दिल्ली दंगे: दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद से पूछताछ, जांच के लिए फ़ोन ज़ब्त

ऐसा लगातार देखने को मिला है कि सरकार ने इस महामारी को भी अवसर के तरह देखा और जो भी सरकार के सामने खड़े होकर गलत नीतियों का विरोध कर रहे थे उनका दमन लगातार किया जा रहा है। अब इस कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है, प्रो.अपूर्वानंद। प्रोफेसर अपूर्वानंद दिल्ली यूनिवर्सिटी में हिंदी पढ़ाते हैं और लगातार कई न्यूज़ पोर्टल पर अपनी बातों को मुखर तौर पर रखते हैं। जब पूरे देश में नागरिकता संशोधन क़ानून, राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण और राष्ट्रीय नागरिकता पंजीयन को लेकर विरोध चल रहा था उस समय भी अपूर्वानन्द ने अपनी बात मुखर तौर पर रखी थी।

अब पुलिस प्रो.अपूर्वानंद को पूछताछ के लिए बुलाती है और जांच के नाम पर उनका फ़ोन भी ज़ब्त कर लेती है। अपूर्वानंद को दिल्ली में हुए दंगे को लेकर पूछताछ के लिए बुलाया जाता है। ये अपने आप में हास्यास्पद बात है कि एक शिक्षक, जो छात्रों का जीवन बनाता है उससे दंगों को लेकर पूछताछ की जाए।


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राजेश जोशी की एक कविता है-

“जो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे, मारे जायेंगे
कठघरे में खड़े कर दिये जायेंगे
जो विरोध में बोलेंगे
जो सच-सच बोलेंगे, मारे जायेंगे

 

बहरहाल, प्रो.अपूर्वानंद ने एक खत जारी करते हुए अपनी बातचीत सबके सामने रखी है।

“फरवरी, 2020 में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुई हिंसा से संबंधित एफआईआर 59/20 के तहत दिल्ली पुलिस की विशेष स्पेशल सेल द्वारा मुझे 3 अगस्त, 2020 को जांच के सिलसिले में बुलाया गया। वहाँ मैंने पाँच घंटे बिताए। दिल्ली पुलिस ने आगे की जांच हेतु मेरा मोबाइल फोन ज़ब्त करना ज़रूरी समझा। पुलिस अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र और घटना की पूर्ण रूप से निष्पक्ष जांच के विशेषाधिकार का सम्मान करते हुए यह उम्मीद की जानी चाहिए कि इस पूरी तफ़्शीस का उद्देश्य शांतिपूर्ण नागरिक प्रतिरोध और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के निर्दोष वाशिंदों के खिलाफ हिंसा भड़काने और उसकी साजिश रचने वालों को पकड़ना होगा।

इस जांच का मकसद नागरिकता संशोधन कानून 2019 (CAA, 2019), भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण (NPR) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजीयन (NRC) के खिलाफ सांवैधानिक अधिकारों और तरीकों से देश भर में अपना विरोध दर्ज़ करने वाले प्रदर्शनकारियों व उनके समर्थकों का उत्पीड़न करना नहीं होना चाहिए।

यह परेशान करने वाली बात है कि एक ऐसा सिद्धान्त रचा जा रहा है जिसमें प्रदर्शनकारियों को ही हिंसा का स्रोत बताया जा रहा है। मैं पुलिस से यह अर्ज़ करना चाहता हूँ और यह उम्मीद करता हूँ उनकी जांच पूरी तरह  से निष्पक्ष और न्यायसंगत हो ताकि सच सामने आए”।

– अपूर्वानन्द

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