पटना यूनिवर्सिटी में लाखों में बढ़ी B.Ed फ़ीस , कैसे पढ़ेंगे गरीब वर्ग के छात्र?

शशिकांत कुमार बिहार के गया ज़िले के रहने वाले हैं। बचपन से उन्हें शिक्षक बनना था। इसलिए उन्होंने B.Ed करने का सोचा। शशिकांत एक गरीब वर्गी परिवार से आते हैं और अपनी पढ़ाई करने के लिए उन्होंने ट्यूशन पढ़ा कर फ़ीस जमा की। B.Ed की फ़ीस बढ़ने के सवाल पर शशिकांत बताते हैं

हम कभी भी इस बढ़ी हुई फ़ीस में पढ़ाई नहीं कर पायेंगे। सरकार और विश्वविद्यालय की नियत भी यही है कि आम जनता के बच्चे पढ़ाई ना करें और सरकारी संस्थाओं को ध्वस्त करके इसका निजीकरण कर दें।

(ट्यूशन पढ़ा कर घर चलाते शशिकांत)

बेहतर शिक्षा देना सरकार का काम है। इसके लिए सरकारी स्तर पर लगातार प्रयास भी किए जाते हैं। छात्रों का भविष्य कैसे बेहतर हो, इसके लिए सरकार नये-नये कोर्स भी लाती है ताकि उसकी स्टडी कर के छात्र अपने भविष्य को गढ़ सके। छात्रों के बीच में B.Ed एक ऐसा कोर्स रहा है, जो हमेशा से ही लोगों को आकर्षित करता रहा है। पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले पटना यूनिवर्सिटी में इन दिनों इसी कोर्स को लेकर बवाल मचा हुआ है। कारण, B.Ed. की फीस में अप्रत्याशित तौर पर की गई वृद्धि। छात्रों का कहना है कि फीस में वृद्धि सैकड़े में हो सकती है लाख में नहीं। जबकि जानकारों की माने तो पीयू ने अपने बजट घाटे को संतुलित करने के लिए फीस में वृद्धि किया है।

(आंदोलन करते पटना यूनिवर्सिटी के छात्र)

बजट का घाटा बना फांस

जानकारों की माने तो, फीस को बढ़ाने को लेकर किए गए फैसले में विवि के बजट में नुकसान की बात शामिल है। जानकारों के अनुसार गत दिनों पहले विश्वविद्यालय में सीनेट की बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें बजट पास किया गया था। इसमें 525 करोड रूपये घाटे का बजट पास किया गया तथा यह सामने आया कि इस घाटे को पूरा करने के लिए B.Ed की फीस में वृद्धि की जाए। सीनेट की बैठक से पहले सिंडिकेट के बैठक में यह निर्णय ले लिया गया था कि B.Ed की फीस की वृद्धि की जाएगी।


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पहले कहा मिसप्रिंट हो गया

बता दें कि B.Ed के लिए अबतक केवल 1800 रूपये फीस के रूप में लिए जा रहे थे। जिसे बढा कर डेढ़ लाख रूपये कर दिया गया था। विवि द्वारा इस निर्णय को लिए जाने के बाद छात्रों ने जोरदार तरीके से अपना प्रतिरोध जताया और B.Ed एवं नए सत्र में सेमेस्टर सिस्टम लागू करके फीस बढ़ोतरी करने समेत विश्वविद्यालय के अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर जोरदार हंगामा किया। छात्रों ने सीनेट की बैठक के खिलाफ संयुक्त छात्र संगठनों का पटना विश्वविद्यालय शताब्दी द्वार पर प्रदर्शन किया था। विवि के छात्र व सामाजिक कार्यों में रूचि रखने वाले तौसिक कहते हैं,

प्रदर्शन करने के बाद जब हमारी बात विवि तक पहुंची तो ऐसी बातें कही गई जिसे प्रकार से भी तार्किक नहीं कहा जा सकता है। वह कहते हैं, विश्वविद्यालय स्तर पर हमें यह जानकारी दी गई कि फीस वृद्धि को लेकर मानवीय भूल हो गई थी और यह मिसप्रिंट हो गया था। अब भी बीएड की फीस 25 हजार रूपये रखी गई है, जो आम छात्रों के लिए बड़ी रकम है।

