Loksabha Election 2024: बक्सर सीट पर BJP-RJD में टक्कर, BJP से नए चेहरों को टिकट

Loksabha Election 2024: बक्सर लोकसभा सीट से वर्तमान में भाजपा नेता अश्विनी कुमार चौबे सांसद है, जिनका टिकट भाजपा ने इस चुनाव में काट दिया है. भाजपा-राजद दोनों ने ही बक्सर से नए उम्मीदवार को मैदान में उतारा है.

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बक्सर लोकसभा चुनाव

बक्सर लोकसभा चुनाव

बक्सर लोकसभा सीट 1764 में अंग्रेजों और मुगलों के बीच हुए युद्ध की वजह से काफी चर्चित रह चुका है. बक्सर के युद्ध में मुगल शासकों को अंग्रेजों से हार का सामना करना पड़ा था. 1764 के पहले 1539 में भी चौसा की लड़ाई की वजह से बक्सर इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ था. मुगल काल के दौरान हुमायूं और शेरशाह के बीच में 1539 में बक्सर में ही चौसा की लड़ाई हुई थी. 

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इस लोकसभा सीट से वर्तमान में भाजपा नेता अश्विनी कुमार चौबे सांसद है, जो इस सीट से लगातार दो चुनाव जीत चुके हैं. इस लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन से भाजपा ने ही इस सीट उम्मीदवारी ठोकी है. भाजपा ने इस लोकसभा चुनाव में अश्विनी कुमार चौबे को आराम देते हुए नए चेहरे को टिकट दिया है. बक्सर से भाजपा ने 2024 आम चुनाव के लिए बैकुंठपूर के पूर्व एमएलए मिथिलेश तिवारी को टिकट दिया है, जबकि राजद से रामगढ एमएलए और पूर्व कैबिनेट मंत्री सुधाकर सिंह को टिकट दिया है. 

2019 के आम चुनाव में भाजपा के दिग्गज नेता अश्विनी कुमार चौबे ने इस सीट पर राजद उम्मीदवार जगतानंद सिंह को हराया था. अश्विनी चौबे को बक्सर की जनता ने 4,73,053 वोट दिए थे, तो वहीं राजद नेता को 3,55,444 वोटो की प्राप्ति हुई थी. राजद और भाजपा के अलावा बसपा उम्मीदवार ने भी बक्सर में अपनी किस्मत आजमाई थी बसपा के सुशील कुमार सिंह को पिछले चुनाव में यहां 80,261 वोट मिले थे.

1991 में बना बक्सर जिला

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भोजपुरी भाषी बक्सर जिला 1991 में अस्तित्व आया. यहां अब तक 16 आम चुनाव हो चुके हैं, जिसमें 11 बार ब्राह्मण जाति के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है. सबसे ज्यादा छह बार भाजपा और पांच बार कांग्रेस पार्टी का दबदबा यहां देखने मिला है. 1952 और 1957 के चुनाव में डुमरांव महाराज कमल सिंह ने यहां से निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी. उसके बाद कांग्रेस यहां से लगातार तीन चुनाव में अपनी जीत दर्ज कराती रही. 1962, 1967 और 1971 में कांग्रेस पार्टी का विजय रथ यहां चलता रहा. 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार ने बक्सर में जीत हासिल की. 1980 में फिर से कांग्रेस की यहां वापसी हुई, इसके बाद 1984 तक पार्टी ने बक्सर की जनता का भरोसा जीता. 1989 में पहली बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(भाकपा) बक्सर में बनी और 1991 तक यहां बनी रही. भाकपा के बाद भाजपा की बक्सर में एंट्री हुई. 1996 से 2009 तक भाजपा यहां कायम रही, 2009 में राजद उम्मीदवार ने यहां जीत हासिल की, लेकिन 2014 के आम चुनाव में मोदी लहर ने बक्सर में उसका सफाया कर दिया. 2014 के बाद फिरसे बक्सर में भाजपा सरकार ने 2019 का चुनाव जीता.

बक्सर में ब्राह्मणों की संख्या ज्यादा

बक्सर लोकसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 18,06,004 है, जिसमें से 9,53,853 पुरुष और 8,52,125 महिला मतदाता है. जबकि थर्ड जेंडर के मतदाताओं की संख्या यहां 26 है. जातीय समीकरण को देखें तो बक्सर में ब्राह्मण वोटरों की संख्या ज्यादा मानी जाती है, जिसके बाद राजपूत, भूमिहार की भी संख्या यहां काफी अच्छी-खासी है. बक्सर में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या 4 लाख से ज़्यादा अनुमानित है. इसके बाद यादव मतदाता 3.5 लाख, राजपूत मतदाता 3 लाख, भूमिहार मतदाता 2.5 लाख के करीब हैं. इसके साथ ही मुसलमान वोटरों की संख्या यहां 1.5 लाख है.

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