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पटना कॉलेज: गौरवशाली इतिहास के सहारे चल रहा एक खास्ता हाल कॉलेज

9 जनवरी साल 2023 को पटना कॉलेज ने अपना 161वां स्थापना दिवस मनाया. लेकिन विडंबना देख लीजिए कि पटना कॉलेज का इतिहास जितना गौरवशाली रहा है वर्तमान उतना ही निराशाजनक. इसलिए यह समझना बेहद जरूरी है कि इस 161वें वर्षगांठ पर गौरव किया जाना चाहिए या निराश होना चाहिए?

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पटना कॉलेज के सेमिनार हॉल में पूर्ववर्ती छात्रों और रिटायर्ड प्रोफेसरों को सम्मानित किया गया. सचमुच महाविद्यालय के लिए ये एक ऐतिहासिक दिन रहा. पटना कॉलेज ना सिर्फ बिहार का सबसे पुराना कॉलेज है बल्कि यह पटना विश्वविद्यालय से भी पुराना है. लेकिन आज भी पटना कॉलेज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है.

सरकारी अनदेखी की वजह से इस कॉलेज को अपने हाल पर छोड़ देना बिहार के गौरव पर लांछन लगाने जैसा है. अगर विभूतियों के नाम गिनने लगेंगे तो ना जाने बिहार के कितने मुख्यमंत्री और राजनेता सहित कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नाम बाहर आ जाएंगे. इसके अलावा कई साहित्यकार और विद्वान भी इस कॉलेज की गरिमा को अलंकृत करते मिलेंगे. एक वक्त था जब पटना कॉलेज के छात्र बिना किसी कोचिंग में पढ़े केवल कॉलेज की पढ़ाई से देश की सर्वश्रेष्ठ परीक्षा यूपीएससी जैसे परीक्षा में सफल हो जाया करते थे. लेकिन आज वह दिन देखने के लिए पटना कॉलेज को काफी संघर्षों से गुजारना पड़ जाएगा.

गौरवान्वित करने वाला रहा है इतिहास

बात में कोई दो-मत नहीं है कि पटना महाविद्यालय की वर्तमान स्थिति चाहे जैसी हो इतिहास काफी गौरवशाली रहा है. एक वक्त बिहार में शिक्षा के सबसे प्रमुख केंद्रों में इसकी गिनती की जाती थी. एक समय ऐसा भी था जब बिहार के बच्चों को यहां पढ़ने के लिए संघर्ष करना पड़ा था. बाद में बंगाल से विभाजन होने के बाद यह कॉलेज बिहार के छात्रों का सबसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्र बन गया.

विभाजन की लड़ाई के समय एक समय ऐसा भी आया जब इस महाविद्यालय को बंद करने की चर्चाएं होने लगी थी. लेकिन आज तक यह महाविद्यालय तमाम हालातों से गुजरते हुए भी बिहार के छात्रों को मंजिल तक पहुंचाने में मददगार रहा है. बिहार विधान परिषद की पहली बैठक का आयोजन भी इसी कॉलेज के सेमिनार हॉल में 1913 में आयोजित की गई थी. 1952 तक यह कॉलेज एक स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करता था लेकिन बाद में इसे पटना विश्वविद्यालय के निहित कर दिया गया. इसके सभी भवनों में प्रशासनिक भवन सबसे पुराना है. 9 सितंबर 1974 को पटना कॉलेज से अर्थशास्त्र विभाग को अलग कर दिया गया और इसे एक नए वाणिज्य महाविद्यालय के रूप में बदल दिया गया. वाणिज्य महाविद्यालय पटना कॉलेज के परिसर का ही एक हिस्सा है. पटना कॉलेज अपने आप में एक पूरी ऐतिहासिक पुस्तक है जिसके प्रत्येक पन्ने की अपनी ही एक अलग कहानी है.

