साहेब ताली और थाली पीटने में मस्त और मज़दूर लगातार कर रहे हैं आत्महत्या

कोरोना काल में सभी प्रकार के कार्यकाल बंद हो जाने की वजह से मज़दूर आत्महत्या करने को मजबूर हैं। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में मज़दूरों की आत्महत्या के मामले थम नहीं रहा है और इसकी एकमात्र वजह है बेरोज़गारी और मेंटल हेल्थ पर जानकारी का अभाव, जो इस वक्त अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ती जा रही है।

इस बढ़ती बेरोज़गारी में आखिर यह मज़दूर करें तो क्या करें और ऐसे में उनके पास जब कुछ नहीं दिखता निराशा चारों ओर छा जाती है तो वे आत्महत्या करने को मजबूर हो जाते हैं।

ऐसे ही एक कहानी है एक मज़दूर की जो सूरत में  काम करता था और उत्तर प्रदेश के अमरोहा गांव का रहने वाला था। 27 जून को वह अपने घर में आत्महत्या के फंदे से लटका हुआ पाया गया। आत्महत्या करने वाले मज़दूर का नाम मणि शंकर मिश्रा था उसकी उम्र 35 साल थी और वह सूरत में साड़ी मिल में काम किया करता था। वह भी 20 दिन पहले ही काम बंद हो जाने की वजह से घर वापस लौटा था पोस्टमार्टम के बाद शरीर उसके घर वालों को सुपुर्द कर दिया गया।

मगर ये तो केवल एक व्यक्ति की कहानी थी हमें मिली सूचना के अनुसार अब तक उसी 1 जिले में 22 प्रवासी मजदूरों ने आत्महत्या कर ली है कईयों ने करने का प्रयास किया है।

आत्महत्या करने वालों की सूची काफी लंबी है हमने यह कोशिश की है कि हम ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की जानकारी इसमें दे सकें।

17 जून की शाम करीब 6:00 बजे अखिलेश सिंह जो कि 25 वर्ष के थे अपने कमरे के छत से लटके  हुए पाए गए। मृतक के चचेरे भाई ने यह बताया कि वह महाराष्ट्र के पुणे शहर में रहकर मज़दूरी करते थे और लॉकडाउन में बेरोजगार हो गए कहीं काम ना मिल पाने की वजह से आर्थिक मंदी का शिकार हो गए और आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए।

इसी तरह अतरा थाना क्षेत्र आर्थिक मंदी से परेशान होकर 16 जून को एक मजदूर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली युवक का नाम राकेश था उसकी आयु 20 साल थी और खेत की मेरिट में लगे बेर के पेड़ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली मृतक के भाई के हवाले से बताया जा रहा है कि राकेश मौसेरी बहनों की शादी समारोह में शामिल होने गांव गए थे।

परिजनों के हवाले से यह पता चला है कि वह पंजाब में मज़दूरी करते थे और लॉकडाउन में घर लौटे थे। पता चला है कि उनके परिवार के ऊपर डेढ़ लाख रुपए का क़र्ज़ है इसकी अदायगी के लिए पैसे कमाने व पंजाब गए थे लेकिन कोरोनावायरस संक्रमण के चलते लगाए गए लॉकडाउन में काम बंद हो गया और वह बेरोज़गार हो घर लौट आए।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों का यही हाल है लगातार आत्महत्या मामले बढ़ते जा रहे हैं।

बीते 11 जून को बांदा जिले के गिरवा थाना क्षेत्र के महुआ गांव में मजदूर सुखराज प्रजापति जिनकी उम्र 35 वर्ष थी कथित तौर पर आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या कर ली ईंट भट्ठे पर काम करते थे और लॉकडाउन के कारण काम बंद हो गया।

8 जून को बांदा जिले में एक युवक ने फांसी लगाकर जान दे दी लॉकडाउन में गुजरात के अहमदाबाद शहर से लौटा था उसकी उम्र मात्र 19 वर्ष थी।

और इस तरहकितने ही लोग हैं जो आर्थिक मंदी से परेशान होकर खुदकुशी करने पर मजबूर हैं या सूची और भी लंबी जाएगी मगर हालात एक ही रहेंगे हर किसी के घर किसी ना किसी प्रकार की समस्या थी आर्थिक तौर पर कमज़ोर थे, बेरोज़गार हो गए काम खत्म हो गया घर वापस आए और निराश होकर के आत्महत्या कर ली।

कोरोनावायरस के कारण अर्थव्यवस्था पर बड़ी चोट पहुंची है बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है कोरोनावायरस प्रकोप के चलते शहरी बेरोजगारी दर बढ़कर 30.9% हो गया है। और कुल बेरोजगारी दर बट करके 23.4% पर पहुंच गई है यह आ करें सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी के सप्ताहिक ट्रैकर सर्वे पर आधारित है।

बढ़ती बेरोजगारी में सबसे ज्यादा नुकसान कैज़ुअल वर्कर्स का होगा ऐसा अनुमान लगाया गया था और देश में कुल वर्क फोर्स का एक तिहाई हिस्सा कैजुअल्स वर्कर्स का है अगर अर्थव्यवस्था में संकट लगातार बढ़ता रहा तो उनकी नौकरियां सुरक्षित नहीं रहेंगी यह बात उसी रिपोर्ट में कही गई थी और अब या वास्तविक रूप में दिखाई देना शुरू हो गया है।

ऐसे में सरकार की तरफ़ से भी बेरोज़गार हुए प्रवासी मजदूरों के लिए कोई मदद आती नजर नहीं आ रही है 20 लाख करोड़ का एक पैकेट अनाउंस किया गया था मगर उसमें एक दो तीन चार लाख करोड़ का ही था बाकी तो लोन थे।

इस समय जितने भी प्रवासी मजदूर बेरोजगार लोग या किसी भी तरह से परेशान लोग आत्महत्या या खुदकुशी करने की सोच रहे हैं तो उन से अनुरोध है कि आप हत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है मगर वह कई और समस्याओं को जन्म दे देता है अगर आपको किसी भी प्रकार की सहायता और सहयोग की जरूरत है तो आप लोगों से खुलकर इस बारे में बात करें हो सकता है कोई आपके सहयोग के लिए आए आप टीम डेमोक्रेटिक चरखा से भी कांटेक्ट कर सकते हैं।

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