#DCimpact: पटना यूनिवर्सिटी में नेत्रहीन छात्रों के लिए टॉकिंग लाइब्रेरी की शुरुआत

पटना यूनिवर्सिटी में 45 नेत्रहीन छात्र पढ़ाई करते हैं. इनकी पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी की ओर से क्लासरूम में रिकॉर्डर या टॉकिंग लाइब्रेरी की सुविधा नहीं थी. आफ़ताब आलम इसी ब्लाइंड हॉस्टल के एक छात्र हैं और हिंदी में एम.ए. की पढ़ाई कर रहे हैं. आफ़ताब आलम डेमोक्रेटिक चरखा से बात करते हुए बताते हैं कि

“हमलोगों के लिए यहां पर ब्रेल लिपि में किताबें मौजूद नहीं हैं. जो भी शिक्षक पढ़ाते हैं हमलोग उन्हीं को सुन कर याद रखने की कोशिश करते हैं. जितना याद रहता है उसी से एग्जाम देते हैं. नियम के अनुसार जितने भी ब्लाइंड स्टूडेंट्स हैं उन्हें यूनिवर्सिटी को एक रिकॉर्डर देना चाहिए ताकि वो क्लास को रिकॉर्ड कर सकें और बाद में पढ़ सकें. लेकिन यूनिवर्सिटी हमें रिकॉर्डर की सुविधा नहीं देती है. इसका असर हमारे मार्क्स पर पड़ता है. मुश्किल से हमलोग बस पास हो पाते हैं. इस वजह से कई छात्र पहले-दूसरे साल में ही निराश होकर पढ़ाई छोड़ देते हैं. कई बार हमलोगों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से ब्रेल किताबों की कमी के बारे में बात की लेकिन प्रशासन हमेशा आज-कल करके मामला टालते रहे हैं.”


और पढ़ें- #DCimpact: लगातार रिपोर्ट्स और संघर्ष के बाद Bihar में #transgender का भराने लगा राशन कार्ड फ़ॉर्म


डेमोक्रेटिक चरखा ने 4 जनवरी यानी ब्रेल डे के दिन नेत्रहीनों के मुद्दों पर आर्टिकल पब्लिश किया था. इस आर्टिकल के दौरान पटना यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी के असिस्टेंट लाइब्रेरियन अशोक कुमार झा ने डेमोक्रेटिक चरखा से बातचीत में ये आश्वासन दिया था कि जितने भी नेत्रहीन छात्र लाइब्रेरी का लाभ लेना चाहते हैं, अगर वो लाइब्रेरी आयेंगे तो उन्हें सभी सुविधा दी जायेगी.

(ब्रेल किताबें देखते नेत्रहीन छात्र)

अगले दिन पटना यूनिवर्सिटी के नेत्रहीन छात्र डेमोक्रेटिक चरखा की टीम के साथ पटना यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी पहुंचे. आश्वासन के मुताबिक असिस्टेंट लाइब्रेरियन अशोक कुमार झा ने ब्रेल लिपि की हर मुमकिन किताबें नेत्रहीन छात्रों को उपलब्ध करवाई. इसके अलावा पटना लाइब्रेरी में दो कंप्यूटर की भी व्यवस्था की गयी है जो मूलतः दृष्टिबाधित छात्रों के लिए डिज़ाइन किया जाता है. इससे नेत्रहीन छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई में काफ़ी मदद मिलेगी.

लाइब्रेरी पहुंचे मिन्टो ब्लाइंड हॉस्टल के नेत्रहीन छात्रों ने कुछ और ब्रेल किताबों की लिस्ट दी है जो प्रशासन ने जल्द ही मंगाने की बात कही है. अभय कुमार मिन्टो ब्लाइंड हॉस्टल में रहते हैं और पटना यूनिवर्सिटी से इतिहास में ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं. अभय ने ब्रेल किताबें देखने के बाद कहा

हमको उम्मीद नहीं थी कि कभी प्रशासन हमारी बात मानेगी और हमारे लिए किताब और कंप्यूटर की व्यवस्था करेगी. लेकिन आज ब्रेल किताब और कंप्यूटर को महसूस कर बहुत अच्छा लग रहा है. डेमोक्रेटिक चरखा और पटना यूनिवर्सिटी का बहुत शुक्रिया कि उनसे हम नेत्रहीन छात्रों की बात सुनी.

ब्रेल लिपि की किताबें और कंप्यूटर लगवाने में सबसे महतवपूर्ण भूमिका पटना यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट लाइब्रेरियन अशोक कुमार झा की रही. आज डेमोक्रेटिक चरखा से बातचीत के दौरान अशोक कुमार ने कहा

लाइब्रेरी में किताबें मौजूद थीं लेकिन कमी बस ये थी कि नेत्रहीन छात्र यहां आते नहीं थे. अब छात्र आने लगे हैं तो सारी सुविधा मुहैया करवाई जायेगी. उनका लाइब्रेरी कार्ड भी जल्द ही जारी कर दिया जाएगा जिससे आने वाले समय में उनकी पढ़ाई में किसी तरह की कोई बाधा ना आए.

( असिस्टेंट लाइब्रेरियन अशोक कुमार झा )

पटना यूनिवर्सिटी के इस सकारात्मक व्यवहार के कारण दृष्टिबाधित छात्रों की पढ़ाई का एक रास्ता खुला है. उम्मीद है कि जो किताबें यूनिवर्सिटी में मौजूद नहीं हैं वो जल्द ही वहां उपलब्ध करवा दी जायेगी.

निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता ज़रूरी है

आपके लिए डेमोक्रेटिक चरखा आपके लिए ऐसी ग्राउंड रिपोर्ट्स पब्लिश करता है जिससे आपको फ़र्क पड़ता है
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.