Patna University 161st Raising Day Celebration
कॉलेज की वर्तमान स्थिति चिंताजनक, नेक ग्रेडिंग भी ठीक नहीं

पटना कॉलेज को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद यानी नैक की टीम के द्वारा सी-ग्रेड प्राप्त हुए हैं. 15 नवंबर 2019 को जारी नेट के सर्टिफिकेट के अनुसार 2024 तक पटना कॉलेज की ग्रेडिंग “सी” ही रहेगी. एक महाविद्यालय जो एक वक्त बिहार के शैक्षिक संस्थानों में सबसे प्रतिष्ठित माना जाता रहा हो उसकी ऐसी स्थिति काफी शर्मनाक और चिंताजनक है. सी-ग्रेड मिलने के पीछे कई कारण हैं. इन कारणों को भी समझना बेहद जरूरी है.

शिक्षकों की कमी है सबसे बड़ी समस्या

पटना कॉलेज में कुल 17 विभाग हैं. इन 17 विभागों  को मिलाकर 175-180 शिक्षक और प्रोफेसर होने चाहिए. लेकिन यह आंकड़ा केवल 25 से 30 का है. इसके अलावा जितने भी शिक्षक हैं, वह गेस्ट फैकेल्टी हैं और उनमें से भी कई विजिटिंग फैकेल्टी हैं. हमने इस विषय पर पटना कॉलेज की काउंसलर सलोनी सिंह से बात की. उन्होंने हमें बताया कि

“पटना कॉलेज में जल्द-से-जल्द स्थाई शिक्षकों की बहाली करने की आवश्यकता है. शिक्षकों की कमी की वजह से छात्र रेगुलर क्लास नहीं करते. इस कमी को दूर करने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि छात्र प्रतिदिन क्लास में उपस्थित रहेंगे.”

गेस्ट फैकेल्टी और विजिटिंग फैकेल्टी में क्या है अंतर

यह समझना बेहद जरूरी है कि स्थाई फैकेल्टी, गेस्ट फैकेल्टी और विजिटिंग फैकेल्टी में बुनियादी अंतर क्या है? स्थाई फैकेल्टी वैसे शिक्षक या प्रोफेसर होते हैं जो कॉलेज में पूर्ण सेवा देते हैं, जबतक कि वह सेवानिवृत्त नहीं हो जाते. जबकि गेस्ट फैकेल्टी वैसे शिक्षक होते हैं जिन्हें कॉलेज 11 महीने के लिए कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर रखता है तथा हर साल इनका कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू होता है.

अब बात विजिटिंग फैकेल्टी की. विजिटिंग फैकल्टी से अभिप्राय वैसे शिक्षकों से है जिन्हें प्रति क्लास के अनुसार वेतन दिया जाता है. अगर कोई विजिटिंग फैकेल्टी पूरे दिन में 4 कक्षाओं को पढ़ाते हैं तो उन्हें केवल चार क्लासों का ही वेतन दिया जाएगा. पटना कॉलेज में विजिटिंग फैकेल्टी की संख्या सबसे ज्यादा है.

कॉलेज में कैंटीन की सुविधा नहीं है उपलब्ध

आमतौर पर अच्छे कॉलेजों का अपना कैंटीन भी होता है जहां छात्र नाश्ता कर सकें. इसके लिए उन्हें कैंपस से बाहर जाने की जरूरत ना पड़े. लेकिन पटना कॉलेज में कैंटीन तो है लेकिन चालू नहीं है. बंद पड़ा यह कैंटीन कई बार छात्र नेताओं का मुद्दा भी रहा है और इसे हर बार खोलने की मांग भी होती रही है. कई बार कैंटीन खुला भी है लेकिन नियमित रूप से चालू नहीं रह पाता.

Patna University Canteen
हॉस्टलों की हालत खराब

पटना कॉलेज के अंदर कुल 4 हॉस्टल हैं. इनमें मिंटो छात्रावास, जैक्सन छात्रावास, इकबाल हॉस्टल और नकवी छात्रावास शामिल हैं. लेकिन इन सभी हॉस्टलों की स्थिति काफी खराब है. इमारतें जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी हैं. सफाई की व्यवस्था भी ठीक नहीं है. हॉस्टल में छात्र बुनियादी सुविधाओं के अभाव में रह रहे हैं.

