सुदर्शन न्यूज़ नफ़रत की रसोई से एक और ज़हर लेकर आई है, इस बार नाम है- UPSC जिहाद

विगत समय में भारत में सांप्रदायिक हिंसा की कई घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन मीडिया के दौर में इस तरह की भावना सिर्फ स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहती हैं बल्कि पूरा देश इससे प्रभावित होता है। अफवाहों की भरमार और नफरत भरी बातें स्थानीय तौर पर सांप्रदायिक हिंसा को जन्म देती है जो मीडिया के ज़रिए तुरंत ही पूरे देश में फैल जाती हैं। इस बार फिर से मीडिया एक नए जिहाद को लोगों के सामने ला रही है।


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इसने स्थानीय सांप्रदायिक संघर्ष और राष्ट्रीय सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के बीच की दूरी को कम कर दिया है। आज के समय में स्थानीय सांप्रदायिक संघर्ष कुछ देरी में ही राष्ट्र घटनाओं के जरिए ही एक बड़ा संप्रदायिक कथानक तैयार किया जाता है। आजकल मीडिया का मुख्य काम रिपोर्टिंग करना नहीं रह गया है बल्कि आपसी मतभेद भिन्नता को सम्मान देने के बजाय विरोधावास को उत्पन्न करना हो गया है जिससे व्यक्ति किसी अन्य धर्म के विरोध में अपना वक्तव्य पेश करें।

मीडिया द्वारा फैलाई जा रहे सांप्रदायिकता का मुख्य शिकार मुस्लिम ही बनते जा रहे हैं।

ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी ने बीते 11 मार्च को अपने शो डीएनए में जिहाद पर बात करने के लिए एक चार्ट दिखाया था। इस चार्ट को बॉयकॉट हलाल इन इंडिया नाम के एक फेसबुक पेज पर से लिया गया था और बाद में इसे हिंदी में अनुवादित कर जिहाद के बारे में बताने के लिए शो पर दिखाया गया था।

सबसे पहले तो सवाल यह है कि क्या मीडिया का काम अब यही रह गया है कि किसी भी धर्म के बारे में आप उल्टा सीधा बोल कर लोगों में नफरत और सांप्रदायिकता फैलाएं?

चौधरी ने इस शो में चार्ट के माध्यम से यह दिखाया है कि जिहाद दो तरह के हैं एक कट्टर और दूसरा वैचारिक जिहाद। वैचारिक जिहाद में आर्थिक जिहाद, ऐतिहासिक जिहाद, मीडिया जिहाद, फिल्म और संगीत जिहाद और धर्मनिरपेक्षता का जिहाद है, जबकि कट्टर जिहाद में जनसंख्या जिहाद, लव जिहाद, जमीन जिहाद, शिक्षा जिहाद, पीड़ित जिहाद और सीधा जिहाद है।

केरल पुलिस ने ज़ी न्यूज़ के एडिटर इन चीफ सुधीर चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज की या FIR केरल के वकील पी.गवास की शिकायत पर दर्ज की गई है। चौधरी पर IPC की धारा 295(A) के तहत FIR दर्ज की गई है। गवास ने 18 मार्च को FIR  दर्ज कराई जिसमें उन्होंने कहा कि अपने शो के ज़रिए मुस्लिम संप्रदाय को निशाना बनाया गया और सांप्रदायिक नफरत फैलाई गई है।

यह पहला एक ऐसा वाकया नहीं था जिसमें मुस्लिमों के खिलाफ सवाल उठाए गए उनके धर्म को गलत बताया गया एक ऐसा ही एक और सो भी है।

समाचार चैनल या यूं कहे दंगा चैनल सुदर्शन न्यूज़ ने गुरुवार को 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले अपने एक शो का ट्रेलर जारी किया है। चैनल के एडिटर-इन-चीफ सुरेश चव्हाणके ‘नौकरशाही में मुसलमानों की घुसपैठ के षड्यंत्र का बड़ा खुलासा’ करने का दावा कर रहे हैं।

नौकरी शाही में मुसलमानों की घुसपैठ के षड्यंत्र का बड़ा खुलासा सच में मतलब इससे ज़्यादा अजीब और बेकार दावा आज तक नहीं सुना होगा आपने|

