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पटना: राजधानी की सबसे लंबी सड़क जाम से परेशान, ना ट्रैफिक व्यवस्था ना ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था

राजधानी पटना में जाम की समस्या एक बहुत बड़ी समस्या है. इससे निपटने के लिए अब तक ना जाने कितने प्रयास किए गए हैं लेकिन वह सभी असफ़ल और निष्क्रिय दिखाई पड़े हैं. लेकिन पटना के अशोकराज पथ और बारी पथ में लगने वाला जाम की ज़िम्मेदारी दरअसल प्रशासनिक अनदेखी का नतीजा है. सरकारी प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैया की भरपाई रोज़ लोगों को घंटों तक जाम में फंस कर देनी पड़ रही है.

पटना के अशोक राजपथ में चल रहे डबल डेकर फ्लाईओवर और मेट्रो के निर्माणकार्य की वजह से ऑटो और हवा-हवाई रिक्शा को बारी पथ की ओर डायवर्ट कर दिया जा रहा है. इससे जाम की ख़ासी समस्या झेलनी पड़ रही है. आपको बता दें कि अशोक राजपथ में ऑटो या हवा-हवाई रिक्शा गायघाट से चलकर एनआईटी तक आते हैं और फिर आगे गांधी मैदान तक अपनी सवारी लेकर जाते हैं. लेकिन अब उन्हें खजांची रोड से डायवर्ट कर दिया जा रहा है. इससे काफ़ी जाम की समस्या देखने को मिल रही है. बारी पथ में खासकर भिखना पहाड़ी से लेकर लंगरटोली तक गाड़ियों की संख्या बढ़ जाने से दबाव काफ़ी ज़्यादा हो गया है.

व्यवस्था को नियंत्रित करने में असफल ट्रैफिक पुलिस प्रशासन

बारी पथ में लगने वाला यह जाम पिछले 1 महीने से चल रहा है. हालत तो यह है कि ट्रैफिक पुलिस खुद इस समस्या को सुलझा पाने में असमर्थ दिखाई दे पड़ रही है. उनके द्वारा रूट को डायवर्ट कर देना तो आसान है लेकिन इसका दबाव जो बारी पथ पर पड़ रहा है उसे ट्रैफिक पुलिस नियंत्रित नहीं कर पा रही. यदि नियंत्रण कर पा भी रही है तो उसे घंटों समय लग जा रहा है जिससे ऑफ़िस आने-जाने वाले और स्कूल के बच्चों को तकलीफ़ झेलनी पड़ रही है.

गाड़ियों का बढ़ रहा है दबाव

बारी पथ में लग रहे जाम की वजह से गाड़ियों का दबाव भी काफ़ी ज़्यादा बढ़ गया है. इसका कारण है अशोक राजपथ में चलने वाले हवा-हवाई और ऑटो रिक्शा का बारी पथ रोड में प्रवास. इस चक्कर में जो ऑटो रिक्शा दैनिक रूप से मुसल्लमपुर हाट से गांधी मैदान जाती है उनके लिए भी एक बड़ी समस्या बन गया है. गाड़ियों की संख्या बढ़ जाने से उन्हें भी उस रोड में ना केवल गाड़ियों का सामना करना पड़ता है बल्कि परेशानी भी उठानी पड़ती है.

अशोक राजपथ के दैनिक यात्रियों को हो रही परेशानी

रूट डायवर्जन से जाम की समस्या तो बनी रहती ही है. इसके साथ ही अशोक राजपथ के खजांची रोड से लेकर गांधी मैदान तक के रोड में चढ़ने वाले लोगों को भी ऑटो नहीं मिलता. ऐसा इसलिए क्योंकि ऑटो खजांची रोड से ही डाइवर्ट हो जाता है. इस वजह से अशोक राजपथ की तरफ़ ऑटो लेने वालों को बारी पथ की ओर जाकर ऑटो लेना पड़ता है. इससे उन्हें काफ़ी समस्या होती है.

ऑटो चालकों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित

रूट डायवर्जन से ऑटो चालकों को आर्थिक रूप से भी नुकसान झेलना पड़ रहा है. उनके कई दैनिक यात्री जो हर दिन अशोक राजपथ से आवागमन करते थे वह कहीं-ना-कहीं छूट जा रहे हैं. इस वजह से ऑटो चालकों की दैनिक कमाई और रोज़मर्रा पर भी असर पड़ा है.

