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पटना विश्वविद्यालय: जल्द शुरू होगी फोरेंसिक साइंस की पढ़ाई, बजट में बढ़ोतरी सहित कई महत्वपूर्ण फ़ैसले को मंज़ूरी

पटना विश्वविद्यालय (Patna University) में शुक्रवार को  सीनेट की बैठक आयोजित की गई. यह बैठक पटना विश्वविद्यालय के व्हीलर सीनेट हाउस हॉल में आयोजित की गई. सीनेट की बैठक के दौरान कई मुद्दों पर बात की गई जिसमें सबसे प्रमुख रहा सैदपुर स्थित भूखंड को साउथ एकेडमिक कैंपस के रूप में डेवलप करना. छात्र संघ ने विश्वविद्यालय की लगातार खोती जमीन का मुद्दा भी उठाया. सैदपुर स्थित भूखंड को साउथ एकेडमिक कैंपस के रूप में डेवलप करने का मास्टरप्लेन वाला मुद्दा केवल सीनेट ही नहीं बल्कि पहले सिंडिकेट में भी उठ चुका है.

साउथ कैंपस की तुलना में नॉर्थ कैंपस है ज़्यादा विकसित

पटना विश्वविद्यालय के पास काफ़ी ज़मीन है लेकिन इन ज़मीनों पर ज़्यादातर विकास का काम नॉर्थ कैंपस यानी विश्वविद्यालय के आसपास के इलाकों में ही हुआ है. जबकि जो साउथ कैंपस है वहां केवल हॉस्टल और कुछ टीचर्स के क्वार्टर हैं. वहां अधिकतर ज़मीन यूं ही ख़ाली पड़ी है. यह पहली बार नहीं है कि साउथ कैंपस को विकसित करने का मुद्दा उठाया गया है. पहले भी इसके विकास के लिए मास्टर प्लान बनाया जा चुका है लेकिन उसे अमल में नहीं लाया गया.

हालत तो ऐसी है कि हर वर्ष किसी ना किसी क्षेत्र के लिए मास्टर प्लान बनता रहता है लेकिन होता कुछ नहीं. दरअसल पटना विश्वविद्यालय में जैसे-जैसे योजनाओं को स्वीकृति मिलती है, वैसे-ही-वैसे ही काम शुरू होता है. इस प्रक्रिया में काफ़ी लंबा समय लग जाता है. कभी-कभी प्रस्ताव तो स्वीकृत हो जाते हैं लेकिन राशि आने में ही विलंब होता है. इस वजह से काम स्थगित रह जाता है और उसे यूं ही छोड़ दिया जाता है. यही वजह है कि कभी भी पटना विश्वविद्यालय का कोई कार्य एक प्लांड तरीके से पूरा नहीं हो पाया है.

फिर उठा पटना विश्वविद्यालय की लगातार खोती जा रही ज़मीन का मुद्दा

शुक्रवार को आयोजित सीनेट की बैठक में एक बार फिर से पटना विश्वविद्यालय की लगातार खोती जा रही ज़मीन का मुद्दा उठाया गया. साउथ कैंपस की बहुत सारी ज़मीनों का इस्तेमाल शैक्षणिक कार्य में ना होने की वजह से इसे अलग-अलग कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने की वजह से विश्वविद्यालय अपनी ज़मीन खोती जा रही है. डेमोक्रेटिक चरखा ने सबसे पहले इस ख़बर को प्रकाश में लाया था.

खाली पड़े जमीनों का एक बड़ा हिस्सा साइंस सिटी बनाने के लिए दे दिया गया है. जानकारी के अनुसार साउथ कैंपस में लगभग 27 एकड़ ज़मीन ख़ाली थी जिसमें से 7 एकड़ ज़मीन साइंस सिटी के बनाने में दे दिया गया. साउथ कैंपस की ज़मीन का कुछ हिस्सा थाना बनाने के लिए भी दिया जा रहा है. हालत तो ऐसी है कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ज़मीन धीरे-धीरे दूसरे-दूसरे कार्यो में इस्तेमाल की जा रही है. इन ज़मीनों को साउथ कैंपस को डेवलपमेंट के लिए इस्तेमाल किया जाना था. अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में पटना विश्वविद्यालय के पास किसी बड़े प्रोजेक्ट के लिए जमीन का अभाव होना तय है.

इस विषय पर हमने पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष आनंद मोहन से बात की. उन्होंने हमें बताया कि

“विश्वविद्यालय लगातार अपनी ज़मीन खो रहा है. हमने कल यह मुद्दा सीनेट की बैठक में भी उठाया और सैदपुर कैंपस में बनाए जा रहे थाने का विरोध किया. वैसे तो हमारी मांग स्वीकार कर ली गई है. लेकिन अगर विश्वविद्यालय इसको लेकर गंभीर नहीं होता है तो छात्र इसके लिए आंदोलन भी करेंगे.”

बैठक में खूब हुआ हंगामा लेकिन स्वीकार कर ली गई छात्र संघ की आधी मांग

पटना विश्वविद्यालय के सीनेट की बैठक में शुक्रवार को खूब हंगामा हुआ. छात्र संघ ने छात्रों के मुद्दे को पूरे जोर-शोर के साथ उठाया. छात्रों ने पटना विश्वविद्यालय की खोई हुई ज़मीन फिर से वापस लेने की मांग की. खासकर एनआईटी (NIT, Patna) और पीएमसीएच (PMCH) से ज़मीन वापस लेने की मांग की गई.

