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डेमोक्रेटिक चरखा की शुरुआत 15 मार्च 2020 को हुई. डेमोक्रेटिक चरखा का मुख्य मकसद ऐसी ख़बरें और कहानियां लोगों के सामने लाना था जिससे लोग अनजान रहते हैं. जहां एक ओर देश की मीडिया हिन्दू-मुस्लिम डिबेट, राम मंदिर, युद्ध, हिन्दू राष्ट्र जैसे मुद्दों पर लोगों को बहकाने का काम कर रहे थे उस समय डेमोक्रेटिक चरखा ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था, बस्तियों में संरचनाओं की कमी, बिजली के आंकड़ों में गड़बड़ी, कोरोना में हुई मौत के आंकड़ों में बिहार सरकार का झूठ, दलित-अल्पसंख्यक-LGBTQ+ समुदाय के मुद्दों को लोगों के बीच रखना शुरू किया.

हमारी रिपोर्ट्स की वजह से बिहार में ट्रांसजेंडर का राशन कार्ड और आधार कार्ड बना, कई बस्तियों को टूटने से बचाया गया, पटना के जिलाधिकारी ने ये बात मानी कि डेमोक्रेटिक चरखा की रिपोर्ट की वजह से कोरोना मृतकों के सही आंकड़े सामने आये. पटना हाईकोर्ट ने पुनपुन नदी पर बन रहे अवैध पुल के बारे में हमारी रिपोर्ट के बाद संज्ञान लिया. कई गांव में हमारी ग्राउंड रिपोर्ट्स के बाद अस्पताल बने और पुराने अस्पतालों की स्थिति दुरुस्त हुई.

अभी तक डेमोक्रेटिक चरखा ने पिछले 2 सालों में 3 लाख से भी अधिक जीवन में सीधा बदलाव लाया है.

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आज भी मीडिया पर भरोसा करने के लिए आपका शुक्रिया.

आमिर अब्बास
संस्थापक और संपादक

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