क्या ज़बरदस्ती जय श्री राम का नारा लगाने के लिए मुस्लिम रिक्शाचालक को पीटा गया?

मैं उनके आगे हाथ जोड़ रहा था, मैंने उनसे बहुत गुहार लगाई। कितनी बार कहा कि घर पर बच्चे मेरा इंतजार कर रहे हैं लेकिन उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी। मुझे लाठी-डंडे और रॉड से बहुत देर तक पीटते रहे। जब मैं गिर गया तब जाकर उन लोगों ने मुझे पीटना छोड़ा।

इतना सब कहते हुए नशीम शाह हांफने लगते हैं। नशीम गया के शेरघाटी के रहने वाले हैं। वहीं ई-रिक्शा चलाते हैं। नशीम बताते हैं कि बीते 13 अप्रैल को वे आम दिनों की तरह ही रिक्शा लेकर घर से निकले थे। शाम के वक्त चांदनी वस्त्रालय के पास कुछ लोगों ने उन्हें रुकने को कहा। सवारी देख कर नशीम ने रिक्शा रोका। उनलोगों ने नशीम से सत्संग नगर मोड़ तक जाने के लिए कहा। जब रिक्शा सत्संग नगर मोड़ पर पहुंचा तो उन्होंने थोड़ी दूर आगे तक छोड़ने की गुजारिश की। नशीम को लगा कि 6 सवारी से 30 रुपये और मिल जाएंगे, सो वे आगे चलने को तैयार हुए। इसी दौरान उनमें से किसी ने नशीम से उनका नाम पूछा। जब रिक्शा थोड़ा आगे बढ़ा तो उनलोगों ने रोकने के लिए कहा। रिक्शा रुकते ही उनलोगों ने मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान वहां लाठी-डंडे और रॉड लेकर कुछ और लोग जमा हो गए और वे भी नशीम को पीटने लगे। डेमोक्रेटिक चरखा से बात करते हुए नशीम ने कहा कि पीटते हुए उनलोगों ने मुझसे ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए कहा। 

(मारपीट के बाद चोट के निशान)

इस मामले में नशीम ने स्थानीय शेरघाटी थाने में अज्ञात लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई है। लेकिन घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस इस मामले में निष्क्रिय बनी हुई है। 
जब हमने शेरघाटी थानाध्यक्ष राजकिशोर सिंह से बात की तो उन्होंने पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बता दिया। उन्होंने कहा कि

पीड़ित पक्ष मामले को बेवजह दूसरी दिशा में मोड़ रहे हैं। नशीम शाह ने जब हमें आवेदन दिया था तो उन्होंने ‘जय श्री राम’ कहने के लिए मजबूर करने वाली बात नहीं कही थी। यह बात माले के कुछ नेताओं के आने के बाद जुड़ी। हमारे पास नशीम शाह का वीडियो भी है, जिसमें उन्होंने यह बात कुबूल की है। इस घटना से पूर्व रामनवमी के दिन भी उस इलाके में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश की गई थी। तब शोभायात्रा में शामिल कुछ लोग शराब पीकर नाले में गिर गए थे और उन्होंने दूसरे पक्ष पर मारपीट का आरोप लगाया था। हालांकि ऐसी कोई घटना हुई नहीं थी। हमें लगता है कि उन्हीं लोगों ने नशीम के साथ मारपीट की है। हम उसी दिशा में अनुसंधान कर रहे थे लेकिन पीड़ित व्यक्ति और कुछ नेताओं ने हमारे अनुसंधान को प्रभावित करने का प्रयास किया।