छात्रों के बीच अक्सर होती रहती है आपसी झड़प, होता है कॉलेज का माहौल खराब

पटना कॉलेज में छात्रों के बीच मारपीट होना कोई नई बात नहीं है. कई बार बात इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि छात्रों को पिटाई के कारण अस्पताल तक में एडमिट हो पड़ जाता है. आपसी झड़प का यह दुष्परिणाम कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को भुगतना पड़ता है. इससे कॉलेज में डर का माहौल पैदा हो जाता है जिससे छात्र नियमित रूप से पढ़ने नहीं जा पाते.

लड़कियों के लिए नहीं है अलग शौचालय की व्यवस्था

पटना कॉलेज के कैंपस में छात्राओं के लिए अलग से गर्ल्स टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है. इसके लिए छात्राओं को कॉमन शौचालय का इस्तेमाल करने पड़ता है. कई बार शौचालय में सेनेटरी पैड नहीं होने की शिकायत भी की गई है. इस विषय पर हमने पटना कॉलेज की एक छात्रा श्वेता से बात की. उन्होंने में बताया कि

“लड़के और लड़कियों के लिए एक ही शौचालय है. ऐसे में कई बार लड़कियां कॉलेज के शौचालय का इस्तेमाल करने से संकोच करती हैं. हमने कई बार कॉलेज के प्राचार्य से इसके लिए मांग भी की है. लेकिन अब तक इस दिशा पर कोई काम नहीं हुआ.”

कॉलेज में नहीं है प्लेसमेंट सेल

पटना कॉलेज के अंदर वोकेशनल कोर्सेज भी हैं,जैसे- बीबीए, बीसीए और बीएमसी. इन कोर्सेज का फी भी बाकीं विषयों के मुकाबले ज्यादा है. छात्र ज्यादा पैसे देकर यहां एडमिशन लेते हैं लेकिन कॉलेज के पास किसी प्रकार का प्लेसमेंट सेल नहीं होने की वजह से उन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद भी संघर्ष करना पड़ता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि फिर वोकेशनल कोर्सेज और रेगुलर कोर्सेज में क्या फर्क रह गया, जब जॉब सिक्योरिटी दोनों में से किसी में सुनिश्चित नहीं हो पा रही है?

स्थाई लाइब्रेरियन की नहीं हुई अब तक बहाली

पटना कॉलेज के लाइब्रेरियन रिटायर हो चुके हैं. ऐसे में अब तक नए लाइब्रेरियन की बहाली नहीं हो पाई है. लाइब्रेरी की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है. ज्यादातर किताबें जो पहले से लाइब्रेरी में मौजूद थीं वही अब तक चल रही हैं. उन्हें तक अपडेट नहीं किया गया है. ऐसे में यह भी एक बड़ा सवाल है कि ना तो लाइब्रेरी में किताबें अपडेटेड है और ना ही अब तक लाइब्रेरियन की बहाली हो पाई है. इस विषय पर हमने पटना कॉलेज के पूर्ववर्ती छात्र ज्योत प्रकाश शर्मा से बात की. उन्होंने बताया कि

“लाइब्रेरी में रखी पुस्तकें काफी अच्छी हैं. पुस्तकों के मामले में लाइब्रेरी समृद्धिशाली है लेकिन अपडेटेड नहीं है. ऐसे में अगर किसी विभाग के पाठ्यक्रम में कोई परिवर्तन किए जाने के बाद वह सामग्री कॉलेज लाइब्रेरी के अंदर मौजूद किताबों में नहीं मिल पाती. कॉलेज को जल्द से जल्द अपनी लाइब्रेरी में अपडेटेड पुस्तकों को रखना चाहिए ताकि छात्रों को पढ़ाई में सुविधा हो.”

जल्द उठाने होंगे कोई ठोस कदम

पटना कॉलेज आज अपने जिस अस्तित्व की लड़ाई के लिए लड़ रहा है उसे बचाए रखने के लिए राज्य सरकार को और विश्वविद्यालय प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे. शिक्षकों की कमी से लेकर तमाम बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराना होगा जो छात्रों के बीच नहीं है. यदि जल्द से जल्द पटना कॉलेज में आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो यह कॉलेज सिर्फ ऐतिहासिक ही होकर रह जाएगा और इसके वर्षगांठ की कोई मायने नहीं रह जाएंगे.

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