लड़के तो बेचारे भोले होते हैं, सारा दोष तो लड़कियों के पहनावे का है...

आजकल की लड़की सब क्या पहनती है कुछ समझ में नहीं आता है. इन लोग के पहनावे से ही लड़के उत्तेजित होते हैं. लड़की जानबूझकर ऐसे कपड़े पहनती है कि लड़के अट्रैक्ट हो जाए. वरना लड़के तो बेचारे भोले हैं, मोबाइल में पूरे दिन घुसे रहते हैं और किसी चीज से उनका मतलब नहीं रहता है.

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सौम्या सिन्हा
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सारा दोष तो लड़कियों के पहनावे का

सारा दोष तो लड़कियों के पहनावे का

रोज की तरह मैं अपने काम के लिए हॉस्टल से ऑटो लेकर ऑफिस जा रही थी. वैसे यह रोज वाला दिन भी नहीं था क्योंकि इसके एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी पटना में कदम रखा था. अगले दिन वह पटना से दूसरे जिले में प्रचार के लिए निकल रहे थे, इसलिए पटना के सड़कों पर हर जगह पुलिस की तैनाती थी और रूट को भी डायवर्ट किया गया था. इस वजह से काफी मशक्कत के बाद मुझे ऑफिस जाने के लिए एक ऑटो मिली और मैं लपक कर उसमें बैठ गई. अभी मैं गांधी मैदान से डीएम आवास की तरफ बड़ी थी तब तक ऑटो वाले अंकल बगल में बैठे दूसरे अंकल से राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने लगे. पैसेंजर अंकल ने ऑटो वाले अंकल से पूछा कि आप किसको वोट देंगे, तो उन्होंने कहा कि वोट किसी को भी जाए जीतेगा तो मोदी ही.

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मैं ऑटो वाले अंकल और पैसेंजर अंकल की बातें ध्यान से सुन रही थी. अभी वह राजनीतिक मुद्दों पर बात करते हुए बिहार में बंद हुए शराब पर भी बात करने लगे. पैसेंजर अंकल ने कहा कि बहुत बुरा हुआ जो नीतीश सरकार ने शराबबंदी कर दी. इस पर ऑटो अंकल ने कहा कि बंद कहां है, भाईसाहब मिल तो रहा है. इस पर पैसेंजर अंकल ने जवाब देते हुए कहा कि मिल तो रहा है लेकिन 9 की लकड़ी 90 का खर्चा भी तो है.

आजकल की लड़की सब क्या पहनती है?

जब शराब बंदी नहीं हुई थी तो हमारा बहुत सही था, हर शाम थोड़ा पेग मार कर रिलैक्स हो जाते थे. दोनों अंकल इस बात पर अभी मुस्कुरा ही रहे थे तब तक उन्होंने लड़कियों के पहननावे पर भी बात शुरू कर दी. पैसेंजर अंकल ने ऑटो वाले अंकल से कहा कि आजकल की लड़की सब क्या पहनती है कुछ समझ में नहीं आता है. इन लोग के पहनावे से ही लड़के उत्तेजित होते हैं. लड़की जानबूझकर ऐसे कपड़े पहनती है कि लड़के अट्रैक्ट हो जाए. वरना लड़के तो बेचारे भोले हैं, मोबाइल में पूरे दिन घुसे रहते हैं और किसी चीज से उनका मतलब नहीं रहता है. इस पर ऑटो वाले अंकल ने भी हामी भरी और कहा आजकल ना कोई लड़की दुपट्टा लेती है ना सूट सलवार पहनती है. बोरिंग रोड में तो लड़की सब छोटे-छोटे कपड़ों में चलती है, एक हाथ में सिगरेट लेकर अच्छे पैसे वाले लड़को को फंसाती है. ये सब पटना में यही करने आती है.

उनका इतना कहना था मेरा खून खौलने लगा. मैं ऑटो से उतर कर उनसे झगड़ा करना चाहती थी, लेकिन मुझे यह भी ख्याल आ रहा था कि मैं घर से दूर हॉस्टल में रहती हूं अगर मेरे घर वालों को मेरे झगड़े के बारे में पता लगा तो वह सीधे मुझे घबरा कर घर बुला लेंगे. अगर मैं कुछ कहती हूं तो अगले दिन तेज़ाब फेकने, गोली मरने या कोई भी अप्रिय घटना मेरे साथ ना हो जाए. मैं इतना सब सोच रही थी और फिर मैंने डिसाइड किया कि मैं ऑटो से उतर जाती हूं, लेकिन फिर ख्याल आया कि मुझे ऑफिस जाने के लिए ऑटो नहीं मिलेगी.

हालांकि दोनों अंकल की बातों को सुनकर मैं अपने ऑटो के लोगों की ओर देखा, मेरे सामने एक लड़की बुरखे में बैठी हुई थी. उसकी बस नज़रे मुझसे मिल रही थी और मैं चाह रही थी कि वह कुछ कहे. लेकिन हम दोनों चुपचाप सफर में बैठे रहे और दोनों अंकल की बातों को सुनते रहे. बहुत हिम्मत के बाद भी मैं कुछ नहीं बोल पाई और चुपचाप ऑफिस के बाहर ऑटो रुकवा कर उससे उतर गई. इस पूरी घटना को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन आज तक मेरे ज़हन में उन दोनों अंकल की बातें घूमती हैं और थोड़ा पछतावा भी होता है कि मुझे उन्हें चुप कराना चाहिए था. मेरी चुप्पी गलत भी नहीं थी क्यूंकि मैं डर गई थी, मगर सही भी नहीं थी, ऐसे में बीच का रास्ता क्या है यह मुझे भी नहीं पता.

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