तस्वीर और नाम देने के बाद भी पुलिस ने कोई करवाई नहीं की


घटना के दो-तीन दिन बाद नशीम ने कुछ लोगों की तस्वीरें और नाम पुलिस को दिए थे। नशीम ने कहा कि जब पुलिस ने दो-तीन दिनों तक कोई करवाई नहीं की तो हमने शक के आधार पर सोशल मीडिया से निकाल कर कुछ लोगों की तस्वीर और फोटो पुलिस को दी थी। लेकिन फिर भी पुलिस ने कोई करवाई नहीं की।
इस पर थानाध्यक्ष राजकिशोर सिंह कहते हैं कि जिन लोगों की तस्वीरें और नाम हमें दिए गए थे, वे इस घटना में शामिल नहीं थे। उनमें से कुछ लोग तो एक महीने पहले से रिम्स में इलाज करवा रहे हैं। हमारी जांच को भटकाने के लिए ये नाम और तस्वीरें दी गयी थी। इनका घटना से कोई संबंध नहीं है। यह सामान्य मारपीट की घटना है लेकिन कुछ नेता इसे जबरन सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि जब हमने उनसे मारपीट के आरोपियों की गिरफ्तारी पर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि हमने पूरा सीसीटीवी फुटेज देखा है, हमें कहीं भी नशीम का ई-रिक्शा नहीं दिखा। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ कोई गवाह भी नहीं मिल रहा। ऐसे में हम किसे गिरफ्तार कर लें? 

रामनवमी के विवाद से जुड़ी हो सकती है घटना

नशीम शाह बताते हैं कि रामनवमी के दिन शोभायात्रा में शामिल कुछ लोगों ने उर्दू मोहल्ला में हुड़दंग किया था। इस दौरान वहां हल्की झड़प भी हुई थी। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसे शांत कर दिया था लेकिन मुझे लगता है कि मेरे साथ मारपीट की घटना इस विवाद से जुड़ी हो सकती है।
थानाध्यक्ष राजकिशोर सिंह भी इस ओर इशारा करते हैं। उन्होंने कहा कि हमने इसी दिशा में जांच शुरू की थी। शोभायात्रा में कुछ लोग शराब पीकर शामिल हुए थे और उन्होंने हुड़दंग मचाया था। इस दौरान मारपीट की भी सूचना मिली थी। लेकिन किसी पक्ष ने कोई आवेदन नहीं दिया। इसलिए हमने इस पर और जांच नही की। जब नशीम शाह का मामला आया तो हमने उसी दिशा में जांच शुरू की। लेकिन नशीम और यहां आने वाले नेताओं ने तस्वीर और नाम देकर हमारी जांच को प्रभावित कर दिया। 

पीड़ित पक्ष पर दबाव बना रहे हैं थानाध्यक्ष

घटना के बाद माले की एक फैक्ट फाइंडिंग टीम नशीम शाह के घर पहुंची थी। इसी टीम के सदस्यों पर थानाध्यक्ष राजकिशोर सिंह अनुसंधान को प्रभावित करने का आरोप लगा रहे हैं। माले की राज्य कमिटी की स्थायी सदस्य रीता बर्णवाल इस कमिटी की सदस्य थीं। वे पुलिस पर पीड़ित परिवार को डराने का आरोप लगाती हैं। वे कहती हैं

पुलिस नशीम शाह पर दबाव बनाकर इस मामले को शांत करना चाहती है। परिवार के कई सदस्य नशीम की कमाई पर आश्रित हैं। उन्हें डर है कि उनके साथ फिर ऐसी घटना हो सकती है। पुलिस उन्हें सुरक्षा देने के बजाय उल्टे उन्हीं पर अनुसंधान को प्रभावित करने का आरोप लगा रही है जो पूरी तरह गलत है। 

रीता इस घटना को पूरी तरह से हेट क्राइम का मामला मानती हैं। वे कहती हैं कि पूरे देश में रामनवमी के दौरान जो घटनाएं हुई, उसी का असर यहां भी हुआ है। हमने इसके खिलाफ आंदोलन किया है। नशीम को न्याय नहीं मिला तो हम आगे भी आंदोलन करेंगे।

न्याय की उम्मीद छोड़ चुके हैं नशीम

नशीम कहते हैं कि मुझे इस मामले को अब और आगे नहीं बढ़ाना है। ईद आने वाली है। घर में बच्चे हैं। सोचा था कि उन्हें नए कपड़े दिलाऊंगा। लेकिन अब तो खाने के भी पैसे नहीं कमा रहा हूं। आसपास के लोग मदद कर रहे हैं तो घर चल रहा है। वे मदद न करें तो पता नहीं क्या होगा।मेरे पास लोग आते हैं। घटना के बारे में पूछते हैं लेकिन मुझे कोई न्याय नहीं दिलवा पाया। पुलिस भी मुझे किसी से कुछ कहने से मना करती है। मैं कमाने-खाने वाला आदमी हूं। इस लड़ाई में पड़ जाऊंगा तो सब चौपट हो जाएगा। इसलिए मुझे अब किसी से कुछ नहीं कहना है।

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