हमने एक ऑटो चालक सुधीर से बात की सुधीर ने बताया कि

“रूट डायवर्जन से हम लोग काफ़ी परेशान हो गए हैं. हमारे अशोक राजपथ में चढ़ने-उतरने वाले यात्रियों को भी समस्या हो रही है. पुलिस के डर से हम लोग इस आदेश को मान लेते हैं लेकिन यह सरासर हम लोगों के साथ अन्याय हो रहा है.”

भरना पड़ता है चालान

बात सिर्फ यहीं ख़त्म नहीं होती कि रूट डायवर्ट कर दिया गया है. इसे सख्ती से लागू कराने का भी ट्रैफिक पुलिस प्रशासन ने अच्छा तरीका निकाला है. आपको बता दें कि यदि एनआईटी की ओर से आने वाला कोई ऑटो चालक खजांची की तरफ नहीं मुड़ता और पुलिस को झांसा देकर सीधे निकलने की कोशिश करता है तो उसे हज़ार रुपए तक चालान भरना पड़ जाता है. कई बार तो इस नियम को तोड़ने के लिए पुलिस के डंडे भी खाने पड़ जाते हैं.

हमने टुनटुन नाम के एक ऑटो चालक से इस विषय पर बात की उसने बताया कि-

“यदि हम लोग नियम का पालन नहीं करते हैं तो पुलिस हमारे गाड़ियों पर और हम पर डंटे बरसाती है और पकड़े जाने पर हजार रुपए तक जुर्माना भरना पड़ता है. हजार रुपए तो हमारे पूरे दिन की कमाई है इसलिए हम इस प्रकार का रिस्क लेते ही नहीं.”

“हम क्या करें, ऊपर से मिलता है आदेश”

इस विषय पर जब हमने जाम छुड़वा रहे एक पुलिस अधिकारी से बात करने का प्रयास किया तो उसने बताया कि  

“हमलोग कुछ नहीं कर सकते हैं.हमें ऊपर से आदेश मिला है कि जब तक अशोक राजपथ में काम चल रहा है तब तक इन ऑटो रिक्शा और हवा-हवाई चालकों को खजांची रोड से डायवर्ट करवा दिया जाए ताकि अशोक राजपथ में जाम की समस्या ना बने.”

डबलडेकर फ्लाईओवर और मेट्रो के निर्माण कार्य की वजह से किया जा रहा रूट डायवर्ट

रूट डायवर्ट अशोक राजपथ में शुरू हुए डबल-डेकर फ्लाईओवर और मेट्रो के निर्माण कार्य की वजह से किया जा रहा है. अब सवाल यह उठता है कि क्या यह समस्या लोगों को तब तक झेलनी पड़ेगी जब तक फ्लाईओवर और मेट्रो का निर्माण कार्य पूरी तरह से समाप्त ना हो जाए या सरकार और ट्रैफिक पुलिस प्रशासन इसके लिए कोई और विकल्प की तलाश करेगी?

अशोक राजपथ और बारी पथ को वन-वे बनाने का भी किया जा चुका है पहले प्रयास

ऐसा नहीं है किस सरकार ने इसके ऊपर अब तक कोई कदम नहीं उठाया. प्रशासन की ओर से पहले भी अशोक राजपथ को वन वे यानी की गाड़ियों के गांधी मैदान से अंदर जाने का और बारी पथ को गांधी चौक से गांधी मैदान आने का बनाए जाने का प्रयास किया गया था. लेकिन सही तरीके से यह क्रियान्वित नहीं हो पाने की वजह से असफल हो गया.

जल्द कोई स्थाई उपाय निकालने की है आवश्यकता

जाम की समस्या से निपटने के लिए जल्द से जल्द कोई स्थाई समस्या समाधान सरकार और ट्रैफिक पुलिस प्रशासन को मिलकर निकालने की आवश्यकता है. दैनिक रोज़ रूप से लग रहे इन घंटों जाम से रोजमर्रा के जीवन में लोगों को काफ़ी कठिनाई झेलनी पड़ रही है अशोक राजपथ की तरफ़ चल रहे फ्लाईओवर निर्माण कार्य की वजह से सड़कें संकीर्ण हो चुकी हैं. इसलिए यदि सरकार चाहे तो अशोक राजपथ और बारी पथ इन दोनों को वनवे बनाकर तत्काल इस समस्या से निजात पाया जा सकता है. ताकि आम लोगों को समस्या न झेलनी पड़े.

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