बिहार में 1.14 लाख आंगनबाड़ियां होने के बावजूद 4 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित क्यों हैं?

कुपोषण के मामले में शिवहर सबसे ज़्यादा कुपोषित जिला है. यहां कुपोषण के मामले में 20% की बढ़ोतरी हुई है. वहीं 17% की वृद्धि के साथ जहानाबाद दूसरे तथा 12% की वृद्धि के साथ रोहतास तीसरे स्थान पर हैं.

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बिहार में 1.14 लाख आंगनबाड़ियां

बिहार में 1.14 लाख आंगनबाड़ियां

NFHS-5 के रिपोर्ट के अनुसार बीते पांच साल में देश के प्रत्येक राज्य में कुपोषण के मामले बढ़े हैं. बिहार में पांच साल से कम उम्र के 41% बच्चें कुपोषित हैं. वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में इस समय 33 लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं.

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पोषण ट्रैकर के हवाले से एक आरटीआई के जवाब के अनुसार बिहार में 4,75,824 लाख कुपोषित बच्चे हैं. कुपोषण से निपटने के लिए सरकार ने आंगनबाड़ी जैसी संस्थाओं का निर्माण किया था. ताकि कोई बच्चा कुपोषित नहीं रहे. एक आंकड़े के अनुसार राज्य में 1.14 लाख आंगनबाड़ी है, जिनमे 1.10 लाख आंगनबाड़ी अभी कार्यरत हैं जिनसे 99 लाख बच्चे जुड़े हुए हैं. इनमे 4.70 लाख बच्चे अति कुपोषित हैं.

NFHS-5 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार की 63% गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हैं. वहीं 15 से 19 साल की 66% लड़कियां एनीमिया से ग्रस्त हैं. वहीं 15 से 49 साल की 63.5% महिलायें एनीमिया से ग्रस्त हैं.

NFHS-5 के रिपोर्ट के अनुसार बिहार के नालंदा जिले में सबसे ज़्यादा एनीमिया से ग्रस्त लोग हैं जिनमे बच्चे भी शामिल हैं. वहीं दूसरे स्थान पर जमुई है जहां सबसे ज्यादा खून की कमी से ग्रस्त मरीज हैं. 

कुपोषण के मामले में शिवहर को सबसे ज़्यादा कुपोषित जिला बताया गया है. यहां कुपोषण के मामले में 20% की बढ़ोतरी हुई है. वहीं 17% की वृद्धि के साथ जहानाबाद दूसरे तथा 12% की वृद्धि के साथ रोहतास तीसरे स्थान पर हैं. 

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