोझ डाल दिया गया है”

जूलॉजी सेकंड ईयर के छात्र दिव्यांशु सिंह का कहना है कि फीस वृद्धि को लेकर जब हम विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगने गये तो पता चला कि उन्हें इस बात कि जानकारी नहीं है. प्राचार्य द्वारा तानशाही रवैया अपनाया जा रहा है. 2700 सौ से सीधे 13 हजार 500 रूपए फीस कर दिया गया है. किसान का बच्चा इतना पैसा कहां से देगा. अगर इतना पैसा रहता तो बाहर के हॉस्टल में रह लेते, जहां सुविधा तो मिलता.

वहीं कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राजकिशोर प्रसाद ने कहा कि

“छात्रों की मांग थी कि हॉस्टल में सुविधाएं बढाई जाए. ऐसे भी छात्रावास में माली, स्वीपर, वार्ड सर्वेंट नहीं हैं जिसके कारण हॉस्टल कि स्थिति जर्जर हो चुकी है. कॉलेज पर बिजली बिल एक करोड़ 49 लाख से अधिक रुपए का बकाया है. सरकार की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि बिजली बिल के लिए सरकार सहयोग नहीं करेगा. कर्मचारी रिटायर हो चुके है और बहाली होता नहीं है”

प्रिंसिपल आगे बताते हैं

“बिहार सरकार का निर्देश है कि आउट सोर्सिंग के माध्यम से काम कराया जाए और पटना विश्वविद्यालय का निर्देश है कि इसका भुगतान इंटरनल रिसोर्स (आंतरिक संसाधन) द्वारा किया जाए. ऐसे में हमने हिसाब लगाया कि कम से कम रूपए में कैसे सुविधाएं मुहैया कराया जाए. आउट सोर्स कर्मचारी, और बिजली का खर्च मिलाकर साल में हमे 13 लाख 500 रूपए करीब खर्च आता है. ऐसे में साल में 100 छात्रों का 13 हजार 500 रूपए ख़र्च आता है और महीने का 1082 रुपए पड़ता है. इतनी सी वृद्धि के बाद यदि हॉस्टल में कुछ सुविधाए बढ़ा दी जाती हैं तो इससे बेहतर क्या होगा?”

अचानक हॉस्टल फी में वृद्धि होना छात्रहित में नही है और इससे छात्रों पर बुरा असर परेगा. इसके जवाब में प्राचार्य का कहना है कि, मैंने कोई भी फैसला वैक्तिगत रूप से नही लिया है. वार्डन, हॉस्टल सुपरिटेंडेट, असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट के सामूहिक बैठक में फ़ैसला लिया गया है. साथ ही हॉस्टल कि स्थिति अच्छी नही है. छात्रावास में गंदगी बढ़ गया है. जिससे बीमारी फैलेगी और छात्र बीमार होंगे, उनकी पढाई छुटेगी. छात्रों ने सुविधा कि मांग कि थी और प्राचार्य होने के नाते मैं अपने छात्रों का हित चाहता हूं.”

वहीं प्राचार्य का आरोप का है फीस वृद्धि का विरोध ज्यादातर अवैध तरीके से रह रहे छात्र कर रहे हैं. नियमित छात्र तो इस हंगामे में बहुत कम है. कुछ परेशानी हैं तो छात्र को आकर हमसे बात करनी चाहिए. बिना शुल्क लिए सुविधा देने की स्थिति में कॉलेज नहीं है.

कॉलेज प्राचार्य द्वारा फीस वृद्धि का एक कारण कर्मचारियों कि कमी बताया गया है लेकिन छात्रों का आरोप है कि कर्मचारियों का दुरूपयोग किया जा रहा है. कर्मचारियों का उपयोग निजी सेवा में लिया जा रहा है. 

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