असम में बाढ़ लेकिन मीडिया को टीआरपी के लिए हिन्दू-मुस्लिम ही करना है

ब्रह्मपुत्र का क्रोध थमने का नाम नहीं ले रहा है असम में 45 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। 70 की जान जा चुकी है और बाढ़ के साथ आई समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

ऐसा महसूस होने लगा है कि साल 2020 वास्तविक में सरवाइव ऑल ऑफ द फिटेस्ट पर किसी लेबोरेटरी में किया जा रहा है एक प्रयोग है। एक के बाद एक कई प्राकृतिक एवं अप्राकृतिक आपदा मनुष्य को चुनौती देने के लिए उत्पन्न हो जा रही है। ऐसा लग रहा है कि मनुष्य जीवन का केवल एक ही अर्थ है  किसी भी तरह जिंदा रहना।

जहां एक तरफ संपूर्ण हिंदुस्तान कोरोनावायरस से  लड़ रहा है वहीं दूसरी ओर बिहार और असम में बाढ़ की समस्या भी उत्पन्न हो गई है और लोगों में हताश फैल गया है। बिहार में तो अभी यह इतनी बड़ी विपदा का रूप नहीं धारण कि है जितना कि इस समय यह असम में धारण कर चुका है।

27 मई को हुई वर्षा के बाद ब्रह्मपुत्र का पानी उफान पर है। जिसकी वजह से असम के 30 जिलों में बाढ़ आ चुकी है 45 लाख लोग पूरे राज्य में इस विपदा का शिकार बन चुके हैं। असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ए.एस.डी.एम.ए के अनुसार 70 से अधिक लोगों की मौत इस समय बाढ़ और भूस्खलन के कारण हो चुकी है। कई परिवारों को नाव के ऊपर घर बनाकर के रहना पड़ रहा है।

बाढ़ के कारण संपूर्ण काजीरंगा नेशनल पार्क पानी में डूब चुका है। बाढ़ का कहर जानवरों पर भी पड़ा है और अब तक मिली सूचना के अनुसार 67 जानवरों की मृत्यु हो चुकी है। कुछ जानवर खुद को बेसहारा और बेबस पाकर सड़कों पर हताश होकर भागने लगे हैं।इस बात से काजीरंगा नेशनल पार्क में कई गेंडे अब तक मर चुके हैं वहीं 170 जानवरों को बचाया भी जा चुका है।

 

Kaziranga: Rhinos with their calves standing on an elevated land in the flooded Kaziranga National Park in Assam on Wednesday. PTI

असम पिछले छह सात हफ्तों से बाढ़ ग्रस्त है परंतु मुख्य मीडिया इस बात को नहीं दिखा रहा इस समय वह राजस्थान में हो रहे संग्राम को ज्यादा जरूरी समझता है। अटल बिहारी वाजपेई जी ने कहा था कि सरकारें तो आती-जाती रहेंगी मगर देश बचा रहना चाहिए।

मगर देश कैसे बचेगा जब देश के लोग एक तरफ बाढ़ ग्रस्त है लोगों की जानें जा रही हैं उनके माल और इस बात का नुकसान हो रहा है और देश की सियासत गरमाई जा रही है इस बात को लेकर के कि राजस्थान की कुर्सी पर कौन बैठेगा। जहां एक तरफ सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं वहीं कई एनजीओ और व्यक्ति अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि असम के लोगों की किसी भी तरह से मदद की जा सके।

इंग्लैंड प्रीमियर लीग फुटबॉल टीम आर्सेनल इंस्टाग्राम पर शुक्रवार को असम के लोगों के साथ अपनी एकजुटता दिखाएं।

आर्सेनल के पोस्ट आने के पश्चात लाइफ ऑफ पाई और इंग्लिश विंग्लिश में काम कर चुके अभिनेता आदिल हुसैन ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए कहा कि “सेलिब्रिटीज, मुख्यधारा की मीडिया और भारतीय क्रिकेट स्टार आसाम में आई बाढ़ को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहे हैं।”

असम में पाया जाने वाला तेल भारत का है, असम की चाय भारत की है , मगर असम में आई  यह विपदा भारतीय की विपदा क्यों नहीं है।

अब यह मानने में हमें कैसा संकोच कि हमारी सरकार हैं पूरी तरह से विफल हो चुकी हैं अगर वह विफल नहीं हुई है तो आखिर चंदा किस बात के लिए एकत्रित किया जा रहा है क्या हमने अपनी सुख-सुविधा के लिए राज्य हित में टैक्स नहीं दिया था।

आखिर हमारे दिए टैक्स के पैसों का क्या हुआ जो दलाई लामा ने दलाई लामा ट्रस्ट के जरिए से असम में बाढ़ ग्रस्त लोगों की मदद के लिए चंदा भेजा। असम में बीटीएस बैंड की फैन बीटीएस आर्मी ने भी एक अच्छी खासी रकम इकट्ठा करके सरकार को इस विपत्ति से लड़ने के लिए भेजी है।

इस बीच सेंट्रल वाटर कमीशन ने यह कहा है कि ब्रह्मपुत्र में पानी 10 सेंटीमीटर तक घटने की संभावना दिखाई दे रही है यह कल रात तक मुमकिन हो पाएगा।

इस समय आवश्यकता है कि हम असम के लोगों के साथ एकजुटता से खड़े रहे हैं उनकी हर तरह से सहायता कर सकें उनकी मदद के लिए रुपए खाने कपड़े जो बन सकता है हम पहुंचाएं यह एक राष्ट्र के रूप में हम सब की साझा जिम्मेदारी है।

 

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