अगर इसमें पैसे देकर गलत तरीके से नौकरी लेने की बात कही जा रही है तो इसमें केवल मुस्लिम नहीं, हिंदू, सिख, इसाई भी शामिल हैं और फिर तो इन धर्मों की गलती नहीं, गलती है ऐसे मैनेजमेंट की, जिन्होंने भ्रष्टाचार पर चलने का रास्ता सही समझा है, तो इसमें किसी भी धर्म को दोषी करार करना अपनी छोटी सोच ज़ाहिर करना है।

ट्रेलर आने के बाद इसको लेकर आलोचना शुरू हो गई है और इस कार्यक्रम में सांप्रदायिकता बढ़ाने की वजह से कार्यवाही की मांग करी जा रही है। इसी बीच आईपीएस एसोसिएशन ने भी इसकी निंदा और इससे सांप्रदायिक और गैर जिम्मेदाराना बताया है। आईपीएस संगठन ने ट्वीट करके कहा, “सुदर्शन टीवी पर एक न्यूज स्टोरी में धर्म के आधार पर सिविल सेवा के कर्मचारियों को टारगेट किया जा रहा है। हम इस तरह के सांप्रदायिक और गैर जिम्मेदाराना पत्रकारिता की निंदा करते हैं।”

इंडियन पुलिस फाउंडेशन ने भी ट्वीट करके कहा, “आईएएस/आईपीएस में शामिल होने वाले अल्पसंख्यक व्यक्तियों के खिलाफ नोएडा के टीवी चैनल पर चलाई जा रही हेट स्टोरी खतरनाक कट्टरता है। हम इसे रीट्वीट नहीं कर रहे हैं क्योंकि यह पूर्णतया ज़हर है। हमें उम्मीद है कि न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी, यूपी पुलिस और संबंधित सरकारी अथॉरिटी सख्त कार्रवाई करेगी।”

सुरेश चव्हाणके ने आईपीएस एसोसिएशन के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और कहा कि मुद्दे को जाने बगैर वे इस तरह की टिप्पणी कर रहे हैं।

टीवी पर्सनैलिटी तहसीन पूनावाला ने दिल्ली पुलिस और नेशनल ब्रॉडकास्टिंग एसोशिएशन के अध्यक्ष रजत शर्मा के पास शिकायत दायर कर इस पर कार्रवाई की मांग की है। पूनावाला ने अपना शिकायत पत्र ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। इसके जवाब में चव्हाणके ने कहा कि इस तरह के षड्यंत्र के पीछे ‘आतंकी समूह के मुखिया जाकिर नाईक’ शामिल हैं।

अब समझ नहीं आ रहा कि यह किस तरह की मानसिकता है, हर संगठन के लोग बोल रहे हैं कि इस मामले में सांप्रदायिकता को लाने की आवश्यकता नहीं है। यह मुद्दा धर्म का नहीं है, लेकिन आप उन्हें गलत ठहरा कर अपने आप को सही समझ रहे हैं।

हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई हम सब है भाईभाई” अगर आज के दौर में मीडिया को इस बात पर पालन करने को कह दिया जाए तो शायद उनकी टीआरपी ही ना बने या फिर वह खुद ही इस बात को कुबूल ना कर पाए।

“मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना” शायद हम अब यह भूल चुके हैं। स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर ही शायद हम शहीदों की बातों को याद करते हैं और फिर अगले दिन उनकी बातों को भूलकर मज़हब के लिए लड़ने लगते हैं। हमारे शहीद भगत सिंह का जितना हाथ आज़ादी में था तो उतना ही हाथ एपीजे अब्दुल कलाम का इस देश को आगे बढ़ाने में।

तो हम क्यों जीतने दे रहे हैं उन लोगों को जो इस देश में भाईचारा नहीं रहना देना चाहते और देश का खंडन करना चाहते हैं| मीडिया तो काम है टीआरपी बनाना उन्हें नहीं मतलब चाहे वह जैसे बने चाहे जो भी न्यूज़ दिखाकर बने| हमें याद रखना चाहिए। हम हिंदू मुस्लिम सिख इसाई नहीं हम हिंदुस्तानी हैं।

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