इस मुद्दे पर हमने पटना विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष आनंद मोहन से बात की. उन्होंने हमें बताया कि-         

“सीनेट की बैठक में हमने ज़मीन आवंटन से लेकर ई-टिकट काउंटर, बेसमेंट और एंटी-रैगिंग सेल जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया. इनमें हमारी आधी मांगों को स्वीकार कर लिया गया है और बाकी पर विचार करने की बात कही गई है.”

पीयू में जल्द शुरू होगी फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई

सीनेट की बैठक में पटना विश्वविद्यालय के हित में कई फैसले लिए गए जिनमें से एक था फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई को शुरू करना. जल्द ही पटना विश्वविद्यालय फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई शुरू करने जा रहा है. इसके लिए सारी रूपरेखा और सिलेबस जल्द ही तैयार किया जाएगा. बिहार सरकार ने भी विश्वविद्यालय में फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई शुरू करने का निर्देश दिया है. इसके लिए सर्वप्रथम पटना विश्वविद्यालय एक विशेषज्ञों के समूह को बाहर भेजेगा. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पटना विश्वविद्यालय के शैक्षणिक स्तर को ऊपर उठाना है ताकि छात्र अलग-अलग विषयों पर शोध कर सकें.

विश्वविद्यालय से छात्र संघ की राशि का भी मांगा गया हिसाब

पटना विश्वविद्यालय के सीनेट की बैठक में कई अहम मुद्दों को लेकर मांगी उठी. इसमें छात्र संघ की राशि का हिसाब विश्वविद्यालय से मांगा गया. छात्र संघ के सदस्यों ने विश्वविद्यालय से खाते में उपलब्ध राशि बताने को कहा और विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया कि राशि की जानकारी बार-बार मांगने पर भी संघ को नहीं दी जा रही है.

छात्रसंघ अध्यक्ष आनंद मोहन ने बताया कि

“विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा छात्र संघ की राशि छिपाई जा रही है. हमने बैठक में इसका विरोध किया. हमने विश्वविद्यालय प्रशासन से कुलपति और तमाम विश्वविद्यालय पदाधिकारियों की उपस्थिति में यह मांग की है कि जल्द-से-जल्द छात्र संघ के खाते में उपलब्ध राशि का हिसाब संघ को दिया जाए.”

अगले वित्तीय वर्ष के लिए तैयार किया गया 576.05 करोड़ का बजट

सीनेट की बैठक में आगामी वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए भी बजट तैयार कर लिया गया है. विश्वविद्यालय ने इसके लिए 576.05 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया है जो पिछले वित्तीय वर्ष से लगभग 4 करोड़ अधिक है. इसे शुक्रवार की बैठक में ही मंजूरी दे दी गई है. इसके साथ ही पटना विश्वविद्यालय को इस वर्ष यानि 2022-23 में 36.03 करोड़ रुपए की आय हुई है जबकि 2023-24 में संभावित आय का आकलन 36.65 करोड़ का लगाया जा रहा है.

पटना विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2023-24 के लिए जो बजट तैयार किया है उसमें वेतन, भत्ते, सेवांत लाभ, आकस्मिक व्यय के साथ वोकेशनल कोर्स के व्यय में भी कमी आई है. वहीं वोकेशनल कोर्सेज के लिए अगले वित्तीय वर्ष में 13.34 करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया है.

 इस विषय पर हमने पटना विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रोफेसर अजय कुमार से बात की. उन्होंने हमें बताया कि

“बैठक में तय किए गए बजट के ऊपर विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से कार्य करेगा. हमारा प्रयास है कि विश्वविद्यालय आने वाले 5 वर्षों में पूरी तरह से बदल जाए तथा छात्रों के हित के लिए हर संभव प्रयास किए जा सके.”

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विश्वविद्यालय के विकास के लिए रफ़्तार में बढ़ानी होगी कार्यगति

शुक्रवार को आयोजित सीनेट की बैठक में लिए गए कई फैसले सराहनीय हैं जैसे- साउथ कैंपस को डेवलप करना, फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई शुरू करना तथा आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए सही बजट निर्धारित करना आदि. लेकिन यह फैसले जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा सही रूप में क्रियान्वित नहीं कर दिए जाते तब-तक उन फैसलों का कोई मतलब नहीं है.

विश्वविद्यालय का विगत के कुछ वर्षों में शैक्षणिक स्तर काफ़ी गिरा है जिसे जल्द-से-जल्द ठीक करने की आवश्यकता है. इसके लिए विश्वविद्यालय को एक सही रूपरेखा का निर्माण करना होगा और इसे यथाशीघ्र सफल बनाने के लिए एक सार्थक प्रयास करना होगा. तभी जाकर पटना विश्वविद्यालय की लुप्त हो चुकी शैक्षणिक गरिमा जल्द वापस लौट पाएगी अन्यथा यह केवल इतिहास बनकर रह जाएगा कि पटना विश्वविद्यालय कभी एशिया का ऑक्सफोर्ड हुआ करता था.

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