कुणाल कामरा ने बताया 80 करोड़ "मुफ़्त राशन" का सच?

देश के जाने माने कॉमेडियन कुणाल कामरा लगातार केंद्र सरकार के दावों और वादों की हकीकत जनता के सामने रख रहे हैं. कुणाल ने इस सीरीज के पहले वीडियों में लॉकडाउन के दौरान देश में माईग्रेंट मजदूरों की दुर्दशा के आंकड़े बताए हैं.

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80 करोड़ मुफ़्त राशन

80 करोड़ "मुफ़्त राशन"

देश के जाने माने कॉमेडियन कुणाल कामरा (Kunal Kamra) लगातार केंद्र सरकार के दावों और वादों की हकीकत जनता के सामने रख रहे हैं. करीब 10 दिन पहले शुरू किये वीडियों सीरीज में कुणाल लगातार उन तथ्यों को जनता के सामने रख रहे हैं जो सरकार के दावों से बिल्कुल अलग हैं.

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कुणाल ने इस सीरीज के पहले वीडियों में लॉकडाउन के दौरान देश में माईग्रेंट मजदूरों की दुर्दशा के आंकड़े बताए हैं. अपने पहले पॉइंट में कामरा लॉकडाउन के दौरान सरकार के उस दावे की सच्चाई रखते हैं जिसमें दावा किया गया था कि पैनडेमिक के दौरान एक भी व्यक्ति की मौत भूख के कारण नहीं हुई.

इसपर कुणाल APW (Agreement for Performance of Work) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताते हैं कि इस दौरान पहले स्टेज में ही 989 लोगों की मौत विभिन्न कारणों से हो गयी थी.

80 करोड़ लोगों को राशन?

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दूसरे पॉइंट में कामरा केंद्र सरकार के उस दावे पर सवाल उठाते है जिसमें सरकार दावा करती है कि लॉकडाउन के दौरान 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया गया है. कामरा यहां सवाल उठाते हुए कहते हैं जब सरकार यह दावा करती है कि 80 करोड़ लोगों को राशन दिया गया तो उन 989 लोगों की मौत कैसे हुई?

कामरा वीडियों में आगे मजदूरों के लिए काम करने वाली संस्था SWAN (Standard Workers Action Network) के रिपोर्ट का जिक्र करते हैं. SWAN संस्था ने एक महीने तक 36 हजार माईग्रेंट मजदूरों के साथ रहकर रिपोर्ट तैयार किया किया था. सर्वे रिपोर्ट बताया गया कि उस दौरान 64% मजदूरों के पास 100 रूपए से भी कम पैसे मौजूद थे.

लॉकडाउन के दौरान मात्र 6% मजदूरों को ही पूरी मजदूरी मिली थी. वहीं 78% मजदूरों को एक रुपया नहीं दिया गया. वहीं 99% स्वरोजगार जैसे- रिक्शा खींचने वाले और सड़कों पर सामान बेचने वाले लोग इस दौरान एक रुपया भी नहीं कमा सके.

वीडियों में आगे माईग्रेंट मजदूरों के लिए मजदूरी दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दाखिल किये गये PIL की चर्चा भी गयी. रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन के पहले फेज में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किये गये पीआईएल (PIL) की चर्चा की गयी है. PIL में मांग की गयी कि जो मजदूर जहां भी हैं उन्हें उनकी पूरी मजदूरी दी जाए. 

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस PIL को यह कहकर ख़ारिज कर दिया कि सरकार अपना काम अच्छे से कर रही है. जो मजदुर जहां है, वहां उन्हें पूरी मजदूरी मिल रही है. वहीं मजदूरों की देखभाल भी सरकार कर रही है.

सरकार कोर्ट में यह दावा करती है कि गरीब अन्न कल्याण योजना (Garib Anna Kalyan Yojana) के तहत 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया जा रहा है. साथ हि मजदूरों से कहा गया कि वे लोग पैदल अपने शहरों के लिए ना निकले.

कुणाल कामरा ने यहाँ सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा अगर सरकार ने मजदूरों के लिए सारे इंतजाम पहले ही किये थे तो इतनी संख्या में लोग शहरी दिहाड़ी करने क्यों गये?

मजदूरों को क्यों लेने पड़े लोन

वीडियों में आगे SWAN रिपोर्ट की चर्चा करते हुए बताया गया है कि वैसे मजदूर जिनके पास 100 रूपए से भी कम पैसे थे उनमें से 48% लोगों नें दो से पांच हजार तक का लोन लिया था. सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा गया कि आखिर पैनडेमिक के दौरान लोगों के लोन लेने का कारण क्या था? जबकि सरकार यह दावा कर रही थी इस दौरान लोगों को खाने के लिए राशन और बाकि व्यवस्था की गई थी.

कोर्ट में सरकार कि तरफ से उपस्थित हुए तुषार मेहता ने दावा किया कि सरकार के खिलाफ निगेटिव प्रचार किया जा रहा है.

कामरा ने माईग्रेंट मजदूरों के लिए जारी किए सरकारी आकड़ों पर भी सवाल उठाये है. सरकार के दो विभागों ने मजदूरों के लिए अलग-अलग आंकड़े जारी किये हैं. चीफ लेबर कमिश्नर द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पैनडेमिक के दौरान 26 लाख माईग्रेंट मजदूर आये थे. वहीं इकोनॉमिक सर्वे ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि देश में आठ करोड़ मजदूर माईग्रेट हुए थे.

स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2021 की रिपोर्ट में बताया गया कि पैनडेमिक के पहले फेज में 10 करोड़ लोगों की नौकरी ख़त्म हो गयी. वहीं लॉकडाउन के बाद मात्र 30 लाख मजदूरों कों ही  मनरेगा के तहत काम मिल पाया जो पिछले वर्ष के मुकाबले 82% कम था.

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