(डेमोक्रेटिक चरखा से बात करते तौसिक)

अनुचित है वृद्धि

एक और छात्र सैफ बताते हैं, दरअसल फीस वृद्धि के नाम पर मोटी फीस वसूली जा रही है। अगर विवि को नुकसान हो रहा है तो उसे पूरा करने के लिए राज्य सरकार से मांग करनी चाहिए, न कि छात्रों की जेब पर डाका डालना चाहिए। इस तरह से पुराने फीस में करीब 40 प्रतिशत तक की वृद्धि कहां तक उचित है। वह बताते हैं, इससे पहले 2015 में भी B.Ed फीस की वृद्धि की गई थी और तब इसे 95 हजार रूपये कर दिया गया था। जब विभिन्न छात्र संगठनों ने इसे लेकर हंगामा किया तो पीयू ने दुबारा इस फीस को 1800 रूपये कर दिया।

तुरंत वापस हो ऐसे कदम

प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रोफेसर नवल किशोर चौधरी कहते हैं,

इस तरह के कदम को उठाने से छात्रों को ही परेशानी होगी। यह बडी रकम है। इससे वैसे तबके के लोग शिक्षा से वंचित हो जाएंगे जिनके पास इस फीस को चुकाने की राशि नहीं होगी। कई ऐसे प्राइवेट विश्वविद्यालय हैं, जिनकी फीस एक लाख तक है। वह कहते हैं, ऐसे कदम को देखकर यही अंदाजा लगता है कि यह आम लोगों को शिक्षा से वंचित करने की योजना है। शिक्षा को बाजार न बनाया जाए। इससे समाज को ही नुकसान होगा। कई प्रतिभाएं असमय ही बर्बाद हो जाएंगी। फीस वृद्धि को लेकर विवि प्रशासन को गंभीरता से सोचने की जरूरत है।

(शिक्षाविद प्रो. नवल किशोर चौधरी)

ये सारी बातें निराधार है

इस पूरे मामले पर पीयू के डीन स्टूडेंट वेलफेयर अनिल कुमार कहते हैं,

बीएड की फीस डेढ लाख रूपये होगी, यह कभी हुआ ही नहीं। किसी सूचना के माध्यम से छात्रों के बीच में यह बात फैल गई, जिससे भ्रम फैल गया। कुछ वक्त पहले सरकार के रेगुलेशन में बदलाव किया गया। कुछ यूनिवर्सिटी में बीएड फीस को लेकर बदलाव किया गया। कुछ यूनिवर्सिटी, सरकारी संस्थानों में 25 हजार में बीएड कोर्स को कराया जा रहा था लेकिन पीयू में यह 1800 रूपये ही था।

(DSW प्रो. अनिल कुमार)

पटना हाइकोर्ट में मामला गया तो कुछ बिंदुओं पर सुनवाई के बाद यह तय हुआ कि प्राइवेट स्तर पर बीएड कोर्स के लिए डेढ लाख रूपये तक फीस हो सकता है। सरकार की रेट को ही इंप्लीमेंट करने की बात हो रही है। बढी हुई फीस को लेकर चांसलर के पास प्रस्तावना को भेजा गया है। वहां से सूचना मिलने पर बीएड की फीस दो साल की 25 हजार रूपये की जाएगी। जहां तक सीनेट की बैठक में यूनिवर्सिटी में घाटा होेने व डेढ लाख रूपये बीएड की फीस करने की चर्चा होने की बात है। यह निराधार है।

पटना यूनिवर्सिटी प्रशासन काफ़ी दिनों से B.Ed की फ़ीस बढ़ाने की बात और कोशिश कर रहा है। लेकिन अगर सरकारी संस्थाओं की फ़ीस अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दी जायेगी तो फिर गरीब और मध्यम वर्गीय बच्चों की पढ़ाई का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।

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